छत्तीसगढ़

रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर ED की दबिश, 8 सदस्यीय टीम खंगाल रही दस्तावेज; शराब घोटाले की जांच में बढ़ी हलचल

धमतरी। छत्तीसगढ़ के कथित 3000 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह धमतरी स्थित उनके ठिकानों पर दबिश दी। करीब आठ सदस्यीय टीम सुबह उनके सिहावा रोड स्थित आवास पहुंची और घर के अंदर दस्तावेजों एवं वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान घर के बाहर सुरक्षा बल की तैनाती की गई है।

सुबह-सुबह दो गाड़ियों से पहुंची ED की टीम

जानकारी के मुताबिक, ED की टीम गुरुवार सुबह करीब 7 बजे रामगोपाल अग्रवाल के धमतरी स्थित आवास पहुंची। टीम में अधिकारियों के साथ सुरक्षा बल के जवान भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक रही।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की कार्रवाई केवल रामगोपाल अग्रवाल के आवास तक सीमित नहीं रही है। उनके रिश्तेदार और करीबियों से जुड़े कुछ ठिकानों पर भी टीम के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से कार्रवाई के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

जेल में बंद हैं रामगोपाल अग्रवाल

ED की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब रामगोपाल अग्रवाल पहले से ही केंद्रीय जेल रायपुर में बंद हैं। ED ने 11 अगस्त 2026 को उन्हें कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी PMLA के तहत की गई थी। इसके बाद उन्हें रायपुर की PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें सात दिन की ED हिरासत में भेजा था।

रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। कथित शराब घोटाले की जांच में ED पहले से ही कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। अब अग्रवाल से पूछताछ और उनके ठिकानों से मिले दस्तावेजों की जांच के जरिए एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

शराब घोटाले से क्या है कनेक्शन?

ED की जांच के केंद्र में छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़ा पैसों का लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग है। एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के शराब कारोबार से जुड़े एक कथित संगठित नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन की वसूली और उसका इस्तेमाल किया गया। ED ने इस मामले में कई स्तरों पर पैसों के लेनदेन की जांच की है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका कथित तौर पर घोटाले से जुड़े पैसों को अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर करने और उन्हें ठिकाने लगाने में रही। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर प्राप्त रकम किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंची और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामले से भी जुड़ी जांच

रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी जांच केवल शराब कारोबार तक सीमित नहीं बताई जा रही है। ED कथित कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसी का फोकस कथित तौर पर मनी ट्रेल पर है। यानी घोटाले से प्राप्त बताई जा रही रकम कहां से आई, किन खातों या व्यक्तियों के जरिए आगे बढ़ी और आखिर में कहां इस्तेमाल या निवेश की गई। इसी वजह से उनके आवास से दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित कागजात खंगाले जा रहे हैं।

दस्तावेजों की जांच क्यों अहम?

ED की जांच में किसी भी वित्तीय मामले में दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैंक खातों का रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात, कंपनियों या फर्मों के दस्तावेज, लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के जरिए जांच एजेंसी कथित पैसों के प्रवाह को समझने की कोशिश कर सकती है।

धमतरी स्थित ठिकानों पर चल रही कार्रवाई के दौरान भी इसी तरह के रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, ED की तलाशी पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टीम को जांच के लिहाज से क्या महत्वपूर्ण सामग्री मिली।

आगे क्या हो सकता है?

अब ED की जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण कथित मनी ट्रेल को जोड़ना हो सकता है। यदि तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज या डिजिटल/वित्तीय रिकॉर्ड मिलते हैं, जिनसे कथित लेनदेन की पुष्टि होती है, तो एजेंसी उनसे जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।

फिलहाल धमतरी में ED की कार्रवाई जारी है और जांच एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। इसलिए बरामदगी या किसी नए व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।

नोट: शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े उपरोक्त आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।

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