
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दिनों दिल्ली दौरे पर रहेंगे, जिसे राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
दिल्ली दौरे का महत्व
भूपेश बघेल का यह दौरा कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। संभावना है कि वे राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से मिलकर
- छत्तीसगढ़ की राजनीतिक स्थिति
- आगामी चुनावी रणनीति
- संगठनात्मक मजबूती
जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
बोरे-बासी दिवस में रहे सक्रिय
दिल्ली रवाना होने से पहले बघेल ने प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘बोरे-बासी दिवस’ कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। बेमेतरा में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने श्रमिकों का सम्मान किया और स्थानीय परंपराओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम में:
- श्रमिकों को सम्मानित किया गया
- छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल करने वाली छात्रा ओमनी वर्मा को भी सम्मानित किया गया
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे, जिनमें
- रविंद्र चौबे
- गुरु दयाल सिंह बंजारे
शामिल हैं। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया।
बोरे-बासी पर बघेल का बयान
कार्यक्रम के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि ‘बोरे-बासी’ छत्तीसगढ़ के किसानों और मजदूरों का पारंपरिक आहार है, जिसे उनकी सरकार ने नई पहचान दिलाने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि:
- गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक देता है
- स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है
- यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है
संस्कृति को आगे बढ़ाने की अपील
बघेल ने लोगों से अपील की कि वे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खान-पान और संस्कृति को संरक्षित और आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।
राजनीतिक और सांस्कृतिक संतुलन
यह दौरा जहां एक ओर राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर बघेल का स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहना यह दर्शाता है कि वे राजनीति के साथ-साथ प्रदेश की परंपरा और पहचान को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।



