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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- अनुच्छेद 370 हटाना उनके सपनों को सच्ची श्रद्धांजलि..

नई दिल्ली। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद और राष्ट्रवादी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए समर्पित किया तथा उनके विचार आज भी देशवासियों को प्रेरित करते हैं।

प्रधानमंत्री ने लेख के माध्यम से किया स्मरण

प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. मुखर्जी की जयंती पर एक विस्तृत लेख जारी कर उनके जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि—

6 जुलाई राष्ट्रवाद, जनसेवा और निस्वार्थ समर्पण के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए विशेष दिन है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था और उन्होंने इसके लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

“अनुच्छेद 370 हटाना सच्ची श्रद्धांजलि”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने इसे डॉ. मुखर्जी के प्रति “सच्ची श्रद्धांजलि” बताया और कहा कि देश की एकता के लिए उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में भी रहा अहम योगदान

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी थे।

उन्होंने याद दिलाया कि—

  • वे प्रसिद्ध शिक्षाविद आशुतोष मुखर्जी के पुत्र थे।
  • उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर सार्वजनिक जीवन को चुना।
  • शिक्षा सुधार और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • स्वतंत्र भारत के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में उनकी सोच दूरदर्शी थी।

युवाओं के लिए दिया गया संदेश किया साझा

प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के लिए डॉ. मुखर्जी के एक प्रेरक संदेश का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी युवाओं से कहा करते थे—

“आप जो भी काम हाथ में लें, उसे पूरी गंभीरता और पूरी लगन के साथ करें।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के युवाओं के लिए भी यह संदेश उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

अमित शाह ने भी किया नमन

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि—

  • डॉ. मुखर्जी देश की एकता और अखंडता के प्रबल समर्थक थे।
  • उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूत आधार दिया।
  • भारतीय जनसंघ की स्थापना कर देश की राजनीति को नई दिशा दी।
  • राष्ट्र उनके योगदान को सदैव याद रखेगा।

कौन थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी?

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे। बाद में वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे आज की भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार माना जाता है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू तत्कालीन विशेष प्रावधानों का विरोध किया और “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का नारा दिया। वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया।

देशभर में आयोजित हुए कार्यक्रम

डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती पर देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं, विचार गोष्ठियां और स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारतीय जनता पार्टी और अन्य संगठनों के नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें राष्ट्रवाद, त्याग, जनसेवा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

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