छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव को लेकर सियासत तेज: भाजपा-कांग्रेस में जुबानी जंग, जायसवाल के तंज पर महंत का पलटवार

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस संगठन में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इसे लेकर कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री Shyam Bihari Jaiswal के बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant ने भी पलटवार किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। कुछ नेता खुलकर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जबकि कुछ संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे हैं।
आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में कांग्रेस संगठन विभिन्न राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक मजबूती पर विचार कर रहा है। इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल का कांग्रेस पर हमला
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस के भीतर प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ को लेकर तंज कसते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने की चर्चा चल रही है।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब “बोरिंग चैप्टर” बन चुका है और जनता कांग्रेस को लगभग भूल चुकी है। मंत्री ने कांग्रेस पर आंतरिक मतभेदों का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की परंपरा और संस्कार में ही गुटबाजी शामिल है और समय-समय पर यह खुलकर सामने आती रहती है।
उनके अनुसार कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर लगातार खींचतान रहती है, जो पार्टी की कमजोरी को दर्शाती है।
महंत का जवाब: कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करती है
स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस में सब कुछ सामान्य है और पार्टी सामूहिक नेतृत्व की भावना के साथ काम करती है।
महंत ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच किसी प्रकार का मतभेद नहीं है और संगठन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जो भी फैसला होगा, वह भी पार्टी के सामूहिक नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में संगठनात्मक निर्णय किसी एक व्यक्ति के आधार पर नहीं बल्कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं।
क्या बदलेगा छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नेतृत्व?
चरणदास महंत ने संकेत दिए कि जिन राज्यों में भविष्य में चुनाव होने वाले हैं, वहां कांग्रेस संगठन में बदलाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन फिलहाल तत्काल किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं दिखाई देती। उनके अनुसार पहले Rahul Gandhi का प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा और जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होना चाहिए, उसके बाद संगठनात्मक फैसलों पर विचार किया जा सकता है।
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे पर अंतिम निर्णय अभी कुछ समय बाद लिया जा सकता है।
खाद-बीज संकट पर सरकार को घेरा
प्रदेश अध्यक्ष के मुद्दे के अलावा चरणदास महंत ने किसानों से जुड़े खाद और बीज की उपलब्धता के मुद्दे पर भी राज्य सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार सब कुछ ठीक होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
महंत के अनुसार:
- कई क्षेत्रों में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर शिकायतें हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति धीमी है।
- गांवों में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था दबाव में है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की मांग की और कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए।
इंडिया गठबंधन की बैठक पर भी बोले महंत
दिल्ली में आयोजित INDIA Alliance की बैठक को लेकर भी चरणदास महंत ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि बैठक में देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनमें:
- महंगाई
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें
- रसोई गैस के बढ़ते दाम
- खाद्य वस्तुओं की महंगाई
- विपक्ष की आगे की रणनीति
जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
महंत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और विपक्ष की भूमिका को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे “अघोषित आपातकाल जैसे हालात” बताया।
राजनीतिक महत्व
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर जारी चर्चाओं ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को फिर से गर्म कर दिया है। भाजपा इसे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी से जोड़कर हमला कर रही है, जबकि कांग्रेस नेतृत्व संगठन में एकजुटता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की बात कर रहा है।
आने वाले महीनों में कांग्रेस संगठन में संभावित बदलाव, राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ दौरा और आगामी राजनीतिक कार्यक्रम इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना सकते हैं। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चर्चा जारी है, लेकिन अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर ही तय होगा।



