
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के दौरान बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया। बैठक में उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि अब लापरवाही और ढिलाई बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🔹 क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि:
- जनता की समस्याओं के समाधान में देरी या लापरवाही अब स्वीकार नहीं होगी
- हर शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए
- अफसरों को फील्ड में जाकर काम करने और जमीनी हकीकत समझने के निर्देश दिए गए
🔹 अधिकारियों पर सख्ती
बैठक के दौरान कई मामलों में ढिलाई सामने आने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और कहा:
- जिम्मेदारी से काम नहीं करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी
- “काम नहीं तो कुर्सी नहीं” जैसी स्पष्ट चेतावनी दी गई
- शासन की योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचना चाहिए
🔹 राजस्व मामलों पर खास जोर
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से राजस्व विभाग के कामकाज पर चिंता जताई:
- नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे मामलों में देरी पर सख्ती
- लंबित प्रकरणों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश
- “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू करने की बात कही
🔹 सुशासन तिहार का उद्देश्य
यह पूरा अभियान राज्य में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है, जिसमें:
- जनता से सीधे संवाद
- शिकायतों का मौके पर समाधान
- योजनाओं की जमीनी समीक्षा
🔹 जनता को क्या मिलेगा फायदा?
इस सख्ती का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा:
- सरकारी कामों में तेजी आएगी
- दफ्तरों के चक्कर कम लगेंगे
- शिकायतों का समय पर समाधान होगा
👉 कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साफ संदेश दिया है कि अब शासन “सख्त और जवाबदेह” मोड में है, और लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय है।



