वेदांता पावर प्लांट हादसा: एक और श्रमिक की मौत, आंकड़ा 24 पहुंचा; जांच में लापरवाही के गंभीर संकेत..

सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा अपडेट में एक और घायल श्रमिक की मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 24 हो गया है। पूरे मामले को विस्तार से समझिए:
⚫ मौत का आंकड़ा बढ़कर 24
हादसे में गंभीर रूप से घायल मनीष कुमार (झारखंड निवासी) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
उन्हें लखीराम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
- अब तक कुल 24 मजदूरों की मौत
- करीब 9–10 श्रमिक अभी भी गंभीर रूप से घायल, अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी

⚖️ FIR और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए:
- अनिल अग्रवाल (वेदांता ग्रुप चेयरमैन)
- प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों पर FIR दर्ज
इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं लगाई गई हैं:
- 106(1) – लापरवाही से मृत्यु
- 289 – खतरनाक उपकरण के उपयोग में लापरवाही
- 3(5) – सामूहिक जिम्मेदारी
👉 इस कार्रवाई पर नवीन जिंदल ने सोशल मीडिया पर आपत्ति भी जताई है।

🔍 हादसे की वजह क्या थी?
प्रारंभिक जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार:
- बायलर के फर्नेस में अत्यधिक ईंधन जमा हो गया था
- इससे अंदर का दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया
- दबाव के चलते निचला पाइप हट गया और जोरदार विस्फोट हुआ
👉 फोरेंसिक टीम ने भी इसी कारण को मुख्य वजह बताया है।
🚨 लापरवाही के गंभीर आरोप
जांच में कई बड़ी खामियां सामने आई हैं:
- मशीनों का समय पर रखरखाव नहीं हुआ
- सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया
- निगरानी में गंभीर लापरवाही
इन्हीं कारणों से इतना बड़ा हादसा हुआ, जिसमें 24 लोगों की जान चली गई।
🧪 विशेष जांच टीम (SIT) गठित
जांच को गहराई से समझने के लिए:
- पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर
- एडिशनल SP के नेतृत्व में SIT बनाई गई
- इसमें पुलिस + फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं
👉 टीम तकनीकी पहलुओं की विस्तार से जांच कर रही है।
🏛️ सरकार की कार्रवाई और मुआवजा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने:
- मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही
💰 मुआवजा:
- मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख (राज्य सरकार)
- घायलों को ₹50,000
- साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से:
- मृतकों के परिवार को ₹2 लाख
- घायलों को ₹50,000
⚠️ निष्कर्ष
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों में भारी लापरवाही का परिणाम माना जा रहा है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है—क्योंकि उसी के आधार पर तय होगा कि इस त्रासदी के लिए असल जिम्मेदार कौन है और क्या सख्त कार्रवाई होती है।



