
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए गंभीर बॉयलर हादसे के बाद प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, वहीं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी अपनी अलग जांच समिति गठित की है।
🔎 प्रशासन ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
सक्ति कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने डभरा एसडीएम को इस पूरे मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच के लिए 8 अहम बिंदु तय किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- हादसा कब और कैसे हुआ
- घटना के समय मौके पर कौन-कौन मजदूर मौजूद थे
- मृतकों और घायलों की पूरी जानकारी
- हादसे के पीछे की परिस्थितियां
- औद्योगिक सुरक्षा विभाग द्वारा पहले किए गए निरीक्षण
- क्या पहले कोई खामियां मिली थीं, और क्या कार्रवाई हुई
- हादसे का कारण तकनीकी था या मानवीय लापरवाही
- जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही तय करना
- भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के उपाय

⚠️ सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद पावर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निरीक्षण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर यह जांच का विषय होगा कि क्या पहले से किसी खतरे के संकेत थे और उन्हें नजरअंदाज किया गया या नहीं।
🏛️ कांग्रेस ने भी बनाई जांच समिति
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गर्मा गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर एक 9 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है।
इस समिति का नेतृत्व पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल कर रहे हैं। समिति में कई वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल हैं, जैसे:
- नोबेल वर्मा
- रामकुमार यादव
- अटल श्रीवास्तव
- बालेश्वर साहू
- राघवेंद्र सिंह
- व्यास कश्यप
- शेषराज हरवंश
यह समिति पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर जमीनी स्थिति का आकलन करेगी और अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी।

👉 आगे क्या?
अब सबकी नजरें मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे हादसे के असली कारणों और जिम्मेदारों का खुलासा होगा। साथ ही, यह भी तय होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सख्त कदम उठाए जाएंगे।



