छत्तीसगढ़

भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप कांड: CISF के 7 जवान निलंबित, करोड़ों की चोरी मामले में जांच तेज..

भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में सामने आए करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप और ऑस्ट्रेलियन कोक चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। सुरक्षा में गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अपने 7 जवानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि जांच अब केवल चोरी करने वाले गिरोह तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा तंत्र की जवाबदेही भी तय की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

भिलाई स्टील प्लांट देश के प्रमुख इस्पात संयंत्रों में से एक है, जहां सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के पास होती है। ऐसे में करोड़ों रुपये मूल्य के लौह स्क्रैप और ऑस्ट्रेलियन कोक की चोरी का लंबे समय तक जारी रहना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि प्लांट से बड़े पैमाने पर सामग्री बाहर निकालने के दौरान सुरक्षा जांच में गंभीर चूक हुई। इसी आधार पर सात CISF जवानों को निलंबित किया गया है।

हालांकि, CISF के स्थानीय अधिकारियों ने निलंबन की पुष्टि की है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

भिलाई स्टील प्लांट में लंबे समय से लौह स्क्रैप और ऑस्ट्रेलियन कोक की कथित चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। आंतरिक स्तर पर जांच शुरू होने के बाद करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ।

जांच में आशंका जताई गई कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से लंबे समय से संचालित किया जा रहा नेटवर्क था, जिसमें प्लांट के अंदर और बाहर के लोगों की मिलीभगत की संभावना की जांच की जा रही है।

BSP प्रबंधन ने की विभागीय कार्रवाई

घोटाले के सामने आने के बाद भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने विभागीय जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं—

  • महाप्रबंधक (GM) हिमांशु भूषण मलिक
  • इंजीनियर एसोसिएट मनोज कुमार देवांगन
  • नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारी धनंजय वर्मा

इन पर विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन लागू किया गया।

पुलिस ने भी की गिरफ्तारी

विभागीय जांच के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। दुर्ग पुलिस ने जांच में मिले तथ्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए—

  • जीएम हिमांशु भूषण मलिक
  • इंजीनियर मनोज कुमार देवांगन

को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब उनसे पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच के दायरे में सुरक्षा कर्मियों की भूमिका

CISF के सात जवानों के निलंबन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसियां केवल प्रशासनिक अधिकारियों ही नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि—

  • चोरी की घटनाएं कैसे और कब होती रहीं।
  • सुरक्षा जांच के दौरान किस स्तर पर लापरवाही हुई।
  • क्या किसी सुरक्षा कर्मी की जानबूझकर मिलीभगत थी या केवल ड्यूटी में लापरवाही हुई।
  • चोरी किए गए स्क्रैप और ऑस्ट्रेलियन कोक को प्लांट से बाहर कैसे निकाला गया।

आगे क्या?

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस, बीएसपी प्रबंधन और CISF अपने-अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं। यदि जांच में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या बाहरी लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

भिलाई स्टील प्लांट जैसे रणनीतिक और सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान में सामने आया यह घोटाला सुरक्षा व्यवस्था, आंतरिक निगरानी प्रणाली और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में इस कथित सिंडिकेट की पूरी परतें कब तक सामने आती हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

Related Articles

Back to top button