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नेशनल ट्राइबल गेम्स का कल से आगाज, 32 राज्यों के 3000 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा…

25 मार्च 2026 से छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन राज्य के लिए काफी बड़ा खेल आयोजन माना जा रहा है। यह प्रतियोगिता 25 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगी और इसका आयोजन रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा (अंबिकापुर) में होगा। इस इवेंट की घोषणा केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने की थी।

, उद्घाटन समारोह 25 मार्च की शाम को होगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी शामिल होंगे। यह समारोह इसलिए भी खास है क्योंकि यह देशभर की जनजातीय खेल प्रतिभाओं को एक बड़े राष्ट्रीय मंच पर लाने की कोशिश है।

इस आयोजन में 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से करीब 3000 जनजातीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। यानी यह सिर्फ छत्तीसगढ़ का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का बड़ा स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म है, जहां आदिवासी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। PIB के अनुसार इसमें 7 मेडल स्पर्धाएं रखी गई हैं—एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, तीरंदाजी, तैराकी और कुश्ती

मुकाबलों का बंटवारा भी तीन शहरों में किया गया है।
रायपुर में हॉकी, फुटबॉल, तैराकी, तीरंदाजी और वेटलिफ्टिंग होंगी।
जगदलपुर में एथलेटिक्स के मुकाबले होंगे।
जबकि अंबिकापुर/सरगुजा में कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
इससे साफ है कि राज्य सरकार ने आयोजन को पूरे क्षेत्र में फैलाकर बड़े पैमाने पर करने की तैयारी की है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया है कि इस आयोजन में दो पारंपरिक खेलों को डेमो गेम्स के रूप में भी जगह दी गई है—कबड्डी और मलखंब। इसका मतलब यह है कि आयोजन सिर्फ आधुनिक प्रतिस्पर्धी खेलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पारंपरिक भारतीय और जनजातीय खेल संस्कृति को भी मंच मिलेगा। यह पहल सांस्कृतिक पहचान और खेल परंपरा दोनों को जोड़ती है।

छत्तीसगढ़ की भागीदारी की बात करें तो राज्य से कुल 164 खिलाड़ी उतरेंगे, जिनमें 86 पुरुष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि मेजबान राज्य की तैयारी मजबूत है और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी भी अच्छी संख्या में है।

एक और अहम बात यह है कि खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना लगातार जारी है और अब तक 500 से ज्यादा खिलाड़ी पहुंच चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उद्घाटन से पहले ही माहौल खेलमय हो चुका है और प्रशासन, खेल विभाग और आयोजन समिति बड़े स्तर पर तैयारी में जुटी है।

इस आयोजन की खास बातें

यह इवेंट कई मायनों में महत्वपूर्ण है—

पहला, यह जनजातीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का बड़ा मंच है।
दूसरा, छत्तीसगढ़ को एक बड़े खेल-आयोजन वाले राज्य के रूप में पेश करने का मौका है।
तीसरा, खेल के जरिए जनजातीय समाज की प्रतिभा, संस्कृति और अनुशासन को देश के सामने लाया जाएगा।
चौथा, रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा जैसे शहरों को खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और आयोजन अनुभव का फायदा मिलेगा।

आसान भाषा में पूरी खबर का मतलब

सीधे शब्दों में कहें तो,
25 मार्च से छत्तीसगढ़ में देश का बड़ा जनजातीय खेल महाकुंभ शुरू हो रहा है,
जिसमें केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, सीएम विष्णु देव साय, और राज्य सरकार के कई बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे।
करीब 3000 खिलाड़ी, 32 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश, 7 प्रतिस्पर्धी खेल, और 3 मेजबान शहर—ये सब मिलकर इसे बहुत बड़ा आयोजन बनाते हैं।

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