
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की डीलरशिप दिलाने और 100 प्रतिशत कैशबैक का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इलेक्ट्रिक स्कूटी, स्कूल वैन, लोडर वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की डीलरशिप देने के नाम पर शिकायतकर्ता से अलग-अलग किश्तों में कुल 31 लाख 80 हजार रुपये जमा कराए थे।
मामले में पुलिस ने कंपनी से जुड़े लोकेश द्विवेदी और पुरुषोत्तम साहू को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद दोनों को 19 सितंबर 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

डीलरशिप और 100 फीसदी कैशबैक का दिया था झांसा
पुलिस के अनुसार, ग्राम भानपुरी निवासी मनीष कुमार साहू ने 5 मई 2026 को थाना सनौद में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि CBK EV MOTORS/CBK SERVICE CENTER, रायपुर से जुड़े कंपनी CEO नंदकिशोर साहू, MD लोकेश द्विवेदी और CMD पुरुषोत्तम साहू ने इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक सामान की डीलरशिप लेने पर आकर्षक लाभ और 100 प्रतिशत कैशबैक देने का भरोसा दिलाया था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, कंपनी की ओर से इलेक्ट्रिक स्कूटी, स्कूल वैन, लोडर वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की डीलरशिप के संबंध में प्रस्ताव दिया गया था। इसी भरोसे में आकर उन्होंने कंपनी की बताई शर्तों के अनुसार रकम जमा करना शुरू किया।
अलग-अलग किश्तों में जमा किए 31.80 लाख रुपये
डीलरशिप लेने के लिए शिकायतकर्ता से शुरुआत में 10 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद इलेक्ट्रिक स्कूटी और इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध कराने के नाम पर अतिरिक्त रकम जमा कराने को कहा गया।
शिकायत के अनुसार, मनीष कुमार साहू ने कंपनी द्वारा बताए गए बैंक खातों में 30 मई 2024 से अलग-अलग किश्तों में कुल 31 लाख 80 हजार रुपये जमा किए।
रकम जमा करने के बाद शिकायतकर्ता ने डीलरशिप के लिए ग्राम सनौद में बाकायदा किराये पर दुकान भी ली। उम्मीद थी कि कंपनी की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य सामान की नियमित सप्लाई शुरू की जाएगी और कारोबार आगे बढ़ेगा।
11 इलेक्ट्रिक वाहन दिए, फिर वापस ले गई कंपनी
पुलिस के मुताबिक, रकम जमा करने के बाद कंपनी की ओर से शिकायतकर्ता को 11 इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए गए। हालांकि, इन वाहनों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आई।
गुणवत्ता सही नहीं होने की बात कहे जाने के बाद कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहनों को वापस ले लिया गया। इसके बाद कंपनी की ओर से नए और बेहतर वाहन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में नए वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए।
इसके साथ ही जमा की गई बड़ी रकम को वापस लेने के लिए शिकायतकर्ता ने कंपनी से संपर्क किया।
पैसे वापस मांगने पर दिए तीन चेक
पुलिस की जांच के अनुसार, रकम वापस मांगने पर 6 सितंबर 2024 को धमतरी के भूपेंद्र दादर स्थित दुकान में शिकायतकर्ता को 1 लाख 45 हजार रुपये वापस किए गए।
शेष रकम के भुगतान के लिए कंपनी की ओर से तीन चेक दिए गए। शिकायतकर्ता ने जब इन चेकों को बैंक में जमा किया तो तीनों चेक स्टॉप पेमेंट के कारण बाउंस हो गए।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की।
थाना सनौद में दर्ज हुआ मामला
शिकायत के आधार पर थाना सनौद में अपराध क्रमांक 40/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में धारा 420 और 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
जांच के दौरान पुलिस ने कंपनी से जुड़े आरोपियों की भूमिका और शिकायतकर्ता से हुई लेन-देन की जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
बिलासपुर और सारंगढ़ से पकड़े गए आरोपी
पुलिस की कार्रवाई में आरोपी लोकेश द्विवेदी को बिलासपुर से पकड़ा गया, जबकि पुरुषोत्तम साहू को सारंगढ़ से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद दोनों को 19 सितंबर 2026 को विधिवत गिरफ्तार किया गया।
आरोपियों को बालोद न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से अदालत ने दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गर्वा के निर्देश पर की गई। पुलिस अनुविभागीय अधिकारी गुरूर माया शर्मा के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी सनौद सोनसिंह सोरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश की।
पुलिस ने आरोपियों को अलग-अलग शहरों से गिरफ्तार कर मामले की जांच को आगे बढ़ाया है।
31.80 लाख की रकम के मामले में जांच जारी
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने कुल 31.80 लाख रुपये जमा किए जाने की बात कही है। इसमें से 1.45 लाख रुपये वापस किए जाने और शेष रकम के लिए दिए गए तीन चेक स्टॉप पेमेंट के कारण बाउंस होने का आरोप है।
अब पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कंपनी की ओर से डीलरशिप और कैशबैक के नाम पर कितने लोगों से रकम ली गई थी और इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं।
फिलहाल पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।



