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दुर्ग के स्टील प्लांट में बड़ा हादसा: पिघला हुआ लोहा मजदूर पर गिरने से मौत, प्लांट संचालक और ठेकेदार पर FIR

दुर्ग/रसमड़ा। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रसमड़ा स्थित जे. डी. स्टील इंडस्ट्रीज में इंडक्शन फर्नेस के ट्रायल के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में 42 वर्षीय मजदूर संतोष श्रीवास्तव की मौत के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। मामले में प्लांट संचालक शिव कुमार गोयल और ठेकेदार गजानंद शाह के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। अंजोरा पुलिस चौकी ने दोनों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 289 और 106(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की आशंका सामने आई है। आरोप है कि इंडक्शन फर्नेस के ट्रायल के दौरान मजदूरों के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। इसके अलावा, आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात भी जांच में सामने आई है। हालांकि, मामले में पुलिस की विवेचना जारी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इंडक्शन फर्नेस के ट्रायल के दौरान हुआ हादसा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा 17 अक्टूबर को रसमड़ा स्थित जे. डी. स्टील इंडस्ट्रीज में हुआ था। प्लांट में नवनिर्मित इंडक्शन फर्नेस का ट्रायल किया जा रहा था। इसी काम के लिए ठेकेदार गजानंद शाह मजदूर संतोष श्रीवास्तव को लेकर आया था। ट्रायल के दौरान संतोष के साथ अन्य श्रमिक भी काम में लगे हुए थे।

इस प्रक्रिया में पिघले हुए मेटल को टेन्डिस में लगे नोजल के माध्यम से आगे बिलेट निर्माण की प्रक्रिया में भेजा जा रहा था। काम के दौरान अचानक नोजल से निर्धारित मात्रा से अधिक पिघला हुआ मेटल बाहर निकल गया। इसकी चपेट में वहां काम कर रहे संतोष श्रीवास्तव आ गए और गर्म धातु उनके ऊपर गिर गई।

पिघले हुए मेटल की चपेट में आने से संतोष बुरी तरह झुलस गए। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद मजदूरों ने आग बुझाने और संतोष को बचाने का प्रयास किया। इसके बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

सेक्टर-9 अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

हादसे के बाद संतोष श्रीवास्तव को भिलाई स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, सेक्टर-9 में भर्ती कराया गया था। वहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। 17 अक्टूबर को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, पंचों के बयान, मृतक के परिजनों के कथन, गवाहों की जानकारी और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। इसी प्रक्रिया में हादसे के संभावित कारणों और कार्यस्थल पर सुरक्षा के इंतजामों की पड़ताल की गई।

बिहार के रहने वाले थे संतोष श्रीवास्तव

मृतक संतोष श्रीवास्तव की उम्र 42 वर्ष थी। वह मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के ग्राम श्यामपुर, थाना सुगौली के निवासी थे। वर्तमान में वह रायपुर में रह रहे थे और पेशे से मेल्टर के रूप में काम करते थे।

पुलिस के मुताबिक, ठेकेदार गजानंद शाह उन्हें 17 अक्टूबर को रसमड़ा स्थित जे. डी. स्टील इंडस्ट्रीज में नवनिर्मित इंडक्शन फर्नेस के ट्रायल और माल ढलाई के काम के लिए लेकर आया था। इसी कार्य के दौरान यह हादसा हुआ, जिसमें उनकी जान चली गई।

सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही का आरोप

पुलिस की मर्ग जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि ट्रायल के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। जांच में आरोप है कि काम में लगे मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। आग लगने या गर्म धातु के संपर्क में आने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आग बुझाने की समुचित व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है।

औद्योगिक इकाइयों में पिघली हुई धातु के साथ काम करना जोखिम भरा होता है। ऐसे काम के दौरान सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती, मशीनों का सुरक्षित संचालन और आपातकालीन व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। पुलिस अब इसी पहलू की जांच कर रही है कि ट्रायल के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और हादसे को रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।

प्लांट संचालक और ठेकेदार के खिलाफ अपराध दर्ज

पुलिस के अनुसार, मशीनरी के संचालन में कथित लापरवाही और श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति चूक को हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी आधार पर जे. डी. स्टील इंडस्ट्रीज के संचालक शिव कुमार गोयल और ठेकेदार गजानंद शाह के खिलाफ धारा 289 और 106(1) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

धारा 289 मशीनरी के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण से जुड़ी है, जबकि धारा 106(1) लापरवाही से मृत्यु कारित करने से संबंधित है। पुलिस ने मामले में विवेचना शुरू कर दी है। जांच के दौरान हादसे की परिस्थितियों, सुरक्षा प्रबंधों और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

रसमड़ा के स्टील प्लांट में हुआ यह हादसा औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से नई मशीनरी या नवनिर्मित फर्नेस के ट्रायल के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता है, क्योंकि इस चरण में उपकरणों के संचालन और उत्पादन प्रक्रिया की जांच की जाती है।

मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच के नतीजों पर नजर रहेगी। यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसे के समय सुरक्षा मानकों का किस स्तर तक पालन किया गया था और पिघले हुए मेटल के अचानक अधिक मात्रा में बाहर निकलने के पीछे क्या तकनीकी या संचालन संबंधी कारण थे। फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।

नोट: प्लांट संचालक और ठेकेदार के खिलाफ अपराध दर्ज होना पुलिस जांच की प्रारंभिक कार्रवाई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामने आएंगे।

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