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‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर रोक बरकरार: दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की बंद, केंद्र की एडवाइजरी बनी वजह…

दिल्ली हाईकोर्ट में गैंगस्टर पर आधारित डॉक्यूसीरीज “लॉरेंस ऑफ पंजाब” को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम गया है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई बंद कर दी है। आइए पूरे घटनाक्रम को आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं:


⚖️ क्या है पूरा मामला?

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने एक याचिका दाखिल कर OTT प्लेटफॉर्म पर बनने वाली सीरीज “लॉरेंस ऑफ पंजाब” की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी।

उनका कहना था कि इस सीरीज से उनकी छवि और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।


🏛️ कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई बंद करते हुए कहा:

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पहले ही सीरीज रिलीज न करने की सलाह दे चुका है
  • इसलिए अब कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है
  • जब तक यह एडवाइजरी वापस नहीं ली जाती, तब तक सीरीज रिलीज होना मुश्किल है

👉 यह फैसला जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने दिया।


📢 सरकार की क्या भूमिका रही?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने:

  • 23 और 24 अप्रैल को OTT प्लेटफॉर्म को एडवाइजरी जारी की
  • कहा कि इस तरह की कंटेंट से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर खतरा हो सकता है

👉 यह कदम पंजाब पुलिस के इनपुट के आधार पर उठाया गया था।


⚠️ याचिकाकर्ता की चिंता क्या थी?

बिश्नोई पक्ष के वकील ने कहा:

  • मेकर्स नाम बदलकर या अलग रूप में सीरीज रिलीज कर सकते हैं
  • इससे फिर विवाद पैदा हो सकता है

👉 इस पर कोर्ट ने कहा:

  • अगर ऐसा होता है तो फिर से कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है

📺 OTT प्लेटफॉर्म का पक्ष

OTT प्लेटफॉर्म (जैसे ZEE5) की ओर से कहा गया:

  • वे मंत्रालय की एडवाइजरी को कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं
  • यह मामला जुरिस्डिक्शन (अधिकार क्षेत्र) से जुड़ा है
  • इसे अन्य कोर्ट (जैसे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट) में उठाया जाएगा

🔎 मामला इतना संवेदनशील क्यों?

  • लॉरेंस बिश्नोई कई गंभीर मामलों में आरोपी है
  • वह पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी मुख्य आरोपियों में शामिल है
  • पुलिस का मानना है कि ऐसी सीरीज से:
    • अपराधियों का महिमामंडन हो सकता है
    • समाज में गलत संदेश जा सकता है

📌 निष्कर्ष

  • फिलहाल “लॉरेंस ऑफ पंजाब” की रिलीज पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है
  • कोर्ट ने मामला बंद कर दिया है क्योंकि सरकार पहले ही रोक लगाने की सलाह दे चुकी है
  • आगे का फैसला अब इस बात पर निर्भर करेगा कि:
    • एडवाइजरी हटती है या नहीं
    • या OTT प्लेटफॉर्म कोर्ट में क्या फैसला हासिल करता है

👉 कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक वेब सीरीज नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन का बड़ा उदाहरण बन गया है।

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