Khelo India Tribal Games 2026 में कर्नाटक का जलवा, ओवरऑल टेबल में रहा नंबर-1…

यह खबर सिर्फ मेडल टैली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि भारत के जनजातीय इलाकों में खेल प्रतिभा कितनी गहराई तक मौजूद है।
Khelo India Tribal Games 2026 का पहला संस्करण कई मायनों में ऐतिहासिक रहा—क्योंकि इसमें पहली बार देशभर के आदिवासी खिलाड़ियों को एक राष्ट्रीय मंच पर अपनी ताकत दिखाने का मौका मिला।

अगर इसे आसान भाषा में समझें, तो इस पूरे टूर्नामेंट की कहानी तीन हिस्सों में बंटी हुई दिखती है:
- कर्नाटक का दबदबा
- ओडिशा और झारखंड की कड़ी चुनौती
- मेजबान छत्तीसगढ़ का सम्मानजनक प्रदर्शन
कर्नाटक कैसे बना ओवरऑल चैंपियन?
कर्नाटक ने पूरे टूर्नामेंट में शुरुआत से ही अपनी बढ़त बनाए रखी और आखिर तक किसी भी टीम को अपने ऊपर नहीं आने दिया।
उसने कुल:
- 23 स्वर्ण
- 8 रजत
- 7 कांस्य
यानी कुल 38 पदक जीतकर ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया।
असली जीत कहाँ से आई?
कर्नाटक की सबसे बड़ी ताकत रही तैराकी।
यहीं उसने सबसे ज्यादा बढ़त बनाई।
सिर्फ तैराकी में कर्नाटक का प्रदर्शन:
- 15 स्वर्ण
- 5 रजत
- 3 कांस्य
यानी लगभग साफ है कि अगर तैराकी में इतना बड़ा प्रदर्शन नहीं होता, तो शायद कर्नाटक को ओवरऑल टॉप पर बने रहना मुश्किल हो सकता था।
इसके अलावा:
- एथलेटिक्स में 5 स्वर्ण
- कुश्ती में 3 स्वर्ण
ने उसकी बढ़त और मजबूत कर दी।
मतलब कर्नाटक ने किसी एक खेल पर नहीं, बल्कि एक से ज्यादा इवेंट्स में निरंतर प्रदर्शन किया, और यही चैंपियन टीम की पहचान होती है।
ओडिशा क्यों रहा सबसे खतरनाक दावेदार?
अगर कोई टीम कर्नाटक को असली चुनौती देती नजर आई, तो वह थी ओडिशा।
ओडिशा ने कुल:
- 21 स्वर्ण
- 15 रजत
- 21 कांस्य
यानी कुल 57 पदक जीते।
यह आंकड़ा क्यों खास है?
क्योंकि पूरे टूर्नामेंट में 50 से ज्यादा पदक जीतने वाली ओडिशा अकेली टीम रही।
इसका मतलब यह है कि भले ही ओडिशा स्वर्ण पदकों में कर्नाटक से पीछे रह गई, लेकिन कुल प्रदर्शन और गहराई के मामले में उसने जबरदस्त निरंतरता दिखाई।
ओडिशा की सबसे बड़ी उपलब्धि:
वह एकमात्र ऐसी टीम रही जिसने सभी 6 प्रतिस्पर्धी खेल विधाओं में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता।
यह बहुत बड़ी बात है, क्योंकि इससे पता चलता है कि टीम किसी एक-दो खेलों पर निर्भर नहीं थी, बल्कि हर विभाग में संतुलित और मजबूत थी।
ओडिशा के प्रमुख स्वर्ण:
- एथलेटिक्स में 8
- तैराकी में 7
- साथ ही अन्य खेलों में भी गोल्ड
यही वजह रही कि आखिरी दिन तक ओडिशा की चर्चा “सबसे मजबूत चैलेंजर” के रूप में बनी रही।
झारखंड ने क्यों बटोरी सबसे ज्यादा तारीफ?
झारखंड ने कुल:
- 16 स्वर्ण
- 8 रजत
- 11 कांस्य
यानी कुल 35 पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया।
लेकिन उसकी असली ताकत सिर्फ पदक संख्या नहीं, बल्कि विशेष खेलों में उसका दबदबा था।
झारखंड की प्रमुख उपलब्धियां:
- एथलेटिक्स में 9 स्वर्ण
- कुश्ती में 4 स्वर्ण
- तीरंदाजी में 3 स्वर्ण
यह दिखाता है कि झारखंड की टीम स्पीड, ताकत और निशानेबाजी तीनों में बेहद मजबूत रही।
और सबसे खास बात—
झारखंड की स्टार खिलाड़ी कोमालिका बारी ने टूर्नामेंट के अंतिम दिन भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण जीता।
छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन कैसा रहा?
मेजबान होने के नाते छत्तीसगढ़ पर स्वाभाविक रूप से नजरें ज्यादा थीं।
और टीम ने उम्मीदों के मुताबिक सम्मानजनक और प्रेरक प्रदर्शन किया।
छत्तीसगढ़ के खाते में आए:
- 3 स्वर्ण
- 10 रजत
- 6 कांस्य
यानी कुल 19 पदक।
इस प्रदर्शन के साथ छत्तीसगढ़ ओवरऑल 9वें स्थान पर रहा।
छत्तीसगढ़ के लिए यह प्रदर्शन क्यों अहम है?
क्योंकि यह सिर्फ मेडल जीतने की बात नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि राज्य के आदिवासी अंचलों में खेल प्रतिभा बहुत मजबूत है।
छत्तीसगढ़ लंबे समय से हॉकी, एथलेटिक्स, तीरंदाजी और फुटबॉल जैसे खेलों में प्रतिभाएं देता रहा है, और इस टूर्नामेंट ने उसे फिर से साबित किया।
फुटबॉल में छत्तीसगढ़ की कहानी
छत्तीसगढ़ का आखिरी पदक पुरुष फुटबॉल में आया, जहाँ टीम ने रजत पदक जीता।
क्या हुआ फाइनल में?
- पश्चिम बंगाल ने फाइनल में छत्तीसगढ़ को 1-0 से हराया
- छत्तीसगढ़ को रजत पदक मिला
यह हार जरूर चुभने वाली रही होगी, क्योंकि मेजबान टीम के पास घरेलू दर्शकों के सामने स्वर्ण जीतने का मौका था।
लेकिन इसके बावजूद फाइनल तक पहुंचना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।
फुटबॉल में पदक विजेता:
- स्वर्ण – पश्चिम बंगाल
- रजत – छत्तीसगढ़
- कांस्य – अरुणाचल प्रदेश, गोवा
तीरंदाजी में किसने मारी बाजी?
अंतिम दिन तीरंदाजी सबसे ज्यादा चर्चा में रही, क्योंकि यहाँ कई स्वर्ण पदक दांव पर थे।
हालांकि तब तक यह लगभग तय हो चुका था कि ओडिशा कर्नाटक को ओवरऑल टेबल में नहीं पछाड़ पाएगा।
फिर भी तीरंदाजी में शानदार मुकाबले देखने को मिले।
महिला रिकर्व व्यक्तिगत
यह इवेंट झारखंड की स्टार खिलाड़ी कोमालिका बारी के नाम रहा।
परिणाम:
- स्वर्ण – कोमालिका बारी (झारखंड)
- रजत – भार्गवी भगोरा (गुजरात)
- कांस्य – रुओविनुओ थेउनुओ (नागालैंड)
यह जीत क्यों खास?
कोमालिका बारी पहले से ही पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन हैं।
ऐसे में उनसे उम्मीदें भी ज्यादा थीं और उन्होंने दबाव में शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण जीत लिया।
महिला रिकर्व टीम
यहाँ नागालैंड ने सबको चौंकाते हुए शानदार जीत दर्ज की।
परिणाम:
- स्वर्ण – नागालैंड
- रजत – झारखंड
- कांस्य – मध्य प्रदेश
यह नागालैंड के लिए बहुत अहम उपलब्धि रही, क्योंकि उसने सीमित अवसरों के बावजूद मजबूत टीमों को पछाड़कर स्वर्ण जीता।
पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत
इस वर्ग में ओडिशा के अर्जुन खारा ने शानदार प्रदर्शन किया।
परिणाम:
- स्वर्ण – अर्जुन खारा (ओडिशा)
- रजत – सोमनाथ हेम्ब्रम (ओडिशा)
- कांस्य – पवन परमार (मध्य प्रदेश)
यह ओडिशा के लिए डबल खुशी जैसा रहा, क्योंकि फाइनल पूरी तरह ओडिशा के खिलाड़ियों के बीच खेला गया।
पुरुष रिकर्व टीम
यह मुकाबला झारखंड ने अपने नाम किया।
परिणाम:
- स्वर्ण – झारखंड
- रजत – ओडिशा
- कांस्य – मेघालय
यह जीत झारखंड की तीरंदाजी परंपरा को फिर से मजबूत करती है।
कौन रहे टूर्नामेंट के सबसे बड़े स्टार?
हर बड़े खेल आयोजन की तरह इस टूर्नामेंट में भी कुछ खिलाड़ी ऐसे रहे जिन्होंने पूरे इवेंट पर अपनी छाप छोड़ दी।
1) मणिकांत एल (कर्नाटक)
वे इस पूरे टूर्नामेंट के सबसे सफल खिलाड़ी रहे।
उनके पदक:
- 8 स्वर्ण
- 1 रजत
यह असाधारण प्रदर्शन है।
किसी भी मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट में एक खिलाड़ी का इतने पदक जीतना बताता है कि वह अपनी स्पर्धा में कितनी बड़ी ताकत था।
2) धोनिश एन (कर्नाटक)
कर्नाटक के ही एक और स्टार धोनिश एन ने तैराकी में शानदार प्रदर्शन किया।
उनके पदक:
- 5 स्वर्ण
- 1 रजत
यानी कर्नाटक की चैंपियनशिप में इन दोनों तैराकों की भूमिका बेहद अहम रही।
3) अंजलि मुंडा (ओडिशा)
महिला वर्ग में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने शानदार प्रदर्शन किया।
उनके पदक:
- 5 स्वर्ण
उन्होंने साबित किया कि ओडिशा की महिला तैराकी टीम भी बेहद मजबूत है।
4) मेघांजलि (कर्नाटक)
कर्नाटक की महिला तैराक मेघांजलि भी चमकीं।
उनके पदक:
- 4 स्वर्ण
- 2 कांस्य
इससे साफ है कि कर्नाटक की सफलता में पुरुष और महिला दोनों तैराकों ने बराबर योगदान दिया।
कुल मिलाकर यह टूर्नामेंट कितना सफल रहा?
यह सवाल बहुत अहम है।
और जवाब है—काफी हद तक बहुत सफल।
भागीदारी ने क्या दिखाया?
इस उद्घाटन संस्करण में:
- 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हिस्सा लिया
- करीब 3,800 खिलाड़ी मैदान में उतरे
- 9 खेल विधाओं में मुकाबले हुए
कौन-कौन से खेल शामिल थे?
प्रतिस्पर्धी खेलों में:
- तीरंदाजी
- एथलेटिक्स
- फुटबॉल
- हॉकी
- तैराकी
- भारोत्तोलन
- कुश्ती
जबकि पारंपरिक खेल:
- मल्लखंभ
- कबड्डी
को डेमोंस्ट्रेशन स्पोर्ट्स के रूप में शामिल किया गया।
106 स्वर्ण पदक क्यों मायने रखते हैं?
पूरे टूर्नामेंट में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे।
यह संख्या बताती है कि आयोजन सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि वास्तव में व्यापक और प्रतिस्पर्धी था।
और सबसे अच्छी बात यह रही कि:
- 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने पदक जीते
- 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता
इसका मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि खेल प्रतिभा सिर्फ कुछ चुनिंदा राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में फैली हुई है—खासकर जनजातीय समुदायों के बीच।
टॉप 5 राज्यों का प्रदर्शन
1) कर्नाटक
- 23 स्वर्ण
- 8 रजत
- 7 कांस्य
2) ओडिशा
- 21 स्वर्ण
- 15 रजत
- 21 कांस्य
3) झारखंड
- 16 स्वर्ण
- 8 रजत
- 11 कांस्य
4) महाराष्ट्र
- 6 स्वर्ण
- 10 रजत
- 4 कांस्य
5) अरुणाचल प्रदेश
- 6 स्वर्ण
- 1 रजत
- 4 कांस्य
इस आयोजन का बड़ा संदेश क्या है?
Khelo India Tribal Games 2026 ने यह साफ कर दिया कि
भारत के जनजातीय समुदायों में खेल प्रतिभा सिर्फ मौजूद नहीं, बल्कि बेहद समृद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाने की क्षमता रखने वाली है।
यह आयोजन इसलिए खास है क्योंकि इसने उन खिलाड़ियों को मंच दिया, जो अक्सर दूरदराज़ इलाकों, सीमित संसाधनों और कम सुविधाओं के बावजूद असाधारण प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।



