बिलासपुर में रिटायर्ड कर्मचारी से 10 लाख रुपये की ठगी, इंजन ऑयल एजेंसी दिलाने का दिया था झांसा

बिलासपुर में साइबर और निवेश संबंधी ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को इंजन ऑयल की एजेंसी दिलाने और भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 10 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने मामले में कंपनी के डायरेक्टर और उसके सहयोगी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार पीड़ित बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र का रहने वाला एक रिटायर्ड कर्मचारी है। सेवानिवृत्ति के बाद वह किसी व्यवसाय में निवेश कर अतिरिक्त आय अर्जित करना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात ओडिशा स्थित एक कंपनी के प्रतिनिधियों से हुई।
आरोप है कि कंपनी के अधिकारियों ने खुद को इंजन ऑयल और लुब्रिकेंट्स के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने पीड़ित को बताया कि यदि वह कंपनी के साथ “चैनल पार्टनर” बनता है तो उसे इंजन ऑयल की एजेंसी दी जाएगी और निवेश की गई राशि पर 50 प्रतिशत तक लाभ मिलेगा।
कैसे दिया गया झांसा?
आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि:
- कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है।
- एजेंसी मिलने पर नियमित आय होगी।
- निवेश पर 50 प्रतिशत तक मुनाफा मिलेगा।
- कंपनी का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है।
- चैनल पार्टनर बनने वालों को विशेष लाभ और कमीशन दिया जाता है।
इन दावों और आश्वासनों पर भरोसा करके रिटायर्ड कर्मचारी ने अलग-अलग किस्तों में कंपनी के बताए खातों में रकम जमा कर दी।
10 लाख रुपये की वसूली
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने विभिन्न शुल्क, एजेंसी प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य मदों के नाम पर धीरे-धीरे लगभग 10 लाख रुपये जमा करवा लिए।
शुरुआत में कंपनी की ओर से सकारात्मक जवाब दिए जाते रहे, लेकिन बाद में:
- एजेंसी नहीं दी गई।
- मुनाफे का कोई भुगतान नहीं हुआ।
- फोन कॉल का जवाब मिलना बंद हो गया।
- कंपनी के प्रतिनिधि टालमटोल करने लगे।
इसके बाद पीड़ित को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया। प्रारंभिक शिकायत के आधार पर मामला ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में दर्ज किया गया, क्योंकि कंपनी का संचालन वहीं से होने की जानकारी सामने आई थी।
चूंकि पीड़ित बिलासपुर का निवासी है और धनराशि का लेन-देन तथा प्रभाव क्षेत्र बिलासपुर से जुड़ा हुआ है, इसलिए भुवनेश्वर में दर्ज जीरो एफआईआर (Zero FIR) को आगे की जांच के लिए बिलासपुर के सरकंडा थाने भेज दिया गया।
क्या होती है जीरो एफआईआर?
जीरो एफआईआर ऐसी प्राथमिकी होती है जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है, चाहे घटना उस थाना क्षेत्र की हो या नहीं।
इसके फायदे:
- पीड़ित को तत्काल शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिलती है।
- जांच में देरी नहीं होती।
- बाद में केस संबंधित क्षेत्र के थाने को ट्रांसफर कर दिया जाता है।
इस मामले में भी पहले भुवनेश्वर में जीरो एफआईआर दर्ज की गई और बाद में इसे सरकंडा थाने स्थानांतरित कर दिया गया।
किन लोगों पर मामला दर्ज?
पुलिस ने कंपनी के:
- डायरेक्टर
- एक सहयोगी/प्रतिनिधि
के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और अन्य संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। जांच के दौरान बैंक खातों, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, कंपनी के दस्तावेजों और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
पुलिस की जांच किन बिंदुओं पर?
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि:
- कंपनी वास्तव में अस्तित्व में है या फर्जी है।
- कितने लोगों से इसी तरह पैसा लिया गया।
- जमा की गई राशि किन खातों में गई।
- क्या यह संगठित निवेश ठगी का मामला है।
- अन्य राज्यों के लोग भी इसके शिकार हुए हैं या नहीं।
लोगों के लिए सावधानी
इस तरह की ठगी से बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:
- अत्यधिक मुनाफे के दावों पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी भी एजेंसी या फ्रेंचाइजी में निवेश से पहले कंपनी का सत्यापन करें।
- कंपनी का पंजीकरण, जीएसटी, कार्यालय और व्यापारिक रिकॉर्ड जांचें।
- केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर पैसा जमा न करें।
- किसी भी निवेश से पहले लिखित अनुबंध और कानूनी सलाह जरूर लें।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि रिटायरमेंट के बाद निवेश के अवसर तलाश रहे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है, क्योंकि ठग अक्सर ज्यादा मुनाफे और सुरक्षित आय का लालच देकर लोगों को निशाना बनाते हैं।



