
रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बेटिंग साइट का पैनल और लिंक बेचने वाले आरोपी लोकेश अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस को शक है कि वह राजधानी समेत कई जिलों में फैले बड़े ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट्स के लिए मास्टर पैनल ऑपरेट करता था और अलग-अलग लोगों को आईडी तथा लिंक उपलब्ध कराकर क्रिकेट सट्टेबाजी का नेटवर्क चला रहा था। फिलहाल उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे ऑनलाइन सट्टे के बड़े सिंडिकेट और उससे जुड़े लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

मामले की शुरुआत उस समय हुई थी जब कबीरनगर पुलिस ने कोटा इलाके से आकाश टांडी और मोहम्मद आरिफ को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को परमानंद नगर रेलवे ट्रैक के पास से पकड़ा गया था। पुलिस ने उनके कब्जे से चार स्मार्टफोन और करीब पांच लाख रुपए नकद जब्त किए थे।
पूछताछ और मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों आरोपी लोकेश अग्रवाल से ऑनलाइन सट्टेबाजी की आईडी लेकर काम कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने लोकेश की तलाश शुरू की, लेकिन दोनों की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही वह फरार हो गया था। लगातार तलाश और तकनीकी जांच के बाद आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
ईशु अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि लोकेश अग्रवाल की गिरफ्तारी से ऑनलाइन सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा कि आरोपी “ऑल पैनल 777” सहित कई बेटिंग वेबसाइट्स का मास्टर पैनल संचालित कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का संबंध मटका सट्टा संचालन से भी हो सकता है।
पुलिस को रायपुर और आसपास के जिलों में फैले बड़े नेटवर्क के सुराग मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कारोबार के जरिए प्रतिदिन लाखों रुपए का लेनदेन हो रहा था। अब पुलिस संदिग्ध बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और डिजिटल भुगतान की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के मोबाइल फोन से मिले डेटा और बैंक खातों की डिटेल्स के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।



