
कोरिया। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के भरतपुर विकासखंड से एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है। भरतपुर के कोटाडोल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम करचा में एक महिला ने कथित रूप से मानसिक तनाव के चलते जंगल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतका के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि थाना में हुए व्यवहार और कार्रवाई की चेतावनी के कारण महिला गहरे सदमे में चली गई थी।

जानकारी के अनुसार, ग्राम करचा में किसी आपसी विवाद को लेकर दोनों पक्षों को कोटाडोल थाना बुलाया गया था। वहां पुलिस द्वारा पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर चालानी कार्रवाई और अन्य कार्रवाई की चेतावनी दी गई। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान पुलिस के व्यवहार से महिला बेहद घबरा गई और मानसिक रूप से टूट गई।
परिवार के लोगों का कहना है कि थाना से लौटने के बाद महिला पूरी रात तनाव में रही। वह लगातार रोती रही और किसी से ठीक से बात भी नहीं कर रही थी। परिजनों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह गहरे सदमे में थी। अगले दिन सुबह वह बिना किसी को बताए घर से निकल गई। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान गांव से लगे जंगल में महिला का शव पेड़ से फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम छा गया। परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य भी जुटाए गए।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि महिला पर कथित रूप से मानसिक दबाव नहीं बनाया गया होता, तो वह इतना बड़ा कदम नहीं उठाती। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच के दौरान पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की और इस मामले में किसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।



