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रायपुर में व्यापारियों का ‘No UPI Day’, 2 अक्टूबर को सिर्फ कैश में होगा कारोबार; जानिए क्या है पूरा मामला

रायपुर। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को राजधानी रायपुर के कुछ व्यापारी संगठनों ने ‘No UPI Day’ मनाने का ऐलान किया है। महादेव घाट रोड व्यापारी कल्याण संघ और मोहबा बाजार व्यापारी संघ ने व्यापारियों से इस सांकेतिक विरोध में शामिल होने की अपील की है। साथ ही आम लोगों से भी इस दिन दुकानों पर नगद भुगतान कर अभियान का समर्थन करने का आग्रह किया गया है।

व्यापारी संगठनों का यह कदम डिजिटल पेमेंट से जुड़े मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2 अक्टूबर को यह पहल इन व्यापारी संघों से जुड़े बाजारों और दुकानों तक सीमित रहेगी।

2 अक्टूबर को सिर्फ कैश में कारोबार की अपील

महादेव घाट रोड व्यापारी कल्याण संघ के सदस्यों ने ‘No UPI Day’ के समर्थन में अपनी दुकानों पर व्यापारी संघ की ओर से जारी पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों के जरिए ग्राहकों को जानकारी दी जा रही है कि 2 अक्टूबर को दुकानों में केवल नगद लेन-देन किया जाएगा।

व्यापारी संघ की बैठक में सदस्यों ने इसे सांकेतिक विरोध के तौर पर समर्थन दिया। बैठक में अध्यक्ष विमल बाफना, राम चौरसिया, विनोद जोशी, राजकुमार अग्रवाल, प्रशांत भागवत, वैभव सालुंखे, ईश्वर सिंह, विनोद जैन और मोहन पटेल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

मोहबा बाजार व्यापारी संघ ने भी किया समर्थन

मोहबा बाजार व्यापारी संघ ने भी 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ के समर्थन की घोषणा की है। संघ के अध्यक्ष रवि थामस, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत सिंह सोमवंशी, उपाध्यक्ष सम्पत सिंह राजपूत, महासचिव नवीन देवांगन, सचिव राम सिंह और कोषाध्यक्ष आशुतोष महाकालकर ने विज्ञप्ति जारी कर अभियान का समर्थन करने की अपील की है।

संघ ने आम जनता से आग्रह किया है कि 2 अक्टूबर को संबंधित दुकानों पर खरीदारी के दौरान UPI के बजाय नकद भुगतान करें, ताकि व्यापारी संगठनों के सांकेतिक विरोध को समर्थन मिल सके।

आखिर व्यापारी क्यों कर रहे हैं ‘No UPI Day’?

इस अभियान के पीछे मुख्य मुद्दा UPI के जरिए होने वाले कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR यानी Merchant Discount Rate से जुड़ा है। व्यापारियों की चिंता खासतौर पर उन प्रस्तावित/लागू शुल्क व्यवस्थाओं को लेकर है, जिनके तहत कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर शुल्क लगने की बात कही गई है।

यहां यह समझना जरूरी है कि हर UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगता। UPI के सामान्य छोटे भुगतान अभी भी बड़े पैमाने पर बिना ग्राहक से अलग शुल्क लिए किए जाते हैं। व्यापारी संगठनों की आपत्ति विशेष रूप से कुछ निश्चित श्रेणी के बड़े लेन-देन पर लगने वाले शुल्क को लेकर है।

₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर 0.4% MDR का मुद्दा

व्यापारियों के बीच चर्चा के मुताबिक, चुनिंदा P2M UPI पेमेंट में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान चिंता का विषय है। वहीं ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहने की बात कही जा रही है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह का MDR ग्राहक से अलग से वसूल किए जाने वाला शुल्क नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी जिम्मेदारी मर्चेंट यानी दुकानदार की होती है। यही वजह है कि व्यापारियों का कहना है कि बड़े डिजिटल लेन-देन पर शुल्क का असर सीधे उनके कारोबार की लागत पर पड़ सकता है।

ग्राहक पर सीधे नहीं पड़ेगा MDR का बोझ

MDR को लेकर ग्राहकों में भी भ्रम की स्थिति हो सकती है। किसी पात्र UPI भुगतान पर MDR लागू होने का मतलब यह नहीं है कि दुकानदार ग्राहक से उसके ऊपर अलग से 0.4 प्रतिशत या कोई अन्य शुल्क वसूल सकता है।

मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम से जुड़ी व्यवस्था के तहत MDR की लागत संबंधित मर्चेंट पर पड़ती है। इसलिए व्यापारियों की चिंता मुख्य रूप से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत और उनके मार्जिन पर संभावित असर को लेकर है।

क्या हर दुकान पर बंद रहेगा UPI?

‘No UPI Day’ का आह्वान व्यापारी संगठनों की ओर से किया गया सांकेतिक विरोध है। इसलिए इसे पूरे रायपुर में सभी दुकानों पर UPI बंद रहने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जिन व्यापारी संघों ने इसका समर्थन किया है, उनके सदस्य दुकानों पर 2 अक्टूबर को नकद भुगतान स्वीकार करने की अपील कर रहे हैं।

आम लोगों के लिए इसका मतलब यह है कि यदि वे इस अभियान में शामिल बाजारों में खरीदारी करने जा रहे हैं, तो कैश साथ रखना बेहतर होगा, क्योंकि संबंधित व्यापारी उस दिन UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का निर्णय ले सकते हैं।

गांधी जयंती के दिन क्यों चुना गया 2 अक्टूबर?

व्यापारी संगठनों ने ‘No UPI Day’ के लिए 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती का दिन चुना है। इस दिन अभियान को सांकेतिक विरोध के तौर पर आयोजित किया जा रहा है। व्यापारियों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शुल्क से जुड़ी अपनी चिंताओं को सामने रखना और सरकार एवं संबंधित संस्थाओं का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है।

इस तरह रायपुर में 2 अक्टूबर को होने वाला ‘No UPI Day’ डिजिटल भुगतान के खिलाफ सामान्य विरोध नहीं, बल्कि व्यापारियों की ओर से MDR से जुड़े मुद्दे पर सांकेतिक प्रदर्शन के रूप में सामने आया है।

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