नवरात्रि में ऑटो सेक्टर की रफ्तार: कुल वाहन बिक्री में मामूली बढ़त, इलेक्ट्रिक वाहनों ने मारी बाजी; कारों की मांग में गिरावट

Automobile Desk: भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ऑटोमोबाइल बाजार में खरीदारी की रफ्तार तेज होती दिखाई दे रही है। नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान देशभर में वाहनों की खुदरा बिक्री में पिछले साल के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस बार बाजार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि जहां पारंपरिक कारों और एसयूवी की बिक्री में गिरावट देखने को मिली, वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों, दोपहिया वाहनों और कमर्शियल व्हीकल्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि त्योहारी सीजन में वाहन बाजार की मांग अलग-अलग सेगमेंट में अलग-अलग रुख अपना रही है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (FADA) की रिपोर्ट के मुताबिक, नवरात्रि के नौ दिनों में देशभर में कुल 10,32,000 वाहनों की खुदरा बिक्री दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में 10,12,000 वाहन बिके थे। इस तरह सालाना आधार पर कुल बिक्री में करीब 1.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आंकड़ों के अनुसार, इन नौ दिनों में औसतन हर मिनट लगभग 80 वाहनों का पंजीकरण हुआ। यह आंकड़ा बताता है कि त्योहारों के दौरान वाहन खरीदने को लेकर ग्राहकों में उत्साह बना हुआ है, लेकिन इस मांग का फायदा सभी वाहन श्रेणियों को समान रूप से नहीं मिला।

कुल बिक्री में बढ़ोतरी, लेकिन कार और SUV सेगमेंट में गिरावट
नवरात्रि के दौरान पैसेंजर व्हीकल्स यानी कारों और एसयूवी की बिक्री में कमजोरी देखने को मिली। इस सेगमेंट की खुदरा बिक्री सालाना आधार पर 13.66 प्रतिशत घटकर करीब 1.72 लाख यूनिट रह गई। कुल वाहन बिक्री में मामूली बढ़त के बावजूद कारों की मांग में आई यह गिरावट ऑटोमोबाइल कंपनियों और डीलरों के लिए अहम संकेत है।
बाजार में इस गिरावट के पीछे पिछले साल का ऊंचा बिक्री आधार एक संभावित वजह माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद कीमतों में कटौती का लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में ग्राहकों ने वाहन खरीदे थे। ऐसे में इस साल की नवरात्रि की बिक्री की तुलना जब पिछले वर्ष के आंकड़ों से की जाती है, तो आधार ऊंचा होने के कारण वृद्धि दर्ज करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, ग्राहक नई कार खरीदने से पहले कीमत, माइलेज, फीचर्स, फाइनेंसिंग विकल्प और छूट जैसे पहलुओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। ऐसे माहौल में कंपनियों और डीलरशिप को खरीदारों को आकर्षित करने के लिए अतिरिक्त ऑफर देने पड़ रहे हैं। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पूरे साल कारों की मांग कमजोर रहने वाली है। त्योहारी सीजन के शेष दिनों में बिक्री का रुख बदल सकता है।
दोपहिया वाहनों की बिक्री में उछाल, बाजार को मिला बड़ा सहारा
नवरात्रि के दौरान दोपहिया वाहन ऑटोमोबाइल बाजार के सबसे बड़े बिक्री सेगमेंट के रूप में सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की बिक्री में 5.78 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल बिक्री 7.60 लाख यूनिट के पार पहुंच गई।
कुल 10.32 लाख वाहनों की बिक्री में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। इससे पता चलता है कि बाइक और स्कूटर की मांग भारतीय बाजार में लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। व्यक्तिगत आवागमन, रोजमर्रा के इस्तेमाल और अपेक्षाकृत कम खरीद लागत के कारण दोपहिया वाहन बड़ी संख्या में ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं।
त्योहारी सीजन में कई ग्राहक नई बाइक या स्कूटर खरीदना शुभ मानते हैं। ऐसे में नवरात्रि और दिवाली जैसे अवसर इस सेगमेंट की बिक्री को बढ़ावा देते हैं। कंपनियां भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक फाइनेंस योजनाएं, एक्सचेंज ऑफर और चुनिंदा मॉडलों पर छूट पेश करती हैं। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों और मॉडलों के ऑफर अलग हो सकते हैं।
कमर्शियल वाहनों की मांग में 14.21 प्रतिशत की मजबूत बढ़त
कमर्शियल वाहन सेगमेंट ने भी नवरात्रि के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में सालाना आधार पर 14.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल 34,120 वाहनों की खुदरा बिक्री हुई।
कमर्शियल वाहनों की मांग में बढ़ोतरी को परिवहन और कारोबारी गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा सकता है। इस श्रेणी में माल ढुलाई, व्यावसायिक परिवहन और अन्य उपयोगों में आने वाले वाहन शामिल होते हैं। कारोबार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जरूरतें बढ़ने पर ऐसे वाहनों की मांग को सहारा मिल सकता है।
हालांकि, बिक्री में इस तेजी के पीछे किसी एक कारण को निर्णायक मानने के लिए अलग से विस्तृत आंकड़ों की जरूरत होगी। फिर भी, नवरात्रि के दौरान कमर्शियल वाहनों का मजबूत प्रदर्शन बताता है कि बाजार में केवल निजी इस्तेमाल के वाहनों की ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक जरूरतों से जुड़े वाहनों की भी मांग बनी हुई है।
ट्रैक्टर बिक्री में बढ़ोतरी, कृषि क्षेत्र से मिला समर्थन
नवरात्रि के नौ दिनों में ट्रैक्टर सेगमेंट में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक्टर की बिक्री 8.87 प्रतिशत बढ़कर 20,912 यूनिट तक पहुंच गई।
ट्रैक्टर की बिक्री को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है। कृषि कार्यों के लिए मशीनरी की जरूरत, किसानों की खरीद क्षमता और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग जैसे कारक इस सेगमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। नवरात्रि के दौरान दर्ज की गई बढ़ोतरी से कृषि से जुड़े वाहन बाजार में सकारात्मक गतिविधि का संकेत मिलता है।
हालांकि, ट्रैक्टर की बिक्री में तेजी को पूरे कृषि क्षेत्र की स्थिति का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। इसके लिए फसल उत्पादन, किसानों की आय, क्षेत्रवार बिक्री और अन्य आर्थिक संकेतकों को भी देखना जरूरी होता है।
कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की बिक्री में भी तेजी
वाहनों के अलावा निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेगमेंट ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। इस श्रेणी की बिक्री 10.86 प्रतिशत बढ़कर 2,185 यूनिट दर्ज की गई।
निर्माण उपकरणों की मांग को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, निर्माण गतिविधियों और व्यावसायिक निवेश जैसे कारक प्रभावित कर सकते हैं। नवरात्रि के दौरान इस श्रेणी में हुई बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि ऑटोमोबाइल से जुड़े व्यापक बाजार में भी कुछ क्षेत्रों में गतिविधियां तेज रहीं।
दूसरी ओर, थ्री-व्हीलर सेगमेंट में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इस श्रेणी की बिक्री 1.65 प्रतिशत घटकर 43,057 यूनिट रह गई। यानी कुल वाहन बाजार में बढ़ोतरी के बावजूद कुछ सेगमेंट ऐसे भी रहे, जहां बिक्री पिछले वर्ष के स्तर से नीचे रही।
इलेक्ट्रिक वाहनों ने मारी बाजी, करीब 27 प्रतिशत की छलांग
नवरात्रि के दौरान इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेगमेंट का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में करीब 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि कुल वाहन बाजार की 1.95 प्रतिशत की बढ़त से काफी अधिक है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई संभावित कारक हैं। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले परिचालन खर्च कम रखने की उम्मीद, पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता और बाजार में नए इलेक्ट्रिक मॉडलों की उपलब्धता ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ा सकती है। इसके साथ ही, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों और अन्य ईवी विकल्पों की बढ़ती मौजूदगी भी इस सेगमेंट के विस्तार में भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले ग्राहकों के लिए वाहन की वास्तविक रेंज, चार्जिंग की सुविधा, बैटरी वारंटी, सर्विस नेटवर्क और कुल खरीद लागत जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। अलग-अलग मॉडलों का प्रदर्शन और इस्तेमाल की लागत भी अलग हो सकती है।
करीब 27 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। फिर भी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रुझान नवरात्रि के बाद दिवाली और आने वाले महीनों में कितना कायम रहता है।
पश्चिम बंगाल में भी डीलरों को बिक्री बढ़ने की उम्मीद
क्षेत्रीय बाजारों में भी त्योहारी खरीदारी को लेकर सकारात्मक माहौल बताया गया है। FADA पश्चिम बंगाल के चेयरपर्सन रोहित चौधरी के अनुसार, राज्य में ग्राहकों का रुख उत्साहजनक रहा और प्रमुख डीलरशिप पर दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई।
डीलरों को उम्मीद है कि नवरात्रि के बाद दिवाली तक बाजार में खरीदारी की गति बनी रह सकती है। भारत में दिवाली के आसपास नई कार, बाइक और स्कूटर खरीदने की परंपरा के कारण वाहन कंपनियां इस अवधि को बिक्री बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखती हैं।
हालांकि, पश्चिम बंगाल में दर्ज रुझान को पूरे देश के बाजार की स्थिति नहीं माना जा सकता। अलग-अलग राज्यों में ग्राहकों की खरीद क्षमता, उपलब्ध मॉडल, डीलरशिप नेटवर्क और स्थानीय मांग के आधार पर बिक्री में अंतर हो सकता है।
कारों का स्टॉक बढ़ने से कंपनियां दे रही हैं आकर्षक ऑफर
पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री में गिरावट के साथ-साथ डीलरशिप पर उपलब्ध स्टॉक भी बाजार के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सितंबर के अंत तक कारों का स्टॉक लगभग 45 दिनों की औसत बिक्री के बराबर पहुंच गया था। इसे पिछले एक साल का उच्च स्तर बताया गया है।
इसके अलावा, सितंबर के दौरान फैक्ट्री से डीलरशिप तक पहुंचने वाली सप्लाई और वास्तविक खुदरा पंजीकरण के बीच अंतर के कारण स्टॉक में करीब 33,000 यूनिट की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई। जब डीलरशिप पर उपलब्ध वाहनों की संख्या बिक्री की रफ्तार के मुकाबले अधिक हो जाती है, तो कंपनियों और डीलरों को इन्वेंट्री कम करने के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।
इसी वजह से त्योहारी सीजन में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के ऑफर देखने को मिल रहे हैं। इनमें चुनिंदा मॉडलों पर नकद छूट, एक्सचेंज बोनस, कॉर्पोरेट ऑफर और फाइनेंसिंग से जुड़े लाभ शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ये ऑफर कंपनी, मॉडल, शहर, डीलरशिप और उपलब्ध स्टॉक के आधार पर अलग-अलग होते हैं।
कार खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह स्थिति फायदेमंद हो सकती है, लेकिन केवल छूट देखकर फैसला करना उचित नहीं है। वाहन की ऑन-रोड कीमत, बीमा, फाइनेंस की ब्याज दर, वारंटी और अन्य खर्चों की तुलना करना भी जरूरी है।
क्या दिवाली तक ऑटो बाजार में आएगी तेजी?
नवरात्रि के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन अलग-अलग श्रेणियों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं है। दोपहिया वाहन, कमर्शियल वाहन, ट्रैक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन बेहतर स्थिति में दिखाई दिए, जबकि कार और एसयूवी सेगमेंट को बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ा।
आगामी दिवाली के दौरान बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें ग्राहकों को मिलने वाली छूट, वाहन कंपनियों की नई पेशकश, उपलब्ध स्टॉक, फाइनेंसिंग विकल्प और ग्राहकों की खरीद क्षमता शामिल हैं। यदि डीलर आकर्षक ऑफर जारी रखते हैं और ग्राहक खरीदारी का फैसला लेते हैं, तो त्योहारी सीजन के शेष दिनों में बिक्री को समर्थन मिल सकता है।
फिलहाल, नवरात्रि की बिक्री से एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है—कुल वाहन बाजार में बढ़ोतरी भले ही सीमित रही हो, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों और कुछ अन्य श्रेणियों ने मजबूत प्रदर्शन किया है। अब सभी की नजर दिवाली के आंकड़ों पर रहेगी, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि त्योहारी मांग कितनी मजबूत बनी रहती है।



