
रायपुर। राजधानी रायपुर के कृषि मंडपम ऑडिटोरियम में आज से दो दिवसीय राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन का शुभारंभ होगा। सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने और प्रदेश में सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में सरकार, सहकारी संस्थाओं, किसानों और विशेषज्ञों की व्यापक भागीदारी रहेगी।
सम्मेलन की थीम ‘सहकार से समृद्धि’ रखी गई है। इस विषय के माध्यम से सहकारिता के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और सहकारी संस्थाओं की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
मुख्यमंत्री करेंगे सम्मेलन का शुभारंभ
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के सहकारिता मंत्री Kedar Kashyap करेंगे।
सम्मेलन में सरकार की ओर से सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों, नई योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर भी जानकारी साझा की जा सकती है।

प्रदेशभर से आएंगे प्रतिनिधि
दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से—
- प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के प्रतिनिधि,
- जिला एवं राज्य स्तरीय सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी,
- किसान,
- कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ,
- विभागीय अधिकारी,
- जनप्रतिनिधि
भाग लेंगे।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न जिलों के सफल सहकारी मॉडल और नवाचारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
‘सहकार से समृद्धि’ पर होगा मंथन
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाना है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, जिनमें—
- किसानों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना,
- कृषि ऋण व्यवस्था को मजबूत बनाना,
- उर्वरक, बीज और कृषि संसाधनों की सुगम उपलब्धता,
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारिता की भूमिका,
- सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और सुशासन,
- आधुनिक तकनीक और डिजिटलीकरण का उपयोग,
- तथा सहकारी समितियों के विस्तार की रणनीति
जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
सहकारिता आंदोलन को मिलेगा नया विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारिता मॉडल किसानों को संगठित कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। सम्मेलन के जरिए सहकारी संस्थाओं के अनुभव साझा किए जाएंगे और भविष्य की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
सरकार का प्रयास है कि सहकारिता के माध्यम से किसानों को खेती से जुड़ी आवश्यक सेवाएं, वित्तीय सहायता, विपणन सुविधाएं और अन्य संसाधन अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराए जा सकें।
दो दिन तक चलेंगे विभिन्न सत्र
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान, तकनीकी सत्र, अनुभव साझा करने के कार्यक्रम और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा आयोजित की जाएगी। सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य में सहकारी संस्थाओं को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार किए जाने की संभावना है।



