छत्तीसगढ़

राज्योत्सव में कांग्रेस नेताओं की गैरमौजूदगी पर सांसद संतोष पांडेय का तंज, बोले- कालनेमि की तरह ढोंगी है छत्तीसगढ़ के प्रति इनका प्रेम

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्योत्सव 2026 में कांग्रेस नेताओं के शामिल नहीं होने को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजनांदगांव से भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने राज्योत्सव में कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता के शामिल नहीं होने पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के छत्तीसगढ़ प्रेम पर सवाल उठाते हुए उनकी तुलना रामायण के पात्र कालनेमि से कर दी।

मीडिया से चर्चा के दौरान सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि कांग्रेस के एक भी नेता राज्योत्सव में शामिल नहीं हुए। उन्हें छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस और राज्योत्सव की कोई खुशी नहीं है। कांग्रेस नेताओं का प्रेम केवल सत्ता और कुर्सी तक सीमित है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जैसे कालनेमि राक्षस ढोंगी था, वैसा ही छत्तीसगढ़ के प्रति इनका प्रेम है।”

सांसद के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं।

अलग छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

संतोष पांडेय ने अलग छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक लोग अलग राज्य बनने की कल्पना और मांग करते रहे थे। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया, लेकिन देश में अलग-अलग राज्यों के गठन की परिस्थितियां अलग रही हैं।

उन्होंने तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अलग राज्य के गठन के दौरान काफी खून-खराबा हुआ था, जबकि छत्तीसगढ़ बिना किसी खून-खराबे के शांतिपूर्ण तरीके से अलग राज्य बना। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अमन-चैन कायम है और राज्य ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

भाजपा सांसद ने इस दौरान राज्योत्सव को प्रदेश की अस्मिता, गौरव और विकास से जुड़ा आयोजन बताते हुए कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि राज्य के स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों के नेताओं को शामिल होना चाहिए।

मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी कांग्रेस पर हमला

दिल्ली में कांग्रेस की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी संतोष पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए इस तरह की गतिविधियां कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने बस्तर में नक्सलियों की ओर से संचालित कथित जनताना सरकार का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।

सांसद ने आरोप लगाया कि बस्तर में नक्सलियों की सरकार बंदूक की नोक पर चलती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद की विचारधारा से जुड़े लोगों को ‘दिमागी नक्सली’ कहकर सही बात कही है।

सदन की कार्यवाही और विपक्ष के रवैये पर टिप्पणी करते हुए पांडेय ने कहा कि जब कांग्रेस के नेता सदन के भीतर होते हैं, तब वे अपनी बात रखने के बजाय कई बार सदन से बाहर चले जाते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार गलतियां दोहराने का आरोप लगाया।

इस दौरान उन्होंने एक कहावत के जरिए भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “धूल चेहरे पर थी, आइना साफ करते रहे।” उनके इस बयान को कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और विपक्ष की भूमिका पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।

अहिवारा उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा तैयार

सांसद संतोष पांडेय ने आगामी नगरीय निकाय चुनाव और अहिवारा विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी भाजपा की तैयारियों पर बात की। उन्होंने दिवंगत भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को याद करते हुए कहा कि उनके निधन से पार्टी और क्षेत्र को बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

अहिवारा विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि विधानसभा में रिक्त हुई सीट की पूर्ति के लिए चुनाव कराया जाना संवैधानिक प्रक्रिया है। चाहे उपचुनाव हो या नगरीय निकाय चुनाव, भाजपा हर चुनाव के लिए तैयार रहती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव को लेकर पूरी गंभीरता से काम करती है। पार्टी में लगातार बैठकें होती रहती हैं और आगे भी चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकें आयोजित की जाएंगी। शक्ति केंद्रों के स्तर पर भी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को मजबूत किया जाएगा।

‘हम लड़ाई और युद्ध की तैयारी में रहते हैं’

चुनावी तैयारियों पर अपनी बात रखते हुए संतोष पांडेय ने कहा कि भाजपा हमेशा चुनावी मोड में रहती है। पार्टी के कार्यकर्ता संगठनात्मक गतिविधियों के माध्यम से लगातार जनता के बीच सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव चाहे किसी भी स्तर का हो, भाजपा पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने के लिए तैयार है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नगरीय निकाय चुनाव और अहिवारा उपचुनाव के मद्देनजर पार्टी की रणनीति बनाई जाएगी। इसके लिए संगठन के अलग-अलग स्तरों पर बैठकें होंगी और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

कुल मिलाकर राज्योत्सव में कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति से शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब अलग राज्य के गठन के इतिहास, मॉक पार्लियामेंट, नक्सलवाद और आगामी चुनावों तक पहुंच गई है। सांसद संतोष पांडेय के तीखे बयानों ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

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