भोपालमध्यप्रदेश

भोपाल में OBC महासभा का विधानसभा घेराव: 27% आरक्षण और 13% होल्ड पदों को लेकर बड़ा प्रदर्शन..

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन भोपाल में ओबीसी महासभा के कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता विधानसभा का घेराव करने के लिए मार्च निकाल रहे थे, लेकिन पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने पर पुलिस ने वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया और बाद में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

क्यों हुआ प्रदर्शन?

OBC महासभा की मुख्य मांगें हैं—

  • मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को पूरी तरह लागू किया जाए।
  • भर्ती प्रक्रियाओं में होल्ड किए गए 13% पदों को तुरंत मुक्त (Hold Free) कर नियुक्ति दी जाए।
  • वर्ष 2019 से लंबित आरक्षण विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए।
  • चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।

प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों कार्यकर्ता और अभ्यर्थी शामिल हुए। उनका कहना है कि सरकार ने 27% आरक्षण लागू करने का वादा किया था, लेकिन आज तक उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया।

पुलिस ने क्यों की कार्रवाई?

रोशनपुरा चौराहे पर सभा समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की और कई बार चेतावनी भी दी।

जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बसों के माध्यम से अन्य स्थानों पर भेज दिया।

विपक्ष भी पहुंचा समर्थन में

प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस नेता सचिन यादव भी मौके पर पहुंचे।

उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की नीतियों में दोहरापन है। उनका आरोप था कि सरकार पिछड़ा वर्ग के युवाओं के साथ न्याय नहीं कर रही और वर्षों से नियुक्तियां लंबित रखी गई हैं।

आखिर क्या है 27% OBC आरक्षण विवाद?

यह मामला मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती और आरक्षण संबंधी कानूनी लड़ाइयों में से एक माना जाता है।

पूरा मामला ऐसे समझिए

  • पहले मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 14% आरक्षण मिलता था।
  • वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 27% कर दिया।
  • इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई।
  • मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण पूरी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।

इसी बीच सरकार ने भर्ती प्रक्रिया रोकने के बजाय एक अंतरिम व्यवस्था अपनाई जिसे 87:13 फॉर्मूला कहा जाता है।

क्या है 87:13 फॉर्मूला?

इस फॉर्मूले के तहत—

  • 87% पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नियुक्तियां दे दी गईं।
  • जबकि 13% पदों को अदालत के अंतिम फैसले तक रोक (Hold) दिया गया।

यही 13% पद बढ़े हुए OBC आरक्षण से जुड़े हैं।

बताया जाता है कि ऐसे करीब 11 हजार पद वर्षों से खाली पड़े हैं।

क्यों नाराज हैं अभ्यर्थी?

हजारों उम्मीदवार लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, लेकिन—

  • उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला।
  • कई अभ्यर्थियों की आयु बढ़ गई।
  • वर्षों से नौकरी का इंतजार करना पड़ रहा है।
  • आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ती जा रही है।

इसी कारण चयनित उम्मीदवार लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने क्या कहा?

OBC महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि—

  • मध्य प्रदेश का पिछड़ा वर्ग कई वर्षों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।
  • सरकार ने 2019 से लंबित मामलों का समाधान नहीं किया।
  • लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
  • सरकार को तुरंत 27% आरक्षण लागू कर होल्ड किए गए पदों पर नियुक्ति देनी चाहिए।

आगे क्या होगा?

अब इस पूरे विवाद का समाधान काफी हद तक अदालत के अंतिम फैसले और राज्य सरकार की आगे की नीति पर निर्भर करेगा। यदि न्यायालय 27% आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की अनुमति देता है, तो करीब 11 हजार होल्ड पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है।

फिलहाल OBC महासभा ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो प्रदेशभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं मानसून सत्र के दौरान भी यह मुद्दा विधानसभा में प्रमुख राजनीतिक विषय बना रहने की संभावना है।

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