
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से मिली नियमित जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का निर्देश भी दिया।

सुप्रीम कोर्ट में किस पीठ ने की सुनवाई?
मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के समय में जमानत आदेशों को चुनौती देने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है।
जमानत रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि जमानत आदेश में कोई कानूनी त्रुटि है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को समाप्त करने के लिए केवल इसी आधार पर जमानत रद्द करना उचित है या नहीं, इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
इस टिप्पणी को जमानत संबंधी मामलों में न्यायालय के व्यापक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
इससे पहले 2 जनवरी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने चैतन्य बघेल को दो अलग-अलग मामलों में नियमित जमानत दी थी।
ये दोनों मामले—
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का मामला।
- EOW/ACB द्वारा दर्ज आर्थिक अपराध से संबंधित मामला।
से जुड़े थे।
हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की ओर से दलील दी गई थी कि मामले की जांच पिछले लगभग दो वर्षों से जारी है और जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त समय होने के बावजूद जांच पूरी नहीं हुई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान की थी।
EOW पर की गई टिप्पणियां हटाईं
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस हिस्से में संशोधन किया, जिसमें राज्य पुलिस की जांच एजेंसी EOW के संबंध में प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं। शीर्ष अदालत ने उन टिप्पणियों को हटा दिया, लेकिन इससे चैतन्य बघेल की जमानत पर कोई असर नहीं पड़ा।
क्या है शराब घोटाला मामला?
इस मामले में ED और EOW/ACB दोनों अलग-अलग कानूनों के तहत जांच कर रही हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार—
- कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ।
- इस दौरान शराब के कारोबार में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली के माध्यम से राज्य को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया।
- एजेंसियों का आरोप है कि इस कथित घोटाले का आकार लगभग 3,500 करोड़ रुपये का है।
- जांच में चैतन्य बघेल पर भी इस कथित घोटाले से करोड़ों रुपये का लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है।
इन आरोपों से चैतन्य बघेल ने इनकार किया है, और मामले की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
कब हुई थी गिरफ्तारी?
जांच के दौरान—
- ED ने चैतन्य बघेल को जुलाई में गिरफ्तार किया था।
- इसके बाद EOW ने सितंबर में उन्हें अपने मामले में गिरफ्तार किया।
दोनों मामलों में बाद में उन्होंने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां उन्हें राहत मिली।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ED और राज्य सरकार की याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद फिलहाल चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रहेगी। हालांकि, यह फैसला केवल जमानत से संबंधित है। शराब घोटाले के आरोपों की जांच और संबंधित मुकदमों की सुनवाई कानून के अनुसार आगे भी जारी रहेगी। दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्णय संबंधित अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।



