छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र का चौथा दिन: कस्टोडियल डेथ पर गरमाई बहस

रायपुर। बजट सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान सदन में कानून-व्यवस्था और जेल व्यवस्था को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में कस्टोडियल डेथ (हिरासत/जेल में मौत) का मुद्दा उठाते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।


❓ भूपेश बघेल ने क्या सवाल उठाए?

भूपेश बघेल ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से पूछा:

  1. जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक राज्य की केंद्रीय और जिला जेलों में कितनी अस्वाभाविक मौतें हुईं?
  2. क्या इन सभी मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार न्यायिक जांच पूरी कर ली गई है?
  3. जेलों की निर्धारित क्षमता के मुकाबले कैदियों की संख्या 150% से अधिक क्यों है?
  4. क्या पिछले एक वर्ष में हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में 35% वृद्धि हुई है?
  5. बीते 12 महीनों में पुलिस द्वारा पकड़े गए अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करों की सूची क्या है?

इन सवालों के जरिए उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, जेलों में भीड़भाड़ और अपराध दर पर सरकार को घेरने की कोशिश की।


🗂️ सरकार का जवाब क्या रहा?

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सदन में जानकारी देते हुए बताया:

  • जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच
    👉 राज्य की केंद्रीय और जिला जेलों में कुल 66 बंदियों की मृत्यु हुई है।
  • इन मामलों में:
    18 प्रकरणों में न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच की कार्रवाई पूरी हो चुकी है।
    48 प्रकरणों में जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।

उन्होंने कहा कि सभी मामलों में NHRC के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।


⚖️ मुद्दा क्यों है गंभीर?

कस्टोडियल डेथ का मामला संवेदनशील माना जाता है क्योंकि:

  • यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों से जुड़ा विषय है।
  • जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने पर स्वास्थ्य, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था प्रभावित होती है।
  • न्यायिक जांच लंबित रहने से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

यदि जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से 150% अधिक है, तो यह प्रशासनिक और संरचनात्मक चुनौती का संकेत है।


🔥 राजनीतिक मायने

सत्र के दौरान विपक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता से जोड़ा, जबकि सरकार ने जांच प्रक्रिया और कानूनी अनुपालन का हवाला देकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है, खासकर जब अपराध दर और जेल सुधार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी।

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