छत्तीसगढ़

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आएंगी छत्तीसगढ़, बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में होंगी शामिल; CM साय ने दी जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जल्द ही प्रदेश के दौरे पर आने वाली हैं। राष्ट्रपति बस्तर की विश्वप्रसिद्ध दशहरा परंपरा का हिस्सा बनेंगी और जगदलपुर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा में शामिल होने का उनका निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति का यह प्रस्तावित दौरा छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

CM विष्णुदेव साय के निमंत्रण पर छत्तीसगढ़ आएंगी राष्ट्रपति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रपति ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, राष्ट्रपति 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान उनके बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम है।

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर बस्तर क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहने की उम्मीद है। राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम से देशभर में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और यहां की विशिष्ट परंपराओं को सामने लाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, दौरे से जुड़े अन्य कार्यक्रमों और विस्तृत समय-सारिणी की जानकारी आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।

क्या है बस्तर दशहरा का मुरिया दरबार?

बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की सबसे विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। इसकी पहचान देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरा पर्व से अलग है। जहां कई स्थानों पर दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के रूप में मनाया जाता है, वहीं बस्तर दशहरा का प्रमुख केंद्र मां दंतेश्वरी की आराधना, जनजातीय आस्था और सदियों पुरानी स्थानीय परंपराएं हैं।

बस्तर दशहरा से जुड़ा मुरिया दरबार विशेष महत्व रखता है। यह परंपरागत रूप से बस्तर के जनजातीय समाज, पारंपरिक नेतृत्व और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विचार-विमर्श का मंच रहा है। इस आयोजन के माध्यम से क्षेत्र की समस्याओं, जनभावनाओं और परंपरागत व्यवस्थाओं को सामने रखने की परंपरा जुड़ी रही है।

मुरिया दरबार बस्तर की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है। यहां की परंपराएं यह दर्शाती हैं कि बस्तर में उत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी और ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़े हुए हैं।

75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा की अलग पहचान

जगदलपुर में मनाया जाने वाला बस्तर दशहरा अपनी लंबी अवधि और अनूठी रस्मों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह उत्सव कई सप्ताह तक चलने वाली परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों, रथ परिक्रमा और जनजातीय सहभागिता के लिए जाना जाता है। इसे बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है।

इस उत्सव में मां दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दशहरा के विभिन्न चरणों में बस्तर के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भाग लेते हैं। यही वजह है कि यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बन गया है।

राष्ट्रपति के दौरे से बस्तर की संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर दशहरा में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। बस्तर अपनी जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं, पारंपरिक रीति-रिवाजों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से इन परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है।

यह दौरा जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय परंपराओं के महत्व को रेखांकित करने के लिहाज से भी अहम है। बस्तर दशहरा जैसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाते हैं और बताते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं भारत की साझा विरासत को समृद्ध बनाती हैं।

फिलहाल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति के निमंत्रण स्वीकार करने और उनके प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे की जानकारी दी है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम से जुड़ी अन्य गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों का विवरण आधिकारिक जानकारी के आधार पर सामने आने की उम्मीद है।

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