
गरियाबंद। विकास कार्यों को लेकर वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा झेल रहे मैनपुर नगर के स्टापडेम मोहल्ले के लोगों के लिए एक ग्रामीण ने मिसाल पेश कर दी है। शासन और प्रशासन से लगातार गुहार लगाने के बावजूद जब पुल निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई, तब मोहल्ले के निवासी और मुर्गा व्यवसायी लोचन चक्रधारी ने अपने निजी खर्च पर नदी पर पुल का निर्माण शुरू कर दिया। करीब 10 से 12 लाख रुपये की लागत से बन रहा यह पुल अब अंतिम चरण में है और आने वाले बारिश के मौसम में दर्जनों परिवारों को राहत देगा।

20-25 वर्षों से झेल रहे थे परेशानी
तहसील मुख्यालय मैनपुर से गुजरने वाली फुलझर नदी के उस पार ग्राम पंचायत मैनपुरकला के वार्ड क्रमांक 1 में लगभग 30 से 35 परिवार निवास करते हैं। बारिश के चार महीनों में इन परिवारों का संपर्क मुख्य नगर से लगभग कट जाता है। नदी पर बने जर्जर और करीब 20 फीट गहरे स्टापडेम को पार कर लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए आना-जाना पड़ता है, जो किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को होती है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर स्टापडेम पार करना पड़ता है, जबकि किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
वर्षों तक लगाई गुहार, नहीं मिला समाधान
स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष पुल निर्माण की मांग रखी। जनपद पंचायत से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील मुख्यालय होने के बावजूद उनकी इस मूलभूत समस्या पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।
लोचन चक्रधारी ने उठाया जिम्मा
जब लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण लोचन चक्रधारी ने स्वयं आगे आकर पुल निर्माण का निर्णय लिया। उन्होंने अपने निजी संसाधनों और कर्ज लेकर लगभग 10 से 12 लाख रुपये खर्च कर नदी पर पुल का निर्माण शुरू किया। वर्तमान में निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और केवल एप्रोच रोड पर मुरमीकरण का कार्य शेष बचा है।
लोचन चक्रधारी का कहना है कि उन्होंने अपने परिवार और मोहल्ले के लोगों की परेशानियों को देखते हुए यह कदम उठाया। उनका मानना है कि यदि समय रहते पुल नहीं बनता तो हर साल लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता।
तकनीकी मदद भी नहीं मिली
लोचन चक्रधारी के पुत्र डोलेश चक्रधारी और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण के दौरान उन्होंने जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन और डिजाइन संबंधी सलाह देने की अपील की थी। लेकिन कई बार अनुरोध करने के बावजूद कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारी सहयोग करते तो पुल निर्माण और अधिक सुरक्षित तथा बेहतर तरीके से हो सकता था। प्रशासनिक उदासीनता के कारण उन्हें पूरी जिम्मेदारी स्वयं उठानी पड़ी।
इलाके में हो रही सराहना
लोचन चक्रधारी की इस पहल की पूरे क्षेत्र में जमकर प्रशंसा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां वर्षों से सरकारी स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला, वहां एक आम नागरिक ने अपनी मेहनत की कमाई और कर्ज लेकर लोगों की समस्या दूर करने का प्रयास किया है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लोचन चक्रधारी को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किया जाए। साथ ही पुल निर्माण में उनके योगदान को देखते हुए सरकार द्वारा शेष अधूरे कार्यों को पूरा कराया जाए ताकि यह पुल पूरी तरह सुरक्षित और उपयोगी बन सके।
बनी प्रेरणा की मिसाल
लोचन चक्रधारी की पहल केवल एक पुल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी, जनसेवा और सामुदायिक भावना का उदाहरण बन गई है। उनके इस प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी पूरे समुदाय की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है। उनकी यह पहल आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई है।



