MNS का CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा आंदोलन, राज ठाकरे 12 अक्टूबर से शुरू करेंगे हस्ताक्षर अभियान

मुंबई/महाराष्ट्र। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश में जारी राजनीतिक विरोध के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से पूरे महाराष्ट्र में हस्ताक्षर अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इस अभियान के जरिए पार्टी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और बैलट पेपर से चुनाव कराने जैसी मांगों को जनता के बीच उठाएगी।
पार्टी की ओर से इस अभियान की शुरुआत मुंबई से किए जाने की बात कही गई है। मनसे नेताओं का कहना है कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। पार्टी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से संपर्क कर हस्ताक्षर जुटाएगी और अपनी मांगों के समर्थन में जनमत तैयार करने की कोशिश करेगी।

राज ठाकरे ने किया राज्यव्यापी अभियान का ऐलान
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध के समर्थन में राज्यव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत पार्टी कार्यकर्ता महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के बीच जाएंगे और चुनाव व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर समर्थन जुटाएंगे।
मनसे इस अभियान को चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतंत्र की रक्षा से जोड़कर पेश कर रही है। पार्टी की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को रद्द करना और चुनाव बैलट पेपर के माध्यम से कराना शामिल है। इन मांगों के जरिए मनसे चुनाव व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां जनता के सामने रखने की तैयारी में है।
हालांकि, हस्ताक्षर अभियान के दौरान कितने लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है और हस्ताक्षर जुटाने के बाद उन्हें किस स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
मनसे नेता संदीप देशपांडे बोले- अगले हफ्ते सड़कों पर दिखेगी जनता
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने आंदोलन को लेकर कहा है कि आने वाले सप्ताह में जनता सड़कों पर नजर आएगी। उनके बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी हस्ताक्षर अभियान के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन को भी व्यापक रूप देने की तैयारी में है।
मनसे नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। उनका रुख है कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इस आंदोलन पर चाहे जो प्रतिक्रिया दें, लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर विरोध जारी रहेगा।
पार्टी के इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र में चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि हस्ताक्षर अभियान को जनता से कितना समर्थन मिलता है और इसके बाद मनसे आंदोलन को आगे किस रूप में ले जाती है।
जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन जारी है। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और राजनीतिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, इन मुद्दों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर विरोध दर्ज करा रहे हैं। दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच पुलिस की कार्रवाई और दर्ज की गई एफआईआर को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी सामने आई है।
दिल्ली में जारी विरोध अब महाराष्ट्र तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। मनसे के हस्ताक्षर अभियान की घोषणा को इसी व्यापक राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SIR प्रक्रिया और बैलट पेपर से चुनाव की मांग क्यों अहम?
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कवायद है। इसके तहत मतदाता सूची की जांच और पुनरीक्षण किया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक संगठनों की ओर से पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों और संभावित समस्याओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वहीं, बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। कुछ दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय पारंपरिक मतपत्रों के इस्तेमाल की मांग करते हैं, जबकि चुनाव आयोग की चुनाव व्यवस्था में EVM का इस्तेमाल किया जाता है।
मनसे ने इन मुद्दों को अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया है। पार्टी का उद्देश्य हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से इन मांगों के पक्ष में जनसमर्थन जुटाना है। हालांकि, हस्ताक्षर अभियान शुरू होने के बाद इसके प्रभाव और आगे की रणनीति का आकलन किया जा सकेगा।
महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या होगा असर?
राज ठाकरे की घोषणा के बाद महाराष्ट्र में चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। राज्यव्यापी अभियान के जरिए मनसे अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने और जनता के बीच इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगी।
फिलहाल अभियान की शुरुआत 12 अक्टूबर से मुंबई में प्रस्तावित है। इसके बाद इसे राज्य के अन्य हिस्सों में भी चलाया जाएगा। अभियान में जनता की भागीदारी, जुटाए गए हस्ताक्षरों की संख्या और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी।
मुख्य मांगें एक नजर में:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
- मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग।
- चुनाव बैलट पेपर से कराने की मांग।
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का मुद्दा।
मनसे के इस कदम से साफ है कि पार्टी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध और मुखर करने की तैयारी में है। अब देखना होगा कि सोमवार से शुरू होने वाला हस्ताक्षर अभियान महाराष्ट्र में कितना व्यापक रूप लेता है।



