टेक्नोलॉजी

अब 9 से ज्यादा SIM नहीं रख पाएंगे? DoT का नया नियम लागू, फोटो से होगी पहचान…

नई दिल्ली। अगर आपके नाम पर कई मोबाइल नंबर हैं या परिवार में अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के कई SIM कार्ड इस्तेमाल होते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक व्यक्ति के नाम पर तय मोबाइल कनेक्शन की सीमा को लेकर निगरानी और सख्त करने की दिशा में नया कदम उठाया है।

सरकार का उद्देश्य फर्जी नाम पर जारी SIM कार्ड, साइबर फ्रॉड, मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग और अवैध गतिविधियों में टेलीकॉम कनेक्शन के इस्तेमाल को रोकना है। नई व्यवस्था में खास तौर पर उन ग्राहकों की पहचान पर जोर दिया जाएगा, जिनके नाम पर पहले से अधिकतम अनुमत SIM कार्ड दर्ज हैं।

एक व्यक्ति कितने SIM रख सकता है?

मौजूदा व्यवस्था के तहत भारत के ज्यादातर हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है।

हालांकि, जम्मू-कश्मीर, असम और नॉर्थ-ईस्ट के कुछ राज्यों/क्षेत्रों में यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन है।

यह सीमा किसी एक कंपनी के SIM पर लागू नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के नाम पर मौजूद सभी टेलीकॉम कंपनियों के मोबाइल कनेक्शन को मिलाकर देखी जाती है।

यानी अगर किसी व्यक्ति के नाम पर Airtel के 3, Jio के 3, Vi के 2 और BSNL का 1 नंबर है, तो कुल 9 कनेक्शन माने जाएंगे।

9 SIM की सीमा पूरी होने के बाद क्या होगा?

अगर आपके नाम पर पहले से 9 SIM कार्ड सक्रिय हैं और आप नया मोबाइल कनेक्शन लेने जाते हैं, तो टेलीकॉम कंपनी अतिरिक्त पहचान जांच कर सकती है।

नई व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई व्यक्ति अपनी तय सीमा पूरी होने के बाद किसी दूसरे तरीके से अतिरिक्त SIM हासिल न कर सके।

इसमें सिर्फ ग्राहक द्वारा दिए गए दस्तावेज ही नहीं, बल्कि DoT के Digital Intelligence Platform (DIP) पर उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

फोटो से होगी ग्राहक की पहचान

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात फोटो आधारित पहचान है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, DoT ने 17 अगस्त को जारी निर्देश में टेलीकॉम कंपनियों को DIP पर उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल करने को कहा है। जिन ग्राहकों के नाम पर पहले से 9 मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं, उनकी प्रतिनिधि तस्वीरें टेलीकॉम कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

इन तस्वीरों के जरिए कंपनियां यह जांचने की कोशिश करेंगी कि तय सीमा पूरी कर चुका व्यक्ति दोबारा नया SIM लेने की कोशिश तो नहीं कर रहा है।

इसका एक फायदा यह होगा कि अलग-अलग कंपनियों या कनेक्शन आवेदन के दौरान पहचान में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ना आसान हो सकता है।

24 अगस्त से शुरू होगी नई व्यवस्था

निर्देश के अनुसार, 24 अगस्त 2026 से टेलीकॉम कंपनियों को जरूरी तकनीकी व्यवस्था लागू करनी होगी।

शुरुआत में जांच D+1 यानी अगले दिन के आधार पर किए जाने की बात कही गई है। इसका अर्थ है कि किसी दिन हुए कनेक्शन से जुड़ी जानकारी को अगले दिन सिस्टम के जरिए जांचा जाएगा।

इसके बाद DoT ने कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक इस व्यवस्था को रियल-टाइम सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य दिया है।

रियल-टाइम व्यवस्था लागू होने के बाद नया SIM जारी करते समय सिस्टम तत्काल यह पता लगाने में सक्षम होगा कि आवेदक के नाम पर पहले से कितने मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं।

अगर गलती से 9 से ज्यादा SIM एक्टिवेट हो गया तो?

नई व्यवस्था लागू होने के दौरान अगर तकनीकी या किसी अन्य वजह से किसी व्यक्ति के नाम पर तय सीमा से अधिक SIM कनेक्शन एक्टिवेट हो जाता है, तो अतिरिक्त कनेक्शन पर कार्रवाई की जा सकती है।

DoT के निर्देशों के मुताबिक, संबंधित टेलीकॉम कंपनी को ऐसे अतिरिक्त कनेक्शन को सस्पेंड करना होगा। मामले की जांच और समाधान होने तक उस अतिरिक्त नंबर पर सेवाएं प्रभावित रह सकती हैं।

इसलिए कई SIM रखने वाले ग्राहकों के लिए यह जरूरी है कि वे समय-समय पर यह जांच लें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं।

अलग-अलग कंपनियों के SIM भी जुड़ेंगे

यहां एक बात समझना सबसे जरूरी है कि SIM की सीमा टेलीकॉम कंपनी के हिसाब से अलग-अलग नहीं है।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति के पास:

  • Airtel के 3 SIM
  • Jio के 3 SIM
  • Vi के 2 SIM
  • BSNL का 1 SIM

है, तो कुल संख्या 9 मोबाइल कनेक्शन होगी।

ऐसे में वह व्यक्ति किसी दूसरी कंपनी से नया SIM लेने जाएगा, तो सिस्टम कुल कनेक्शनों को ध्यान में रखेगा।

सरकार क्यों सख्त कर रही है SIM नियम?

मोबाइल SIM आज बैंकिंग, UPI, सोशल मीडिया, OTP और डिजिटल पहचान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं का आधार बन चुका है। ऐसे में किसी व्यक्ति के नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन का गलत इस्तेमाल गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

फर्जी SIM का इस्तेमाल कई मामलों में साइबर ठगी, फर्जी पहचान, स्पैम कॉल और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

DoT की कोशिश है कि किसी व्यक्ति के नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की निगरानी बेहतर हो और तय सीमा से ज्यादा नंबर हासिल करने की कोशिश को शुरुआत में ही रोका जा सके।

अगर आपके नाम पर पुराने या इस्तेमाल नहीं होने वाले SIM हैं तो?

कई लोगों के नाम पर ऐसे मोबाइल नंबर भी सक्रिय रह जाते हैं जिनका वे अब इस्तेमाल नहीं करते। उदाहरण के लिए पुराना SIM बंद करने के बाद भी कनेक्शन पूरी तरह डिस्कनेक्ट न हुआ हो या परिवार के किसी सदस्य ने कभी उनके दस्तावेजों पर नंबर लिया हो।

ऐसे मामलों में कुल SIM की संख्या अनजाने में बढ़ सकती है।

इसलिए अगर आपको लगता है कि आपके नाम पर कई पुराने नंबर चल रहे हैं, तो उनकी जानकारी जांचना बेहतर है। जिस नंबर की जरूरत नहीं है, उसे संबंधित टेलीकॉम कंपनी के माध्यम से बंद कराया जा सकता है।

क्या आम ग्राहकों को परेशान होने की जरूरत है?

अगर आपके नाम पर तय सीमा के भीतर ही मोबाइल कनेक्शन हैं, तो इस व्यवस्था से सामान्य तौर पर कोई बड़ी परेशानी नहीं होनी चाहिए।

मुख्य असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके नाम पर 9 या उससे ज्यादा मोबाइल कनेक्शन पहले से मौजूद हैं या जो सीमा पूरी करने के बाद नया SIM लेना चाहते हैं।

सरकार का फोकस ग्राहकों के सामान्य मोबाइल इस्तेमाल को रोकना नहीं, बल्कि मोबाइल कनेक्शन की पहचान को मजबूत करना और फर्जी SIM के नेटवर्क पर लगाम लगाना है।

साइबर फ्रॉड रोकने में कितना मददगार होगा नया सिस्टम?

रियल-टाइम पहचान व्यवस्था लागू होने के बाद SIM जारी करने की प्रक्रिया में एक अतिरिक्त सुरक्षा स्तर जुड़ जाएगा। अगर किसी व्यक्ति की पहचान और उसके नाम पर पहले से मौजूद कनेक्शनों के बीच विसंगति मिलती है, तो नया कनेक्शन जारी करने से पहले जांच की जा सकेगी।

इससे फर्जी दस्तावेजों या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके SIM हासिल करने की कोशिशों को रोकने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, यह व्यवस्था साइबर अपराध को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती। SIM के अलावा बैंकिंग, डिवाइस, डिजिटल अकाउंट और अन्य माध्यमों पर भी सुरक्षा जरूरी है।

आपके लिए सबसे जरूरी बात

अगर आपके नाम पर 9 या उससे कम SIM हैं, तो सामान्य तौर पर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आपके नाम पर कई पुराने, इस्तेमाल नहीं होने वाले या परिवार के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबर हैं, तो उनकी स्थिति की जानकारी रखना बेहतर है।

खासकर Airtel, Jio, Vi और BSNL जैसे अलग-अलग ऑपरेटरों के नंबरों को जोड़कर कुल संख्या देखी जाती है। तय सीमा पार होने पर नया SIM लेने में दिक्कत आ सकती है और अतिरिक्त कनेक्शन पर कार्रवाई भी हो सकती है।

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