छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के दो कलाकारों को मिला उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार, CM विष्णुदेव साय ने दी बधाई, कहा- प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और रंगमंच के क्षेत्र में प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश के दो प्रतिभाशाली कलाकारों डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू को प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दोनों कलाकारों को यह सम्मान प्रदान किया। दोनों कलाकारों की इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर नई मजबूती मिली है।

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दोनों कलाकारों को बधाई देते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले कलाकारों की यह सफलता प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और यहां की प्रतिभाओं की क्षमता को प्रदर्शित करती है।

छत्तीसगढ़ की कला और रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत, नाट्य परंपराओं और जनजातीय कलाओं के लिए देशभर में जाना जाता है। प्रदेश के कलाकार लंबे समय से अपनी प्रतिभा के माध्यम से इन सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाना प्रदेश के कला जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार देश के उन युवा कलाकारों को दिया जाता है, जिन्होंने संगीत, नृत्य, नाटक और अन्य प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रतिभा और योगदान का परिचय दिया हो। इस पुरस्कार के माध्यम से युवा कलाकारों की रचनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करने के साथ भारतीय कला परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उनके प्रयासों को भी पहचान मिलती है।

दोनों कलाकारों को मिले इस सम्मान से छत्तीसगढ़ के उन कलाकारों का उत्साह भी बढ़ेगा, जो अपनी मेहनत और साधना के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं।

संगीत नाटक अकादमी ने 106 युवा कलाकारों को किया सम्मानित

नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह का आयोजन संगीत नाटक अकादमी की ओर से किया गया। समारोह में वर्ष 2024 और 2025 के लिए देशभर के कुल 106 युवा कलाकारों को सम्मानित किया गया। इन कलाकारों ने संगीत, नृत्य, रंगमंच और अन्य प्रदर्शन कलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और योगदान से विशेष पहचान बनाई है।

इस आयोजन का उद्देश्य देश की विविध कलात्मक परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें आगे बढ़ाने वाले युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। भारत की सांस्कृतिक विरासत में शास्त्रीय कलाओं के साथ-साथ लोक संगीत, लोक नृत्य और क्षेत्रीय रंगमंच की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अलग-अलग राज्यों के कलाकार इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ नए प्रयोगों के माध्यम से उन्हें समकालीन समाज से जोड़ रहे हैं।

समारोह में विभिन्न राज्यों के कलाकारों को उनकी कला विधाओं के लिए सम्मानित किया गया। राजस्थान के अकरम खान बहरूपिया को लोक नृत्य, बिहार की मनीषा श्रीवास्तव को लोक संगीत, नागालैंड के हितो किहो को वृंद संगीत और सुभाषश्री स्वैन को छऊ नृत्य के क्षेत्र में सम्मान प्रदान किया गया।

देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों को एक मंच पर सम्मानित किए जाने से भारतीय कला और संस्कृति की विविधता भी सामने आई। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि भारत की सांस्कृतिक पहचान केवल किसी एक कला या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों और समुदायों की कलाओं से मिलकर बनी है।

विकसित भारत के निर्माण में कला और संस्कृति की अहम भूमिका: गजेंद्र सिंह शेखावत

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बुनियादी ढांचे, आर्थिक प्रगति और भौतिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से भी बनती है। इसलिए देश के समग्र विकास में कला और संस्कृति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं सदियों से देश की पहचान को मजबूत करती रही हैं। कलाकारों ने अपनी साधना, समर्पण और रचनात्मकता के माध्यम से इन परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया है। लोक संगीत, नृत्य, नाटक और अन्य प्रदर्शन कलाएं भारतीय समाज की विविधता और उसकी सांस्कृतिक समृद्धि को अभिव्यक्त करती हैं।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह भी कहा कि भारत वर्तमान समय में बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। इस परिवर्तन में कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। उनकी प्रस्तुतियां और रचनाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाने का माध्यम बनती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने उन कलाकारों के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने अनेक चुनौतियों के बावजूद भारतीय कला परंपराओं को जीवंत बनाए रखा। उनके अनुसार, कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने, सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखने और देश की पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

CM विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया पर दी बधाई

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर दोनों कलाकारों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, “छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और रंगमंच को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले आनंद कुमार पांडेय जी एवं घनश्याम साहू जी को प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025’ से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई! यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।”

मुख्यमंत्री के इस संदेश से स्पष्ट है कि राज्य सरकार प्रदेश की कला-संस्कृति और प्रतिभाशाली कलाकारों की उपलब्धियों को महत्वपूर्ण मानती है। राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले ऐसे सम्मान से प्रदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा मिलती है।

युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बनेगी यह उपलब्धि

डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू को मिला सम्मान केवल दो कलाकारों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के कला और रंगमंच जगत के लिए भी महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली पहचान से प्रदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों, कलात्मक परंपराओं और यहां के कलाकारों के योगदान को व्यापक मंच मिलता है।

कला के क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए निरंतर अभ्यास, रचनात्मकता, समर्पण और वर्षों की साधना की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रतिष्ठित पुरस्कार युवा कलाकारों के प्रयासों को मान्यता देने के साथ उन्हें भविष्य में और बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और रंगमंच की परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान का हिस्सा हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों का योगदान बेहद अहम है। डॉ. आनंद कुमार पांडेय और घनश्याम साहू की उपलब्धि से प्रदेश के अन्य उभरते कलाकारों को भी अपनी कला के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की प्रेरणा मिलेगी।

कुल मिलाकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025 से छत्तीसगढ़ के दो कलाकारों का सम्मानित होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि भारतीय कला-संस्कृति की विविधता और उसे आगे बढ़ाने वाले युवा कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।

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