
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अपराध से प्रभावित पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने के लिए लागू पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत बड़ी राशि के लंबित होने का मामला सामने आया है। राज्य में कुल 1099 मामलों में 37 करोड़ 7 लाख 42 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अब तक पात्र पीड़ितों को नहीं मिल पाई है। फंड की उपलब्धता नहीं होने के कारण लंबित इस राशि को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लंबित क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान को गंभीरता से लेते हुए सरकार से अब तक की गई कार्रवाई और आगे की समयसीमा की स्पष्ट जानकारी मांगी है।
1099 मामलों में अटकी है क्षतिपूर्ति राशि
पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना का उद्देश्य अपराध के कारण प्रभावित हुए पात्र पीड़ितों और उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्रता तय होने के बाद पीड़ितों को निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाना होता है।
लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसे 1099 मामले लंबित हैं, जिनमें कुल ₹37,07,42,000 की राशि का भुगतान किया जाना बाकी है। बताया गया है कि पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण यह राशि लंबित है।
इस स्थिति के कारण पात्र पीड़ितों को लंबे समय से आर्थिक सहायता का इंतजार करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने इसी मुद्दे पर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक सरकार देती रही भुगतान का आश्वासन
सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से लगातार यह बताया गया था कि पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018 के तहत राशि के आवंटन और भुगतान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि लंबित क्षतिपूर्ति राशि को फंड उपलब्ध होते ही जल्द जारी किया जाएगा। हालांकि, अब तक बड़ी संख्या में मामलों में भुगतान लंबित रहने पर हाईकोर्ट ने सरकार से ठोस और समयबद्ध जानकारी मांगी है।
हाईकोर्ट ने सक्षम अधिकारी से मांगा व्यक्तिगत शपथपत्र
डिवीजन बेंच ने मामले की निगरानी जारी रखते हुए सक्षम अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारी से स्पष्ट रूप से बताने को कहा है कि 37.07 करोड़ रुपये की लंबित क्षतिपूर्ति राशि जारी करने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही अधिकारी को यह भी बताना होगा कि लंबित राशि के भुगतान के लिए सरकार की ओर से क्या व्यवस्था की गई है और पात्र पीड़ितों को शेष राशि कब तक जारी कर दी जाएगी।
कोर्ट ने केवल सामान्य आश्वासन के बजाय भुगतान की समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हाईकोर्ट अब लंबित क्षतिपूर्ति के मामले में सरकार की कार्रवाई की नियमित निगरानी कर रहा है।
अलग बजट हेड बनाने की भी दी गई थी जानकारी
इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को जानकारी दी गई थी कि पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के लिए अलग बजट हेड बनाने की प्रक्रिया की गई है। इसका उद्देश्य योजना के तहत मिलने वाली राशि के आवंटन और भुगतान को अधिक व्यवस्थित करना बताया गया था।
अब हाईकोर्ट यह जानना चाहता है कि अलग बजट हेड बनाए जाने के बाद लंबित राशि के भुगतान की दिशा में वास्तविक रूप से कितनी प्रगति हुई है।
सरकार को देना होगा समयबद्ध भुगतान का विवरण
हाईकोर्ट ने सक्षम अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि 37.07 करोड़ रुपये की राशि कब तक जारी होगी और 1099 लंबित मामलों में पात्र पीड़ितों को भुगतान किस समयसीमा में किया जाएगा।
अदालत के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को अपने शपथपत्र में लंबित मामलों की स्थिति, राशि जारी करने के लिए उठाए गए कदम और भुगतान की प्रस्तावित समयसीमा की जानकारी देनी होगी।
23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले व्यक्तिगत शपथपत्र के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
फिलहाल, 1099 मामलों में लंबित 37 करोड़ 7 लाख 42 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति उन पात्र पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें अपराध से प्रभावित होने के बाद योजना के तहत आर्थिक सहायता मिलनी है। हाईकोर्ट की निगरानी के बाद अब सरकार पर इस राशि के भुगतान को लेकर ठोस और समयबद्ध कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।



