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धरना स्थल से बाहर कैसे हो गया जंतर-मंतर, 3 दिन में फैसला, पूरी कहानी यहां जानें..

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकेगा. सियासी पार्टियां और संगठन अब तीन स्थलों यानी रामलीला मैदान, पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड और बुराड़ी के मैदान पर ही प्रदर्शन कर सकेंगे.बता दें कि पिछले दिनों सीजेपी ने जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन किया था. इस बार सरकार ने उन्हें प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी और सीजेपी के तीनों बड़े नेताओं को हिरासत में लेकर छोड़ दिया था. अब जानते हैं कि जंतर-मंतर आखिर प्रोटेस्ट साइट से बाहर कैसे हुआ और तीन दिन में इस पर फैसला कैसे हो गया. कहानी के तार सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से जुड़ते हैं.

ऐसे जंतर- मंतर हुआ प्रोटेस्ट साइट से बाहर

बता दें कि शुक्रवार 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार से जंतर-मंतर के स्थान पर विरोध-प्रदर्शन के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थल को निर्धारित करने के प्रस्ताव पर फैसला लेने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए ऐसी वैकल्पिक जगह की पहचान की जानी चाहिए, जहां प्रदर्शनकारियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. इस सुनवाई के दौरान ही सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार जल्द ही किसी अन्य स्थल को निर्धारित प्रदर्शन स्थल घोषित करने पर फैसला लेगी. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी इस सुझाव पर सहमति जताई थी. 

CJI सूर्यकांत की पीठ ने कहा था कि सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि अब समय आ गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एक वैकल्पिक स्थल की पहचान की जाए और जहां प्रदर्शनकारियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. सक्षम प्राधिकारी इस संबंध में उचित निर्णय लें.  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हम जल्द ही किसी अन्य स्थान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल घोषित करने के संबंध में निर्णय लेंगे.यह बहुत अच्छा सुझाव था और सिब्बल ने भी इस पर निष्पक्ष रूप से सहमति जताई. सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपने आदेश में भी रिकॉर्ड किया था.

सरकार ने अब तीन जगहों को धरना स्थल के लिए घोषित कर दिया है. आइये इन तीनों जगहों के बारे में जानते हैं-

बुराड़ी ग्राउंड में किसान आंदोलन (2020-21) ये मैदान उस समय चर्चा में आया जब 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने किसानों को इस मैदान में प्रदर्शन करने की आधिकारिक अनुमति दी थी, जिससे यह आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र बना. दिल्ली में समय समय पर बड़े दलों, संगठनों और सामाजिक समूहों के विशाल प्रदर्शनों और रैलियों के लिए उस मैदान का प्रयोग किया जाता रहा ताकि शहर के अन्य हिस्सों का ट्रैफिक बाधित न हो.

रामलीला मैदान 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसी मैदान पर एक जनसभा में जय जवान, जय किसान का नारा दोहराया था. 1972 में इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के निर्माण और पाकिस्तान से युद्ध जीतने का जश्न मनाने के लिए इसी मैदान में एक बड़ी रैली की थी. जयप्रकाश नारायण ने इसी मैदान से कांग्रेस सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी और ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है नारा’ यहीं से दोहराया था.इसके अलावा दिसंबर 1952 में रामलीला मैदान में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्याग्रह भी किया था.

पूर्वी दिल्ली का CBD मैदान कड़कड़डूमा और शाहदरा इलाके में है. यह कमर्शियल और कम्युनिटी हब के पास एक खुला क्षेत्र है, जहां मेट्रो कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है.
इसका उपयोग बड़े पैमाने पर मेलों, धार्मिक आयोजनों और अब प्रदर्शनों के लिए किया जाता है.

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