पेट्रोल-डीजल फिर हो सकते हैं महंगे! जानिए क्यों बढ़ रहा है दबाव और आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर….

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) लगातार बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण वित्तीय दबाव झेल रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
तेल कंपनियों का कहना है कि हालिया बढ़ोतरी के बाद भी उन्हें पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि:
- पेट्रोल पर करीब 5.5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान।
- डीजल पर लगभग 4.5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान।
- मई महीने में चार बार कीमतें बढ़ाने के बावजूद घाटा पूरी तरह कम नहीं हुआ।
इसी वजह से कंपनियां आगे और मूल्य वृद्धि की मांग कर सकती हैं।

कच्चे तेल की कीमतें बनीं सबसे बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज उछाल आया है।
- युद्ध शुरू होने से पहले कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी।
- अब कई बाजारों में कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी है।
कच्चा तेल महंगा होने का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है।
जब कच्चा तेल महंगा होता है:
- तेल कंपनियों की लागत बढ़ती है।
- परिवहन खर्च बढ़ता है।
- पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
तेल कंपनियों को कितना हो रहा नुकसान?
देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां—
- Indian Oil Corporation
- Bharat Petroleum Corporation Limited
- Hindustan Petroleum Corporation Limited
—मिलकर प्रतिदिन भारी वित्तीय दबाव झेल रही हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, हालिया मूल्य वृद्धि के बाद भी इन कंपनियों को संयुक्त रूप से प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अनुमान है कि यह नुकसान लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।
LPG पर भी बढ़ रहा घाटा
सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, घरेलू गैस सिलेंडर पर भी तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार:
- प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर करीब 650 रुपये का नुकसान।
- एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा।
यानी कंपनियों पर बहुआयामी वित्तीय दबाव बना हुआ है।
76 दिन तक नहीं बढ़े थे दाम
पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद तेल कंपनियों ने लगभग 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे थे।
इसके बाद मई महीने में:
- चार चरणों में कीमतें बढ़ाई गईं।
- कुल बढ़ोतरी लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंची।
- घरेलू गैस सिलेंडर भी महंगा हुआ।
अब विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो नई बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के भाव
दिल्ली
- पेट्रोल: ₹94.77 प्रति लीटर
- डीजल: ₹87.67 प्रति लीटर
मुंबई
- पेट्रोल: ₹103.50 प्रति लीटर
- डीजल: ₹90.30 प्रति लीटर
कोलकाता
- पेट्रोल: ₹105.41 प्रति लीटर
- डीजल: ₹92.20 प्रति लीटर
नोएडा
- पेट्रोल: ₹94.85 प्रति लीटर
- डीजल: ₹87.98 प्रति लीटर
लखनऊ
- पेट्रोल: ₹94.69 प्रति लीटर
- डीजल: ₹87.81 प्रति लीटर
पटना
- पेट्रोल: ₹105.23 प्रति लीटर
- डीजल: ₹91.49 प्रति लीटर
पटना और कोलकाता में कीमतें देश के कई बड़े शहरों की तुलना में अधिक बनी हुई हैं।
कमर्शियल गैस सिलेंडर भी हुआ महंगा
1 जून से कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 40 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
इसके अलावा:
- पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल सिलेंडर करीब 900 रुपये तक महंगा हो चुका है।
- मार्च से अब तक कीमतों में 47 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और छोटे व्यापारियों की लागत पर भी पड़ सकता है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
यदि पेट्रोल-डीजल के दाम 4-5 रुपये प्रति लीटर और बढ़ते हैं, तो:
- निजी वाहन चलाना महंगा होगा।
- माल ढुलाई लागत बढ़ेगी।
- खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर का खर्च बढ़ेगा।
- महंगाई दर पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
आगे क्या है संभावना?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में सब कुछ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यदि क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर बना रहता है, तो तेल कंपनियां कीमतों में और बढ़ोतरी का प्रस्ताव रख सकती हैं। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर नहीं है और आने वाले समय में ईंधन की कीमतें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।



