छत्तीसगढ़

धान अंतर राशि पर सियासत तेज: Bhupesh Baghel का BJP पर पलटवार…

रायपुर में धान खरीदी की अंतर राशि (बोनस/टॉप-अप भुगतान) को लेकर सियासत तेज हो गई है। मामला तब गरमाया जब मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel पर तंज कसा और उन्हें धान अंतर राशि योजना का “सबसे बड़ा लाभार्थी” बताया।

इसके बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए भाजपा और मौजूदा सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।


🔹 क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के बाद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अलावा जो अतिरिक्त राशि (अंतर राशि/बोनस) दी जाती है, उसका एकमुश्त भुगतान किसानों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इसी को लेकर सियासी बयानबाज़ी शुरू हुई।

मुख्यमंत्री के सलाहकार पंकज झा ने दावा किया कि इस योजना का सबसे बड़ा फायदा भूपेश बघेल को हुआ है। इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर कटाक्ष किया।


🔹 भूपेश बघेल का पलटवार

भूपेश बघेल ने X पर पोस्ट कर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा:

  • “हां जी, हुए मालामाल! किसान हैं तो माल उगाया और बेचा तो माल आया!”
  • सरकार ने किसानों को खाद नहीं दी, पर्याप्त बिजली नहीं दी।
  • इसके बावजूद किसानों ने मेहनत और पसीना बहाकर धान उगाया।
  • हमारी सरकार ने मेहनतकश किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने की कोशिश की।
  • भाजपा के 15 साल के शासन में किसान आत्महत्या कर रहे थे।
  • हमने किसानों को सम्मान और हक का पैसा दिया।

उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि:

  • पीएम मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, क्या हुआ?
  • किसानों को मिल रहे पैसे को “माल” क्यों कहा जा रहा है?
  • यह “पनामा” या “तावड़े” का पैसा नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत की कमाई है।
  • भाजपा को इस बयान पर शर्मिंदा होना चाहिए।

🔹 राजनीतिक मायने क्या हैं?

  1. किसान वोट बैंक पर फोकस – छत्तीसगढ़ की राजनीति में किसान बड़ा मुद्दा है। धान खरीदी और बोनस भुगतान हमेशा चुनावी एजेंडा का केंद्र रहा है।
  2. सरकार बनाम पूर्व सरकार – मौजूदा सरकार और पिछली कांग्रेस सरकार के कामकाज की तुलना की जा रही है।
  3. सीधे आरोप-प्रत्यारोप – भाजपा बघेल को व्यक्तिगत लाभार्थी बता रही है, वहीं बघेल इसे किसानों के सम्मान से जोड़ रहे हैं।

🔹 निष्कर्ष

धान की अंतर राशि का मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। एक ओर भाजपा इसे पारदर्शिता और व्यंग्य के साथ उठा रही है, वहीं दूसरी ओर भूपेश बघेल इसे किसानों की मेहनत और सम्मान से जोड़कर भाजपा पर पलटवार कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, खासकर यदि दोनों दलों के शीर्ष नेता इस पर बयान देते हैं।

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