
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली बिलों में कथित गड़बड़ी का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। बिजली उपभोक्ताओं को दिए जा रहे रीडिंग बिल और भुगतान बिल की राशि में अंतर को लेकर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक (एमडी) से मुलाकात की। इस दौरान उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि बिजली बिलों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आ रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मुलाकात के दौरान सीएसपीडीसीएल के एमडी ने भी स्वीकार किया कि बिजली बिल संबंधी करीब 2700 शिकायतें उनके संज्ञान में आई हैं।
रीडिंग बिल और भुगतान बिल में अंतर का आरोप
विकास उपाध्याय ने कहा कि राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें मीटर की रीडिंग के आधार पर तैयार किए गए बिल और वास्तविक भुगतान के लिए जारी बिल की राशि में अंतर पाया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि राजधानी रायपुर में ही हजारों शिकायतें सामने आ रही हैं, तो पूरे प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या लाखों तक हो सकती है। उनके अनुसार, महंगाई के दौर में पहले से परेशान उपभोक्ताओं पर इस तरह के अतिरिक्त बिलों का बोझ डालना गंभीर चिंता का विषय है।
दर्जनों उदाहरण लेकर पहुंचे प्रतिनिधिमंडल
उपाध्याय ने बताया कि वे बिजली बिलों में गड़बड़ी के दर्जनों उदाहरण अपने साथ लेकर सीएसपीडीसीएल कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण उपभोक्ताओं को गलत या अधिक राशि वाले बिल मिल रहे हैं।
उनका कहना था कि जब स्वयं बिजली कंपनी के एमडी ने 2700 शिकायतों की बात स्वीकार की है, तो यह स्पष्ट है कि समस्या व्यक्तिगत नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर है।
स्मार्ट मीटर पर उठाए सवाल
पूर्व विधायक ने इस पूरे विवाद के लिए स्मार्ट मीटर प्रणाली को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद से उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ी हैं और लोगों को वास्तविक खपत से अधिक राशि के बिल मिलने लगे हैं।
उन्होंने मांग की कि जब तक पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को बंद किया जाए और जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां उनकी कार्यप्रणाली की तकनीकी जांच कराई जाए।
ऑटो-पे उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता
विकास उपाध्याय ने कहा कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपने बिजली बिल के भुगतान के लिए ऑटो-पे सुविधा सक्रिय कर रखी है। ऐसे उपभोक्ताओं के खाते से बिल की राशि स्वतः कट जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी उपभोक्ता के खाते से गलत या अधिक राशि वाला बिल ऑटो-पे के माध्यम से कट जाता है, तो क्या बिजली विभाग उस अतिरिक्त राशि को स्वतः वापस करेगा? उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
बिजली उपभोक्ताओं की अन्य समस्याएं भी गिनाईं
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रदेश के उपभोक्ता पहले से कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें—
- बिजली दरों में वृद्धि,
- कथित रूप से अधिक बिजली बिल,
- लो-वोल्टेज की समस्या,
- बार-बार बिजली कटौती,
- और अब बिलों में अंतर जैसी शिकायतें शामिल हैं।
उपाध्याय ने आरोप लगाया कि विभाग दो अलग-अलग प्रकार के बिल जारी कर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहा है, जिससे लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है।
बिजली बिल हाफ योजना का भी किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि पहले 400 यूनिट तक की बिजली पर मिलने वाली ‘बिजली बिल हाफ योजना’ की सुविधा समाप्त कर दी गई और अब उपभोक्ताओं को अधिक राशि वाले बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि महंगाई के दौर में आम परिवारों पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऊर्जा विभाग मुख्यमंत्री के पास होने के बावजूद उपभोक्ताओं की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
विकास उपाध्याय ने मांग की कि—
- बिजली बिल गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
- स्मार्ट मीटर व्यवस्था की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।
आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि उपभोक्ताओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और स्मार्ट मीटर को लेकर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर ऊर्जा विभाग के कार्यालय और मुख्यमंत्री निवास का घेराव भी किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
सीएसपीडीसीएल के एमडी से मुलाकात के दौरान विकास उपाध्याय के साथ कन्हैया अग्रवाल, दीपक मिश्रा, सुमित दास, रवि थॉमस, उत्तम साहू, राजेश पाल, अन्नू राम साहू, शिव श्याम शुक्ला, चिंता राम साहू, संदीप शर्मा, विकास अग्रवाल, संदीप सिरमौर, घनश्याम ओझा सहित अन्य कार्यकर्ता और उपभोक्ता प्रतिनिधि मौजूद रहे।



