छत्तीसगढ़राजनांदगांव

करोड़ों की त्रिनेत्र योजना फेल! राजनांदगांव में 150 में से 100 से ज्यादा CCTV कैमरे खराब…

Rajnandgaon शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई त्रिनेत्र योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। लगभग दो साल पहले शुरू की गई यह योजना फिलहाल लगभग ठप स्थिति में बताई जा रही है और अधिकांश कैमरे खराब होने की खबर सामने आ रही है।


योजना की शुरुआत क्यों हुई थी

शहर में अपराध नियंत्रण और ट्रैफिक निगरानी को बेहतर बनाने के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने मिलकर त्रिनेत्र योजना शुरू की थी।

  • उद्देश्य था कि पूरे शहर को CCTV कैमरों की निगरानी में लाया जाए
  • किसी भी आपराधिक घटना या दुर्घटना की स्थिति में तुरंत फुटेज उपलब्ध हो सके
  • पुलिस को जांच में आसानी हो

इस योजना को जनसहयोग से लागू किया गया था, यानी आम नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं से धन जुटाकर इसे शुरू किया गया।


योजना के लिए बनाई गई कमेटी

इस योजना को लागू करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया था।

  • इस कमेटी में शहर के कुछ चुनिंदा लोगों को शामिल किया गया
  • आरोप है कि इसमें वही लोग शामिल थे जो प्रशासन के करीबी माने जाते हैं
  • कई लोगों का कहना है कि कमेटी का काम पारदर्शी तरीके से नहीं हुआ

कितने कैमरे लगाए गए

सूत्रों के अनुसार शहर में लगभग

  • 150 CCTV कैमरे लगाने की योजना थी

लेकिन वर्तमान स्थिति यह बताई जा रही है कि

  • 100 से अधिक कैमरे खराब हो चुके हैं
  • कई कैमरे शुरुआत से ही ठीक से काम नहीं कर रहे थे

सस्ते कैमरों पर उठे सवाल

योजना में लगाए गए कैमरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • अलग-अलग कंपनियों से संपर्क कर कम कीमत वाले कैमरे खरीदे गए
  • दावा किया गया था कि ये दिल्ली मॉडल के आधार पर लगाए जा रहे हैं
  • लेकिन गुणवत्ता कम होने के कारण कैमरे जल्दी खराब हो गए

कुछ कैमरे तो इतने खराब थे कि उन्हें वापस भी करना पड़ा


सामाजिक संस्थाएं भी पीछे हटीं

शुरुआत में शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने इस योजना का समर्थन किया था और इसके फायदे बताए थे।

लेकिन अब स्थिति यह है कि

  • योजना के खराब होने के बाद कोई भी संस्था जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है
  • योजना को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी भी सामने नहीं आ रही

करोड़ों रुपये के खर्च पर सवाल

त्रिनेत्र योजना के लिए शहर से करोड़ों रुपये का जनसहयोग लिया गया था।

अब नागरिकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं:

  • कुल कितनी राशि एकत्रित हुई?
  • कैमरे लगाने में कितना खर्च हुआ?
  • रखरखाव (मेंटेनेंस) पर कितना पैसा खर्च हुआ?

इन सवालों का अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से योजना के आय-व्यय पर भी सवाल उठने लगे हैं।


निष्कर्ष:
शहर की सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई त्रिनेत्र योजना फिलहाल लगभग विफल होती दिख रही है। अधिकांश कैमरे खराब होने, खर्च का स्पष्ट हिसाब सामने न आने और जिम्मेदारी तय न होने के कारण इस योजना को लेकर लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ रहे हैं।

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