
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस द्वारा हारने वाली सीटों पर फोकस करने की बात पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तीखा हमला बोला है।
🔥 कांग्रेस पर सीधा हमला
मीडिया से चर्चा के दौरान अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति अब बेहद कमजोर हो चुकी है। उनके मुताबिक—
- कांग्रेस के पास न तो मजबूत नेतृत्व है और न ही स्पष्ट नीयत
- पार्टी केवल भ्रम और अफवाह फैलाने की राजनीति कर रही है
- जनता अब कांग्रेस से दूरी बना चुकी है, इसलिए उसे कोई फायदा नहीं मिलने वाला
उन्होंने कांग्रेस की रणनीति को “नकारात्मक राजनीति” करार देते हुए कहा कि इससे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।

🛡️ नक्सलवाद और बस्तर पर बयान
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर साव ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि—
- छत्तीसगढ़ में अब बेहतर सुरक्षा वातावरण बना है
- बस्तर क्षेत्र तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है
- सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाना है
⚠️ उद्योगपतियों और जमीन पर आरोपों का जवाब
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप कि गृहमंत्री शाह उद्योगपतियों के लिए जमीन देखने आ रहे हैं, इस पर साव ने कहा कि यह पूरी तरह अफवाह है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस “अर्बन नक्सल” की तरह काम करते हुए लोगों को गुमराह कर रही है।
🏥 विकास बनाम राजनीति
साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे—
- बस्तर में पेयजल समस्या
- अस्पतालों की स्थिति
- सड़क निर्माण
जैसे मुद्दों की चिंता नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर ओलंपिक में 3.91 लाख आदिवासियों ने पंजीकरण कराया, जो सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी का उदाहरण है।
🎯 सुशासन तिहार और कांग्रेस
कांग्रेस द्वारा “सुशासन तिहार” के दौरान सरकार की खामियां गिनाने की बात पर साव ने कहा कि—
जनता पहले ही कांग्रेस को “घर और मन से निकाल चुकी है”, अब उसकी बातों का कोई असर नहीं होगा।
🚨 अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया
पद्मश्री फूलबासन यादव के अपहरण की कोशिश की खबर पर साव ने कहा कि उन्होंने भी इस बारे में सुना है और प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर जांच करेगा।
साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में छत्तीसगढ़ को अपराध का गढ़ बना दिया गया था, इसलिए उन्हें ऐसे मुद्दों पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।
👉 कुल मिलाकर, उप मुख्यमंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होंगे, और दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आक्रामक रुख अपनाए रखेंगे।



