छत्तीसगढ़

खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन, ‘कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ’ के नारे; 24 सूत्रीय मांगों पर स्वतंत्र जांच की मांग

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में गुरुवार को छात्रों ने विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। संगीत एवं नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना देकर ‘कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुलपति डॉ. लवली शर्मा के वर्तमान और पूर्व कार्यकाल से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने, विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।

छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में शिक्षकों की कमी, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में देरी, परीक्षा और अंकसूची से जुड़ी समस्याओं, शोध कार्यों में कथित नियमों की अनदेखी, शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता तथा संगीत एवं नृत्य विभागों में आवश्यक सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि इन समस्याओं का असर उनकी पढ़ाई, व्यावहारिक प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और भविष्य की शैक्षणिक संभावनाओं पर पड़ रहा है।

18 सूत्रीय मांगों के साथ प्रदर्शन, ज्ञापन में 24 बिंदुओं का उल्लेख

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगों की बात कही, जबकि सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में क्रमांक 1 से 24 तक मांगें दर्ज हैं। इनमें विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज से लेकर अलग-अलग विभागों में शिक्षण व्यवस्था सुधारने तक की मांगें शामिल हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समस्याओं का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि शिकायतों को किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि सभी संबंधित प्रक्रियाओं और दस्तावेजों की नियमों के अनुसार जांच कराई जाए।

छात्रों ने मांग की है कि शासन स्तर पर एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। उनके अनुसार, जांच ऐसी सक्षम और निष्पक्ष एजेंसी या व्यक्ति से कराई जानी चाहिए, जिस पर किसी पक्ष का प्रभाव न हो। ज्ञापन में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या समान स्तर के उपयुक्त व्यक्ति से जांच कराने का सुझाव भी दिया गया है।

कुलपति डॉ. लवली शर्मा के पूर्व और वर्तमान कार्यकाल की जांच की मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुलपति डॉ. लवली शर्मा के वर्तमान और पूर्व कार्यकाल से जुड़े विभिन्न आरोपों एवं विवादों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में नियुक्तियों, कर्मचारियों की सेवाओं, शोध और शोधार्थियों से संबंधित प्रक्रियाओं तथा वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों के दस्तावेजों की पड़ताल करने की मांग शामिल है।

छात्रों ने वर्ष 2018 से जुड़े एक पुराने विवाद का उल्लेख करते हुए उस समय की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि उस मामले में जांच हुई थी, तो उससे संबंधित रिपोर्ट और निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। इसके साथ ही वर्ष 2025 में कुलपति की नियुक्ति के समय सामने आए विरोध और उससे संबंधित परिस्थितियों की भी जांच कराने की मांग की गई है।

विद्यार्थियों का कहना है कि इन मामलों में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। हालांकि, ये आरोप और मांगें प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से उठाई गई हैं। इनकी पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही की जा सकेगी।

शिक्षकों की कमी और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल

छात्रों ने संगीत संकाय के विभिन्न विभागों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई है। ज्ञापन में गायन, तबला और तंत्री विभाग में स्वीकृत पदों, रिक्त पदों तथा विद्यार्थियों की संख्या का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, शिक्षकों की कमी होने पर विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं और व्यावहारिक संगीत प्रशिक्षण प्रभावित होता है। उन्होंने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में कथित देरी या अनियमितता की जांच कराने और जरूरत के अनुसार समय पर नियुक्तियां करने की मांग की।

इसके अलावा, संगीत संकाय में हाल ही में की गई डीन या अधिष्ठाता की नियुक्ति की पात्रता और प्रक्रिया की जांच कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। छात्रों ने कहा कि नियुक्ति में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और विश्वविद्यालय तथा संबंधित नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

तबला, सितार और म्यूजिकोलॉजी जैसे विषयों में सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े सवालों के साथ कथक विभाग में बाहरी विषय विशेषज्ञों की पात्रता को लेकर भी छात्रों ने जांच की मांग उठाई है।

रियाज के लिए वाद्ययंत्र नहीं मिलने की शिकायत

विश्वविद्यालय में संगीत की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों ने अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें रियाज के लिए आवश्यक वाद्ययंत्र और अन्य उपकरण पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहे हैं। इसके कारण कुछ विद्यार्थियों को अपने घरों से वाद्ययंत्र और जरूरी सामान लाना पड़ता है।

छात्रों के अनुसार, संगीत विश्वविद्यालय में नियमित अभ्यास, प्रशिक्षित शिक्षकों का मार्गदर्शन और जरूरी उपकरण शैक्षणिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। यदि इन सुविधाओं की कमी रहती है, तो विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण और मंचीय प्रस्तुतियों की तैयारी पर असर पड़ सकता है।

ज्ञापन में आवश्यक वाद्ययंत्रों, माइक्रोफोन और गुणवत्तापूर्ण ध्वनि व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ उपकरणों के नियमित रखरखाव तथा तकनीकी जांच की मांग की गई है। छात्रों ने पर्याप्त कक्षाएं, अभ्यास स्थल और प्रस्तुतियों के लिए उपयुक्त मंच उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है।

अंकसूची की गलतियों और छात्रवृत्ति में देरी का मुद्दा

छात्रों ने अंकसूचियों और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में कथित त्रुटियों को लेकर भी शिकायत की है। उनका कहना है कि कुछ विद्यार्थियों की अंकसूची में नाम, विशेषकर अंग्रेजी में दर्ज नाम की वर्तनी और अन्य व्यक्तिगत या शैक्षणिक विवरणों में गलतियां हैं।

विद्यार्थियों के अनुसार, ऐसी त्रुटियां आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और दस्तावेज सत्यापन के दौरान परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसलिए उन्होंने सभी विद्यार्थियों की अंकसूचियों और शैक्षणिक अभिलेखों का सत्यापन कर गलतियों में समयबद्ध सुधार करने की मांग की है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रवृत्ति से संबंधित समस्या भी सामने आई। कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि 40 से 45 विद्यार्थियों की अंकसूची उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी छात्रवृत्ति रुक रही है। उनके मुताबिक, उन्हें संबंधित विद्यार्थियों की सूची गुरुवार शाम मिली और उन्होंने रातभर काम करवाकर शुक्रवार सुबह सभी विद्यार्थियों तक अंकसूची पहुंचाने की व्यवस्था की।

यह कुलपति की ओर से दी गई जानकारी है। छात्रवृत्ति से जुड़े सभी मामलों की स्थिति और समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

नामांकन, परीक्षा और सेमेस्टर फीस में पारदर्शिता की मांग

ज्ञापन में विद्यार्थियों ने नामांकन, परीक्षा, परिणाम और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं से जुड़े शुल्कों की वसूली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न चरणों में अलग-अलग शुल्क लिए जाने से विद्यार्थियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

छात्रों ने विश्वविद्यालय से शुल्क संरचना सार्वजनिक करने और प्रत्येक शुल्क के नियमसम्मत आधार, राशि तथा वसूली की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी शुल्क की वसूली में नियमों का उल्लंघन या दोहराव पाया जाता है, तो उसे रोकने और आवश्यकतानुसार समायोजन या वापसी की व्यवस्था की जानी चाहिए।

इसके अलावा, परिणाम समय पर जारी करने, अंकसूची में त्रुटियों का शीघ्र सुधार करने और विद्यार्थियों को वैध पहचान-पत्र समय पर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। छात्रों के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में देरी से प्रवेश, छात्रवृत्ति, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

शोधार्थियों के पंजीयन और शोध निर्देशन पर भी सवाल

प्रदर्शनकारी छात्रों ने शोधार्थियों के पंजीयन और शोध निर्देशन से संबंधित प्रक्रियाओं की जांच कराने की मांग भी रखी है। ज्ञापन में शोधार्थियों के स्थानांतरण, दयालबाग संस्थान से संबंधित मामलों और सेवानिवृत्ति के बाद भी शोध निर्देशन जारी रहने जैसे विषय उठाए गए हैं।

छात्रों का कहना है कि शोध से जुड़ी प्रक्रियाओं में विश्वविद्यालय के नियमों और निर्धारित पात्रता का पालन होना चाहिए। इसलिए संबंधित अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही छात्रों ने रायगढ़ चक्रधर समारोह, यात्रा मानदेय में कथित दोहराव, निरीक्षण दलों में परिचित व्यक्तियों को शामिल करने और विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी, वेबसाइट तथा कैलेंडर के उपयोग से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं।

भरतनाट्यम विभाग में मृदंगम शिक्षक की नियुक्ति की मांग

ज्ञापन में भरतनाट्यम नृत्य विभाग की समस्याओं को अलग से प्रमुखता दी गई है। विद्यार्थियों के अनुसार, विभाग में केवल एक स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं और प्रशासनिक बैठकों एवं अन्य जिम्मेदारियों के कारण नियमित शिक्षण प्रभावित होने की स्थिति बनती है।

छात्रों ने दावा किया है कि विभाग में लगभग सात वर्षों से मृदंगम शिक्षक की कमी बनी हुई है। इसके अलावा, सेवानिवृत्त वोकल शिक्षक के स्थान पर नियमित नियुक्ति नहीं होने की शिकायत भी की गई है।

विद्यार्थियों का कहना है कि भरतनाट्यम के प्रशिक्षण में ताल, मृदंगम, गायन और अन्य संगीत संगत की अहम भूमिका होती है। प्रशिक्षित शिक्षकों और संगतकारों की कमी के कारण नियमित अभ्यास, मंचीय प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं की तैयारी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए छात्रों ने आवश्यक विषयों के प्रशिक्षित शिक्षकों तथा संगतकारों की नियुक्ति या व्यवस्था शीघ्र करने की मांग की है। उन्होंने युवा महोत्सव और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा पर्याप्त अभ्यास की सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की।

प्रायोगिक परीक्षाओं के समय और व्यवस्था पर आपत्ति

भरतनाट्यम विभाग से जुड़ी मांगों में प्रायोगिक परीक्षाओं की प्रक्रिया भी शामिल है। छात्रों का आरोप है कि प्रायोगिक परीक्षा के लिए निर्धारित 20 मिनट का समय कई बार पूरा नहीं दिया जाता और परीक्षा निर्धारित अवधि से पहले समाप्त कर दी जाती है।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इससे विद्यार्थियों को अपनी पूरी तैयारी और प्रस्तुति दिखाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने परीक्षा कार्यक्रम को व्यावहारिक और विद्यार्थीहितैषी बनाने, एक दिन में अत्यधिक परीक्षाएं रखने से बचने और विद्यार्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है।

इसके अलावा, भरतनाट्यम की कक्षाओं के लिए पर्याप्त कमरे, प्रायोगिक परीक्षाओं और मंचीय प्रस्तुतियों के लिए उपयुक्त स्थान तथा जरूरी ध्वनि उपकरणों की व्यवस्था करने की मांग भी ज्ञापन में दर्ज है।

प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन करने और कक्षाओं की समय-सारणी सुधारने की मांग

छात्रों ने विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश संबंधी औपचारिकताओं के लिए बार-बार खैरागढ़ आना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं।

ज्ञापन में प्रवेश आवेदन, दस्तावेज अपलोड, शुल्क भुगतान और सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही GE, SEC और VAC सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की समय-सारणी में कथित अनियमितताओं को दूर करने की बात कही गई है।

विद्यार्थियों का कहना है कि अलग-अलग विषयों की कक्षाओं के समय में टकराव होने से उपस्थिति, पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा की तैयारी पर असर पड़ता है। इसलिए समय-सारणी पहले से जारी करने और कक्षाओं के टकराव को दूर करने की मांग की गई है।

कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने क्या कहा?

प्रदर्शन और छात्रों की मांगों को लेकर कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि विश्वविद्यालय में कोई धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षकों के निजी हित पूरे नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को उकसाया गया।

कुलपति ने कहा कि विद्यार्थी ही विश्वविद्यालय का आधार हैं और उनकी जायज जरूरतें उनकी प्राथमिकता हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति के लिए अंकसूची की समस्या का जिक्र करते हुए बताया कि 40 से 45 विद्यार्थियों की अंकसूची नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति रुकने की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल काम करवाया और शुक्रवार सुबह विद्यार्थियों तक अंकसूची पहुंचा दी।

डॉ. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी अपनी जो भी मांगें लेकर आए हैं, उन पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा। उनके मुताबिक, जो मांगें उचित हैं और जिन पर कार्रवाई की जा सकती है, उन्हें पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

इस तरह, जहां छात्र प्रशासनिक और शैक्षणिक मुद्दों पर स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं कुलपति ने विद्यार्थियों की जायज समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है। छात्रों के आरोपों और कुलपति की प्रतिक्रिया के बीच अब विश्वविद्यालय प्रशासन तथा शासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की मांगों को मुख्य रूप से इन बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • कुलपति के वर्तमान और पूर्व कार्यकाल से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करना।
  • संगीत एवं नृत्य विभागों में शिक्षकों की कमी दूर करना और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति समय पर करना।
  • डीन की नियुक्ति, भर्ती प्रक्रिया और शोध निर्देशन से जुड़े मामलों की जांच।
  • अंकसूची में त्रुटियों का सुधार और छात्रवृत्ति संबंधी समस्याओं का समाधान।
  • सेमेस्टर, परीक्षा और नामांकन शुल्क की संरचना सार्वजनिक करना।
  • विद्यार्थियों को समय पर पहचान-पत्र, परिणाम और शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराना।
  • भरतनाट्यम विभाग में मृदंगम, वोकल और अन्य जरूरी विषयों के प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था।
  • रियाज के लिए वाद्ययंत्र, माइक्रोफोन, ध्वनि व्यवस्था, अभ्यास कक्ष और मंच उपलब्ध कराना।
  • कक्षाओं की समय-सारणी और प्रायोगिक परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार।
  • प्रवेश प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन सुविधाओं का विस्तार।

अब शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर नजर

खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय में छात्रों का यह प्रदर्शन शैक्षणिक सुविधाओं, प्रशासनिक पारदर्शिता और विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर उठाए गए सवालों के कारण चर्चा में है। विद्यार्थियों ने शासन से स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, शिकायतों की जांच पूरी होने तक उनके शैक्षणिक हितों की रक्षा करने और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक अंतरिम व्यवस्था करने की मांग की है।

फिलहाल, छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सभी मांगों पर विस्तृत लिखित प्रतिक्रिया या जांच संबंधी निर्णय सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और शासन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं तथा शिक्षण व्यवस्था, संसाधनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए क्या निर्णय लिए जाते हैं।

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