
रायपुर। बाढ़ समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए राजधानी रायपुर में आज राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इसके बाद 20 अगस्त को पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक मॉक ड्रिल कराई जाएगी। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में प्रशासन, राहत एवं बचाव दल और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की क्षमता को जांचना है।

इस पूरी कवायद के दौरान यह देखा जाएगा कि अचानक बाढ़ या किसी बड़ी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य कितनी तेजी से शुरू किए जा सकते हैं। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि विभिन्न विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान और संसाधनों की उपलब्धता कितनी प्रभावी है।
क्या होती है टेबल-टॉप एक्सरसाइज?
टेबल-टॉप एक्सरसाइज एक तरह का पूर्वाभ्यास होता है, जिसमें वास्तविक रूप से राहत-बचाव अभियान चलाने के बजाय संभावित आपदा की परिस्थितियों को सामने रखकर अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की तैयारी परखी जाती है।
इसमें एक काल्पनिक आपदा की स्थिति बनाई जाती है। उदाहरण के लिए किसी क्षेत्र में अचानक बाढ़ आने, नदी का जलस्तर बढ़ने, गांवों के जलमग्न होने या लोगों के फंसे होने जैसी परिस्थितियों को मानकर अधिकारियों से पूछा जाता है कि ऐसी स्थिति में वे किस तरह कार्रवाई करेंगे।
इस अभ्यास के जरिए आपदा के दौरान किस विभाग की क्या जिम्मेदारी होगी, किस स्तर पर सूचना दी जाएगी, बचाव दल कहां तैनात होंगे और राहत सामग्री कैसे पहुंचाई जाएगी, जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है।
20 अगस्त को पूरे प्रदेश में होगी मॉक ड्रिल
राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज के बाद 20 अगस्त को छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस दौरान आपदा की स्थिति को वास्तविक परिस्थितियों के करीब रखकर राहत और बचाव व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा।
मॉक ड्रिल के दौरान संबंधित एजेंसियां यह प्रदर्शित करेंगी कि आपदा की सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव कार्य किस तरह शुरू किया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री उपलब्ध कराने और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय करने की प्रक्रिया भी परखी जाएगी।
राहत-बचाव में ‘शून्य देरी’ पर जोर
आपदा प्रबंधन से जुड़ी इस पूरी कवायद में राहत एवं बचाव कार्य में शून्य देरी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि आपदा की सूचना मिलते ही संबंधित विभागों और बचाव एजेंसियों को बिना अनावश्यक देरी के सक्रिय किया जाए।
आपदा के शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि सूचना पहुंचने, टीमों की तैनाती या जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में देरी होती है तो नुकसान बढ़ सकता है। इसी वजह से मॉक ड्रिल के माध्यम से कम से कम समय में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को जांचा जाएगा।
NDMA के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा अभ्यास
इस आपदा प्रबंधन अभ्यास के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इन्हीं दिशा-निर्देशों के आधार पर राज्य और जिला स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
अभ्यास के दौरान प्रशासन को यह सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा कि आपदा की स्थिति में विभागों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे और राहत-बचाव से जुड़ी जिम्मेदारियां स्पष्ट हों।
किन व्यवस्थाओं को परखा जाएगा?
मॉक ड्रिल के दौरान कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से:
- आपदा की सूचना मिलने पर तत्काल प्रतिक्रिया।
- राहत एवं बचाव दलों की त्वरित तैनाती।
- प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था।
- आपातकालीन संचार व्यवस्था।
- आवश्यक संसाधनों और राहत सामग्री की उपलब्धता।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय।
- संवेदनशील और निचले इलाकों में निगरानी।
- बचाव अभियान के दौरान आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की क्षमता।
बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए क्यों अहम है यह अभ्यास?
छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान कई जिलों में भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, पुल-पुलिया के ऊपर पानी आने और निचले इलाकों में जलभराव जैसी परिस्थितियां बनती हैं। ऐसे में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना बेहद जरूरी है।
राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और उसके बाद होने वाली मॉक ड्रिल से प्रशासन को अपनी मौजूदा तैयारियों की कमियों का पता लगाने का अवसर मिलेगा। जहां व्यवस्था में कमी मिलेगी, वहां उसे समय रहते सुधारने की कोशिश की जा सकेगी।
आपदा के समय बेहतर समन्वय की होगी परीक्षा
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा उद्देश्य ‘पहले से तैयारी, तेज प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय’ सुनिश्चित करना है। बाढ़ या किसी अन्य आपदा के दौरान पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं और अन्य संबंधित एजेंसियों को एक साथ काम करना पड़ता है।
ऐसे में आज होने वाली टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त की राज्यव्यापी मॉक ड्रिल के जरिए यह जांचा जाएगा कि आपदा की स्थिति में पूरा सिस्टम कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सकता है।



