छत्तीसगढ़
NH-130C पर चक्काजाम: पुलिया अधूरी, ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू…

गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक में यह मामला सिर्फ एक सड़क या पुल का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। पूरी स्थिति को आसान भाषा में समझते हैं—
🔴 क्या हुआ है?
- NH-130C पर अमाड़ पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया है।
- ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
- प्रदर्शन में महिलाएं और स्कूली बच्चे (ड्रेस में) भी शामिल हैं।

🔴 प्रदर्शन की वजह क्या है?
- अमाड़ को जोड़ने वाले रास्ते पर पट्टाबहाल नाले पर पुल बनना था।
- निर्माण के लिए पहले से बना पुराना रपटा (छोटा पुल) तोड़ दिया गया।
- लेकिन नया पुल बनना शुरू होने के बाद काम बीच में ही रुक गया।

👉 अभी हालत ये है कि—
- वहां सिर्फ मिट्टी-रेत का अस्थायी रास्ता बना है
- हल्की बारिश में भी यह बह सकता है

🔴 ग्रामीणों की मुख्य चिंता
- मानसून में रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है
- स्कूली बच्चों का आना-जाना रुक जाएगा
- गर्भवती महिलाओं (प्रसूताओं) को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत होगी
- रोजमर्रा के काम ठप हो जाएंगे
🔴 प्रशासन पर आरोप
- ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने 30 मार्च को कलेक्टर को ज्ञापन दिया था
- 15 दिन पहले प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई थी
- इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई
👉 प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे
- संजय नेताम
- लोकेश्वरी नेताम
का आरोप है कि प्रशासन आदिवासी क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है।
🔴 प्रोजेक्ट की पूरी कहानी
- साल 2024 में इस पुल के लिए 1.49 करोड़ रुपये मंजूर हुए
- काम की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को दी गई
- ठेका एमएस नमन कंस्ट्रक्शन को मिला
- फरवरी में काम शुरू हुआ और पुराना रपटा तोड़ दिया गया
👉 लेकिन फिर—
- उदंती अभ्यारण्य से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) का मुद्दा आया
- और काम रुक गया
🔴 असली समस्या क्या है?
- विभागों के बीच तालमेल की कमी
- आधा काम करके छोड़ दिया गया
- इसका सीधा असर अब ग्रामीणों पर पड़ रहा है
🔴 ग्रामीणों की मांग
- बरसात से पहले कम से कम
👉 रपटे को फिर से चलने लायक बनाया जाए - ताकि आवाजाही सुरक्षित रहे
🔴 मौजूदा स्थिति
- हाईवे जाम होने से यातायात प्रभावित
- प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है
- अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और बढ़ सकता है
🔚 निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि अधूरी परियोजनाएं कैसे सीधे लोगों की जिंदगी पर असर डालती हैं।
एक तरफ विकास का काम, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत—टूटा रास्ता और परेशान जनता।



