“डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर 1.04 करोड़ की ठगी: बिलासपुर में रिटायर्ड प्रोफेसर बनी साइबर ठगों का शिकार….

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आया यह मामला साइबर अपराध के बदलते और खतरनाक रूप को उजागर करता है, जहां “डिजिटल अरेस्ट” जैसे फर्जी तरीके से एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को डराकर 1.04 करोड़ रुपए ठग लिए गए।
🔶 क्या है पूरा मामला?
पीड़िता रमन श्रीवास्तव, जो 2005 में डीपी विप्र कॉलेज से प्रोफेसर पद से रिटायर हुई थीं, अपने घर पर थीं जब 20 अप्रैल 2026 को उन्हें एक व्हाट्सएप मैसेज मिला।
मैसेज “संजय PSI” नाम के व्यक्ति की ओर से था, जिसने खुद को पुलिस अधिकारी बताया।
इसके बाद:
- वीडियो कॉल कर उन्हें “टेरर फंडिंग” में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया गया
- कहा गया कि उनके खिलाफ केस दर्ज है और उन्हें जेल हो सकती है
- उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में होने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया गया
🔶 कैसे दिया ठगी को अंजाम?
ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से:
- पीड़िता से उनके बैंक और परिवार की जानकारी ली
- करीब 2 घंटे 16 मिनट तक लगातार वीडियो कॉल पर दबाव बनाया
- डराया कि अगर किसी को बताया तो परिवार भी फंस जाएगा
डर के कारण:
- पहले RTGS से 20.20 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए
- फिर अलग-अलग खातों में किश्तों में कुल 1.04 करोड़ 80 हजार रुपए ऐंठ लिए गए
- इसके बाद भी 50 लाख रुपए और मांगने लगे
🔶 कब हुआ खुलासा?
जब ठगों ने और 50 लाख रुपए मांगे, तब:
- पीड़िता ने अपने बेटे प्रशांत श्रीवास्तव से पैसे मांगे
- बेटे को शक हुआ और वह तुरंत बिलासपुर पहुंचा
- तब जाकर पता चला कि यह पूरा मामला साइबर ठगी का है
🔶 पुलिस की कार्रवाई
पीड़िता की शिकायत के आधार पर:
- रेंज साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है
- आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं
- मामले की जांच जारी है और खातों की ट्रेसिंग की जा रही है
🔶 “डिजिटल अरेस्ट” क्या है?
यह एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग:
- खुद को पुलिस/CBI/ED अधिकारी बताकर कॉल करते हैं
- वीडियो कॉल के जरिए “जांच” का नाटक करते हैं
- पीड़ित को घर में रहने को कहते हैं, मानो वह हिरासत में हो
- डर और दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं
🔶 बचाव के जरूरी टिप्स
- कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर “गिरफ्तारी” नहीं करती
- पुलिस या जांच एजेंसी कभी सीधे पैसे ट्रांसफर नहीं मांगती
- ऐसे कॉल आते ही तुरंत परिवार या पुलिस से संपर्क करें
- अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें
👉 यह घटना साफ दिखाती है कि साइबर ठग अब मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।


