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बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड्स का बड़ा निवेश, ICICI बैंक, HDFC बैंक और रिलायंस में लगाए 24,202 करोड़ रुपये

मई महीने में शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और अस्थिरता देखने को मिली, लेकिन इस दौरान म्यूचुअल फंड कंपनियों ने घबराने के बजाय बाजार में आई गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। फंड मैनेजरों ने मजबूत वित्तीय स्थिति और दीर्घकालिक संभावनाओं वाली बड़ी कंपनियों में जमकर निवेश किया। खास तौर पर बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों पर सबसे अधिक भरोसा जताया गया।

तीन ब्लूचिप कंपनियों में सबसे बड़ा निवेश

मई के दौरान म्यूचुअल फंड्स ने सबसे अधिक निवेश ICICI Bank, HDFC Bank और Reliance Industries के शेयरों में किया।

इन तीनों कंपनियों में कुल 24,202 करोड़ रुपये का निवेश किया गया, जो मई महीने के सबसे बड़े निवेशों में शामिल रहा।

इन निवेशों के बाद म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल इक्विटी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा केवल इन तीन कंपनियों में निवेशित है। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद फंड मैनेजर इन कंपनियों की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर भरोसा जता रहे हैं।

नई कंपनियों में भी बढ़ाया निवेश

सिर्फ स्थापित कंपनियों तक ही सीमित न रहते हुए म्यूचुअल फंड्स ने उभरती कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया।

मई के दौरान आई ब्लॉक डील्स में फंड हाउसों ने Lenskart और Billionbrains Garage Ventures के शेयरों की खरीद में सक्रिय भागीदारी की।

इन दोनों कंपनियों में लगभग 6,154 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। यह दर्शाता है कि म्यूचुअल फंड्स भविष्य में तेज़ी से बढ़ने वाली कंपनियों पर भी दांव लगा रहे हैं।

इन कंपनियों में भी की खरीदारी

इसके अलावा म्यूचुअल फंड्स ने कई अन्य प्रमुख कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • JSW Energy
  • HDFC Life Insurance
  • Adani Enterprises

शामिल हैं।

इन कंपनियों में निवेश से संकेत मिलता है कि फंड मैनेजर ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं और विविध व्यवसाय वाले समूहों में भी दीर्घकालिक अवसर देख रहे हैं।

आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली

जहां एक ओर कई सेक्टरों में खरीदारी हुई, वहीं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के कुछ प्रमुख शेयरों में म्यूचुअल फंड्स ने मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई।

मई महीने में सबसे अधिक बिकवाली निम्न कंपनियों में दर्ज की गई—

  • Wipro
  • Infosys
  • Multi Commodity Exchange of India

इन तीनों कंपनियों से मिलाकर लगभग 7,000 करोड़ रुपये की निकासी की गई।

इन शेयरों में भी घटाई हिस्सेदारी

आईटी कंपनियों के अलावा म्यूचुअल फंड्स ने Lupin और GE Vernova में भी अपनी हिस्सेदारी कम की।

इससे संकेत मिलता है कि फंड मैनेजर समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते रहते हैं और बाजार की परिस्थितियों तथा विभिन्न सेक्टरों की संभावनाओं के आधार पर निवेश रणनीति तय करते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है संदेश?

मई महीने के निवेश पैटर्न से यह स्पष्ट होता है कि म्यूचुअल फंड कंपनियां बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत बुनियादी स्थिति (Strong Fundamentals) वाली कंपनियों में निवेश बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं।

साथ ही, जिन शेयरों में हाल के महीनों में अच्छा रिटर्न मिल चुका है या जहां निकट भविष्य में सीमित वृद्धि की संभावना दिखाई दे रही है, वहां मुनाफावसूली भी की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुख सेक्टर रोटेशन (एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में निवेश स्थानांतरित करना) और दीर्घकालिक निवेश रणनीति का संकेत देता है। हालांकि, निवेशकों को केवल म्यूचुअल फंड्स की खरीद-बिक्री के आधार पर निवेश निर्णय नहीं लेना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि का मूल्यांकन करना आवश्यक है।

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