विश्व रक्तदाता दिवस पर राज्यपाल रमेन डेका का संदेश: “रक्तदान सबसे बड़ा दान, इससे बड़ी कोई सेवा नहीं”

रमेन डेका ने कहा कि “मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म दूसरे के जीवन की रक्षा करना है और यदि यह कार्य अपने रक्त की एक बूंद से संभव हो जाए, तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता। रक्तदान सबसे बड़ा दान है और इससे बड़ी कोई सेवा नहीं है।”
राज्यपाल विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर Indian Red Cross Society द्वारा लोकभवन में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदाता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सर्वाधिक रक्तदान करने वाले 30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

स्वैच्छिक रक्तदाताओं का सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों का सम्मान करना था, जिन्होंने वर्षों से नियमित और निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर अनेक जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचाया है। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे रक्तदाता समाज के वास्तविक नायक हैं और उनकी सेवा भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। एक यूनिट रक्त किसी दुर्घटना पीड़ित, गंभीर मरीज, प्रसूता महिला या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति के लिए नया जीवन बन सकता है।

रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आज भी विज्ञान रक्त का कृत्रिम विकल्प तैयार नहीं कर पाया है। अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त केवल स्वस्थ व्यक्तियों के स्वैच्छिक रक्तदान से ही उपलब्ध हो सकता है। इसलिए समाज के प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान से न केवल किसी का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि इससे समाज में मानवता और सेवा की भावना भी मजबूत होती है।
इन बीमारियों में सबसे अधिक होती है रक्त की आवश्यकता
राज्यपाल ने बताया कि कई गंभीर बीमारियों और आपात स्थितियों में रक्त की आवश्यकता जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। इनमें प्रमुख हैं—
- Thalassemia
- Sickle cell disease
- Anemia
- Hemophilia
- Cancer
- सड़क दुर्घटनाएं और अन्य आपातकालीन स्थितियां
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में समय पर रक्त उपलब्ध होना मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित होता है।
छत्तीसगढ़ के रक्तदाताओं की सराहना
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के स्वैच्छिक रक्तदाताओं की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रदेश के लोगों में सेवा और परोपकार की भावना अद्भुत है। यहां के रक्तदाता वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणा है और अधिक से अधिक युवाओं को भी इससे जुड़ना चाहिए।
रेडक्रॉस ब्लड बैंक के कार्यों की सराहना
राज्यपाल ने Indian Red Cross Society के ब्लड बैंक और उसकी टीम के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था वर्षों से जरूरतमंद मरीजों तक सुरक्षित और जीवनरक्षक रक्त पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है और समाज में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
लोकभवन में लगा रक्तदान शिविर
विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर लोकभवन परिसर में रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। इसमें लोकभवन के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर स्वैच्छिक रक्तदान अभियान में भागीदारी निभाई।
रेडक्रॉस स्मारिका का विमोचन
समारोह के दौरान रेडक्रॉस की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर रक्तदान जागरूकता और रेडक्रॉस की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई।
कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें—
- तोमन साहू (चेयरमेन, छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी)
- रूपल पुरोहित (सचिव)
- सी.आर. प्रसन्ना (राज्यपाल के सचिव)
- रूपेश पाणिग्रही (उपाध्यक्ष)
- संजय पटेल (कोषाध्यक्ष)
- सत्यनारायण पाण्डेय
- अशोक अग्रवाल
सहित बड़ी संख्या में स्वैच्छिक रक्तदाता, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, रेडक्रॉस के पदाधिकारी और सहयोगी उपस्थित रहे।
मुख्य बातें एक नजर में
- विश्व रक्तदाता दिवस पर लोकभवन में सम्मान समारोह आयोजित।
- सर्वाधिक रक्तदान करने वाले 30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया।
- राज्यपाल ने कहा— “रक्तदान सबसे बड़ा दान है, इससे बड़ी कोई सेवा नहीं।”
- रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान अत्यंत आवश्यक।
- थैलेसीमिया, सिकल सेल, एनीमिया, हीमोफिलिया, कैंसर और दुर्घटनाओं में रक्त की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
- लोकभवन में रक्तदान शिविर आयोजित कर अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।



