CG Farmer Protest: साय सरकार के फैसले के बाद किसानों ने स्थगित किया आंदोलन, गन्ने की कीमत ₹329 से बढ़कर ₹425 प्रति क्विंटल

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा में अपनी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने फिलहाल प्रदर्शन स्थगित करने का ऐलान किया है। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में 8 अक्टूबर से जारी आंदोलन के कारण शहर के प्रवेश मार्गों पर चक्काजाम की स्थिति बन गई थी। किसानों ने ट्रैक्टर और अन्य वाहन खड़े कर आवागमन रोक दिया था। इस दौरान आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और स्कूलों में भी छुट्टी करनी पड़ी थी।
शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव के साथ भारतीय किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक हुई। करीब रात 1 बजे तक चली इस बैठक में किसानों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद संघ ने आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की। हालांकि, किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। शेष मांगों का समाधान नहीं होने पर किसानों ने भविष्य में राजधानी रायपुर में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

गन्ने की खरीदी दर में 96 रुपये की बढ़ोतरी
किसानों के आंदोलन के बीच सरकार ने गन्ना उत्पादकों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गन्ने की खरीदी दर 329 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला किया गया है। इस तरह गन्ने की कीमत में 96 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि होगी।
गन्ने की कीमत लंबे समय से नहीं बढ़ने को लेकर किसान अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। भारतीय किसान संघ ने इस मुद्दे को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया था। सरकार के निर्णय से गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी उपज का पहले की तुलना में बेहतर मूल्य मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों के हित में गन्ना खरीदी की दर बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पेराई सत्र 2025-26 में पहले खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी बढ़ी हुई दर के आधार पर किए जाने का फैसला किया गया है। इससे संबंधित किसानों को पुरानी और नई दर के बीच का अंतर मिलने का लाभ होगा।
कृषक उन्नति योजना और धान खरीदी को लेकर भी बनी सहमति
भारतीय किसान संघ की 23 सूत्रीय मांगों में खेती की लागत, फसलों के उचित मूल्य, बिजली और धान खरीदी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। बैठक के दौरान कुछ अन्य प्रमुख मांगों पर भी सहमति बनने की जानकारी सामने आई है।
किसानों की मांगों में कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का अनुदान देने का विषय भी शामिल था। इस मांग पर सहमति बनने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना और धान पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ना है।
इसके अलावा धान खरीदी केंद्रों पर तौल की मात्रा 41.500 किलोग्राम से घटाकर 40.700 किलोग्राम करने की मांग पर भी सहमति की जानकारी दी गई है। वहीं, बिजली के निजीकरण की योजना पर रोक लगाने का मुद्दा भी बैठक में उठा। इन विषयों पर हुए निर्णयों के विस्तृत क्रियान्वयन और आधिकारिक आदेशों की जानकारी अलग से स्पष्ट होना बाकी है।
8 अक्टूबर से चल रहा था किसानों का आंदोलन
कबीरधाम जिले में भारतीय किसान संघ ने 8 अक्टूबर से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलन के दौरान किसानों ने कवर्धा शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर ट्रैक्टर और बैरिकेड लगाकर रास्ते बंद कर दिए थे। इसके कारण शहर में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसानों ने अपनी मांगों पर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए चक्काजाम किया था। प्रदर्शन के दौरान केवल एम्बुलेंस को आने-जाने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई थी। यातायात बाधित होने के कारण स्कूलों में भी छुट्टी करनी पड़ी थी।
स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, शुरुआती बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे और आंदोलन जारी रखा।
इसके बाद मामला प्रदेश स्तर पर पहुंचा और भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री तथा दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ बैठक हुई। देर रात तक चली बातचीत के बाद कई मांगों पर सहमति बनने से आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का रास्ता निकला।
मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ देर रात हुई बैठक
शुक्रवार रात भारतीय किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और उपमुख्यमंत्री अरुण साव के साथ बैठक की। बैठक में किसानों की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।
संघ की ओर से गन्ने की कीमत बढ़ाने, फसल विविधीकरण के लिए अनुदान देने, धान खरीदी केंद्रों पर तौल की व्यवस्था में बदलाव और बिजली के निजीकरण से संबंधित विषय उठाए गए। चर्चा के बाद प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की जानकारी दी गई।
बैठक के बाद किसान संघ ने प्रदर्शन स्थगित करने का निर्णय लिया। इससे कवर्धा में बाधित यातायात बहाल होने और आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी 23 मांगों का समाधान हो गया है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी लंबित हैं और उन्हें लेकर आगे भी सरकार से बातचीत की जाएगी।
डोमन चंद्रवंशी बोले- आंदोलन खत्म नहीं, केवल स्थगित किया गया है
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने कहा कि फिलहाल आंदोलन को स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। उनके मुताबिक, जिला स्तर की मांगों को पूरा करने के लिए कलेक्टर की ओर से आश्वासन दिया गया है, जबकि शासन स्तर की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है।
उन्होंने बताया कि गन्ने की कीमत में वृद्धि किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल थी। पिछले कई वर्षों से गन्ने की दर में बदलाव नहीं होने के कारण किसान इस मुद्दे को लगातार उठा रहे थे। अब खरीदी दर 329 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा धान के बदले अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की सब्सिडी देने की मांग पर भी सहमति बनने की बात कही गई है।
चंद्रवंशी के अनुसार, कुछ बड़े मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में संघ ने आंदोलन को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है, लेकिन शेष मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान और 1700 करोड़ रुपये के बोनस का मुद्दा लंबित
किसान संघ की प्रमुख लंबित मांगों में धान खरीदी के भुगतान और पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल की बोनस राशि का मुद्दा भी शामिल है।
संघ की ओर से धान के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर में केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए गए समर्थन मूल्य को जोड़कर भुगतान करने की मांग उठाई गई थी। इसके अलावा पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल की लंबित 1,700 करोड़ रुपये की बोनस राशि का भुगतान करने की मांग भी रखी गई।
किसान संघ के जिलाध्यक्ष के अनुसार, इन दोनों मांगों पर बैठक में सहमति नहीं बन पाई। यही वजह है कि संगठन ने आंदोलन समाप्त करने के बजाय उसे स्थगित करने का निर्णय लिया है।
इन मांगों को लेकर आगे सरकार के साथ बातचीत की जा सकती है। यदि लंबित मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता है, तो किसान फिर से आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो रायपुर में होगा प्रदर्शन
भारतीय किसान संघ ने साफ कर दिया है कि फिलहाल कवर्धा में चक्काजाम और प्रदर्शन को स्थगित किया जा रहा है, लेकिन आंदोलन की आगे की रणनीति लंबित मांगों के समाधान पर निर्भर करेगी।
संघ के मुताबिक, जिला स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से आश्वासन मिला है। वहीं, राज्य सरकार के स्तर पर कुछ मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया गया है।
यदि बाकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो प्रदेशभर के किसान राजधानी रायपुर में प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे साफ है कि गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी और अन्य मांगों पर सहमति के बावजूद किसानों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
फिलहाल कवर्धा में किसानों के प्रदर्शन को स्थगित करने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन धान के भुगतान, लंबित बोनस और अन्य मांगों को लेकर सरकार के अगले कदम पर किसान संघ की नजर रहेगी।



