
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कटहल से भरे एक पिकअप वाहन से भारी मात्रा में गांजा बरामद किया है। तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए गांजे को कटहल की खेप के बीच छिपा रखा था, लेकिन वाहन जांच के दौरान उनका पूरा प्लान फेल हो गया।
पुलिस ने इस कार्रवाई में 125.700 किलोग्राम गांजा जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 62.85 लाख रुपये बताई जा रही है। साथ ही दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कैसे हुआ खुलासा?
जानकारी के अनुसार सिंघोडा पुलिस द्वारा रेहटीखोल जांच नाका पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था।
इसी दौरान एक पिकअप वाहन वहां पहुंचा, जिसमें बड़ी मात्रा में कटहल लदे हुए थे। पहली नजर में वाहन सामान्य कृषि उत्पाद ले जाते हुए दिखाई दे रहा था, लेकिन पुलिस को वाहन और उसमें सवार लोगों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं।
संदेह होने पर पुलिस ने वाहन की गहन तलाशी शुरू की।
कटहल के पीछे छिपा था गांजा
जब पुलिस ने कटहल की परतों को हटाकर अंदर की जांच की तो सभी हैरान रह गए।
कटहल की आड़ में बड़ी मात्रा में गांजा छिपाकर रखा गया था। तस्करों ने इस तरह व्यवस्था की थी कि ऊपर से देखने पर वाहन पूरी तरह फल-सब्जियों की ढुलाई करता हुआ लगे।
तलाशी के दौरान कुल:
- 125.700 किलोग्राम गांजा
- अनुमानित कीमत 62,85,000 रुपये
बरामद किया गया।
उत्तर प्रदेश के दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि:
- गांजा ओडिशा के बलांगीर जिले से खरीदा गया था।
- इसे छिपाकर प्रयागराज ले जाया जा रहा था।
- वहां अवैध बाजार में इसकी बिक्री की तैयारी थी।
तस्करों का नया तरीका
पुलिस अधिकारियों के अनुसार तस्कर अब नशे की खेप को छिपाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
पहले भी कई मामलों में तस्कर:
- फलों की पेटियों में
- सब्जियों की बोरियों में
- फर्नीचर के भीतर
- ट्रकों के गुप्त चैम्बर में
मादक पदार्थ छिपाकर ले जाते पकड़े जा चुके हैं।
इस मामले में कटहल जैसे भारी और बड़े फलों का उपयोग इसलिए किया गया ताकि गांजे की गंध और पैकेट आसानी से दिखाई न दें।
वाहन भी किया गया जब्त
पुलिस ने:
- गांजे की पूरी खेप
- तस्करी में इस्तेमाल पिकअप वाहन
- अन्य संबंधित दस्तावेज
को जब्त कर लिया है।
आरोपियों के खिलाफ Narcotics Control Bureau और एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब किन बिंदुओं की जांच कर रही है?
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि:
- ओडिशा में गांजा किससे खरीदा गया था।
- इसके पीछे कौन-सा तस्करी नेटवर्क सक्रिय है।
- प्रयागराज में माल किसे पहुंचाया जाना था।
- क्या इस गिरोह के अन्य सदस्य भी छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सक्रिय हैं।
- पहले भी इसी मार्ग से तस्करी की गई थी या नहीं।
छत्तीसगढ़ बना अहम ट्रांजिट रूट
विशेषज्ञों के अनुसार ओडिशा के गांजा उत्पादक इलाकों से उत्तर भारत के राज्यों तक नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए छत्तीसगढ़ के कई राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग किया जाता है।
महासमुंद जिला ओडिशा सीमा के करीब होने के कारण तस्करों के लिए महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है। यही कारण है कि पुलिस यहां लगातार जांच अभियान चलाती रहती है।
बड़ी सफलता मानी जा रही कार्रवाई
125 किलो से अधिक गांजा की बरामदगी को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यदि यह खेप अपने गंतव्य तक पहुंच जाती तो इसकी अवैध बिक्री से करोड़ों रुपये का नेटवर्क सक्रिय हो सकता था।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।



