जेलों में बंदियों के पुनर्वास की नई पहल: कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बनने की राह, सूरजपुर जिला जेल में 35 बंदियों ने सीखे स्वरोजगार के गुर…

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार जेलों में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में सूरजपुर जिला जेल में सेंट्रल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) द्वारा 13 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 35 बंदियों ने भाग लेकर अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए तैयार करना है।
13 दिनों तक चला प्रशिक्षण कार्यक्रम
यह प्रशिक्षण 2 जुलाई से 13 जुलाई 2026 तक आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को छोटे उद्योग शुरू करने से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां दी गईं, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें।
क्या-क्या सिखाया गया?
प्रशिक्षण में केवल उत्पाद बनाना ही नहीं, बल्कि व्यवसाय शुरू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी जानकारी दी गई।
उत्पाद निर्माण
- अगरबत्ती बनाना
- साबुन निर्माण
- हैंडवॉश तैयार करना
व्यवसाय प्रबंधन
- गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control)
- पैकेजिंग
- उत्पाद की मार्केटिंग
- वित्तीय साक्षरता
- बैंकिंग प्रक्रियाएं
- स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी
इससे प्रतिभागियों को उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया समझने का अवसर मिला।
लिखित और प्रायोगिक परीक्षा भी हुई
प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी 35 प्रतिभागियों का—
- लिखित मूल्यांकन
- प्रायोगिक परीक्षा
आयोजित की गई।
सफल प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाण-पत्र (Certificate) भी प्रदान किए गए, जो भविष्य में स्वरोजगार शुरू करने में उनके लिए उपयोगी होगा।
आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम
जिला जेल अधीक्षक ने कहा कि ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम बंदियों के व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।
उन्होंने बताया कि—
- आत्मविश्वास बढ़ता है।
- सकारात्मक सोच विकसित होती है।
- आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिलती है।
- समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्वास का रास्ता आसान होता है।
केवल प्रशिक्षण नहीं, रिहाई के बाद भी मिलेगा सहयोग
आरसेटी (RSETI) के निदेशक ने बताया कि संस्थान की भूमिका केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहती।
रिहाई के बाद भी प्रशिक्षित व्यक्तियों को—
- बैंक लिंकेज
- ऋण सुविधा
- व्यवसाय शुरू करने में मार्गदर्शन
- दो वर्षों तक हैंडहोल्डिंग सपोर्ट
उपलब्ध कराया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति वास्तव में अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
15 से 20 हजार रुपये तक हो सकती है मासिक आय
आरसेटी के अनुसार अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश जैसे लघु उद्योग कम लागत में शुरू किए जा सकते हैं।
उचित प्रशिक्षण और बाजार मिलने पर प्रशिक्षित व्यक्ति इन व्यवसायों के माध्यम से प्रति माह लगभग 15,000 से 20,000 रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं।
यह आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक हो सकती है।
पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रम पुनर्वास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
इनसे—
- दोबारा अपराध की संभावना कम हो सकती है।
- बंदियों को नई शुरुआत का अवसर मिलता है।
- स्वरोजगार के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
- समाज में पुनः सम्मानपूर्वक जीवन जीने की राह आसान होती है।
राज्य सरकार का उद्देश्य
छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य जेलों को केवल दंड देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाना है।
इसी सोच के तहत राज्य की विभिन्न जेलों में समय-समय पर कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्वरोजगार आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बंदी रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में नया जीवन शुरू कर सकें।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम
सूरजपुर जिला जेल में आयोजित यह 13 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश निर्माण जैसे व्यावहारिक कौशल सीखने के साथ बैंकिंग, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलने से बंदियों को भविष्य में स्वरोजगार स्थापित करने का बेहतर अवसर मिलेगा। इस तरह के प्रयास न केवल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे, बल्कि समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।




