छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने की तैयारी, PPP मॉडल पर बनेंगी कई बड़ी परियोजनाएं

Chhattisgarh State Industrial Development Corporation यानी CSIDC की सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) की अहम बैठक में राज्य के औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने को लेकर कई बड़े फैसलों पर चर्चा हुई। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव Vikas Sheel ने की।

PPP मॉडल से क्या होगा फायदा?

PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल में सरकार और निजी कंपनियां मिलकर परियोजनाओं का विकास करती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होता है और निजी क्षेत्र की तकनीक, प्रबंधन और निवेश का लाभ मिलता है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि तेजी से औद्योगिक अधोसंरचना तैयार कर निवेशकों को बेहतर सुविधाएं दी जाएं।


किन बड़ी परियोजनाओं पर हुई चर्चा?

1. बिलासपुर में ट्रांसपोर्ट नगर

Bilaspur में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना का उद्देश्य शहर के भीतर भारी वाहनों के दबाव को कम करना और लॉजिस्टिक गतिविधियों को व्यवस्थित करना है।

इस परियोजना के तहत संभावित रूप से—

  • ट्रक टर्मिनल
  • वेयरहाउसिंग सुविधा
  • पार्किंग जोन
  • ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर
  • माल परिवहन केंद्र

जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे व्यापार और परिवहन क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।


2. नवा रायपुर में अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर

Nava Raipur में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

यह सेंटर बनने के बाद—

  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बिजनेस सम्मेलन
  • निवेशक समिट
  • प्रदर्शनी और व्यापार मेले
  • सांस्कृतिक एवं कॉर्पोरेट कार्यक्रम

आयोजित किए जा सकेंगे। इससे नवा रायपुर को बिजनेस और इवेंट हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।


3. धमतरी और बलौदाबाजार में नए औद्योगिक क्षेत्र

Dhamtari के छाती क्षेत्र और Baloda Bazar के चंदेरी क्षेत्र में नए इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करने की योजना है।

इन क्षेत्रों में—

  • नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना
  • MSME उद्योगों को बढ़ावा
  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार
  • बेहतर सड़क और बिजली ढांचा

जैसी सुविधाओं पर फोकस रहेगा।


4. भिलाई में कमर्शियल टॉवर और फ्लेटेड फैक्ट्री

Bhilai में कमर्शियल टॉवर और फ्लेटेड फैक्ट्री बिल्डिंग विकसित करने का प्रस्ताव भी बैठक में प्रमुख रहा।

फ्लेटेड फैक्ट्री मॉडल छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इसमें एक ही भवन में अलग-अलग यूनिट्स को औद्योगिक स्पेस उपलब्ध कराया जाता है। इससे कम लागत में उद्योग शुरू करना आसान होगा।


निवेश बढ़ाने और नियम आसान बनाने पर जोर

मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्योगों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि निवेशकों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

बैठक में—

  • इंडस्ट्रियल पार्क आवंटन नियमों में सुधार
  • अनुमति प्रक्रियाओं का सरलीकरण
  • निवेशकों के लिए तेज मंजूरी व्यवस्था
  • औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत बनाने

जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।


वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी

बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव Rajat Kumar ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रस्तुति दी।

इसके अलावा—

  • Sushma Sawant
  • Dr. Rohit Yadav

सहित CSIDC, योजना और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।

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