Ramayana: कुंभकर्ण बनने के लिए फैजल मलिक ने ‘हल्क’ से ली प्रेरणा, बोले- बचपन का सपना हुआ पूरा

Entertainment Desk: फिल्ममेकर नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। भारतीय महाकाव्य रामायण पर आधारित इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के मुख्य किरदारों के साथ-साथ अब दूसरे अहम पात्रों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच वेब सीरीज ‘पंचायत’ में प्रह्लाद चाचा का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले अभिनेता फैजल मलिक ने अपने नए रोल को लेकर दिलचस्प खुलासा किया है।

फैजल मलिक फिल्म में रावण के भाई कुंभकर्ण की भूमिका निभा रहे हैं। इस विशालकाय और प्रभावशाली पात्र को पर्दे पर उतारने के लिए अभिनेता ने हॉलीवुड सुपरहीरो हल्क से प्रेरणा ली। फैजल के मुताबिक, कुंभकर्ण की शारीरिक बनावट, ताकत और स्क्रीन पर उसकी मौजूदगी को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें ऐसे किरदार के संदर्भ की जरूरत थी, जो सामान्य इंसान से बिल्कुल अलग दिखाई देता हो। ऐसे में मार्वल की फिल्मों में नजर आने वाला हल्क उनके लिए उपयोगी रेफरेंस बना।
कुंभकर्ण के किरदार के लिए हल्क क्यों बने प्रेरणा?
वैरायटी इंडिया से बातचीत में फैजल मलिक ने बताया कि कुंभकर्ण का किरदार निभाना उनके लिए अभिनय के लिहाज से एक अलग अनुभव है। कुंभकर्ण रामायण का ऐसा पात्र है, जिसकी पहचान उसकी विशाल काया, असाधारण ताकत और लंबे समय तक सोते रहने की मान्यता से जुड़ी हुई है। ऐसे किरदार को पर्दे पर विश्वसनीय और प्रभावशाली ढंग से पेश करने के लिए केवल संवाद बोलना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके शारीरिक हाव-भाव और व्यक्तित्व पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए फैजल ने हल्क के किरदार को एक संदर्भ के रूप में देखा। मार्वल की फिल्मों में हल्क का सामान्य इंसान से विशाल और ताकतवर रूप में बदलना दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा है। अभिनेता मार्क रफालो ने भी इस सुपरहीरो को पर्दे पर निभाया है। हल्क की शारीरिक बनावट और उसके विशाल रूप की कल्पना से फैजल को कुंभकर्ण की प्रस्तुति के लिए एक दिशा मिली।
हालांकि, कुंभकर्ण और हल्क की पृष्ठभूमि अलग-अलग है। हल्क एक आधुनिक सुपरहीरो है, जबकि कुंभकर्ण भारतीय पौराणिक कथा का महत्वपूर्ण पात्र है। ऐसे में फैजल के लिए चुनौती यह है कि वह हल्क से मिले दृश्य संदर्भ को सीधे दोहराने के बजाय कुंभकर्ण की अपनी पहचान, स्वभाव और पौराणिक महत्व को बनाए रखते हुए किरदार को पर्दे पर जीवंत करें।
‘रामायण’ का हिस्सा बनना बचपन के सपने जैसा
फैजल मलिक ने फिल्म में काम करने को अपने लिए बेहद खास अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रामायण देखते हुए बड़े हुए हैं। ऐसे में जिस महागाथा को उन्होंने बचपन में देखा और समझा, उसी का हिस्सा बनकर किसी महत्वपूर्ण पात्र को निभाना उनके लिए सपने के सच होने जैसा है।
रामायण भारतीय संस्कृति और परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है। इसके पात्रों को लेकर दर्शकों के मन में पहले से एक विशेष छवि बनी हुई है। कुंभकर्ण भी ऐसा ही पात्र है, जिसे लोग रावण के भाई और अपनी विशाल काया के साथ-साथ उसकी लंबी नींद के प्रसंग के कारण जानते हैं।
फैजल के लिए इस किरदार को निभाना इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि दर्शक कुंभकर्ण को केवल एक विशाल शरीर वाले पात्र के रूप में नहीं देखते। रामायण की कथा में उसकी अपनी भूमिका और पहचान है। इसलिए उसे पर्दे पर पेश करते समय उसके व्यक्तित्व और कहानी से जुड़े पहलुओं को समझना महत्वपूर्ण है।
विशाल काया और हाव-भाव को पर्दे पर दिखाना बड़ी चुनौती
कुंभकर्ण का नाम सामने आते ही दर्शकों के मन में एक विशालकाय योद्धा की छवि उभरती है। ऐसे पात्र को फिल्म में प्रभावी बनाने के लिए उसके लुक, शारीरिक भाषा और स्क्रीन पर मौजूदगी पर विशेष मेहनत करनी पड़ती है।
फैजल मलिक के सामने भी यही चुनौती है। उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि कुंभकर्ण की विशालता केवल उसके बाहरी रूप तक सीमित न रहे, बल्कि उसके चलने, उठने-बैठने और दूसरे पात्रों के साथ संवाद करने के अंदाज में भी दिखाई दे।
इसके अलावा, कुंभकर्ण के लंबे समय तक सोने से जुड़ा प्रसंग भी उसकी पहचान का अहम हिस्सा है। फिल्म में इस पात्र को किस तरह प्रस्तुत किया गया है और उसके व्यक्तित्व के किन पहलुओं पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया है, यह दर्शकों के लिए दिलचस्प हो सकता है।
फिल्म की टीम के सामने भी चुनौती यही है कि पौराणिक कथा के इस प्रसिद्ध पात्र को बड़े पर्दे पर ऐसा रूप दिया जाए, जो भव्य होने के साथ-साथ दर्शकों को उसकी कहानी से जोड़ सके।
अरुण गोविल की भगवान राम वाली छवि आज भी लोगों के दिलों में
बातचीत के दौरान फैजल मलिक ने रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘रामायण’ का भी जिक्र किया। इस धारावाहिक में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल आज भी दर्शकों के बीच इसी पहचान के लिए जाने जाते हैं। कई दशक बीत जाने के बाद भी राम के रूप में उनकी छवि लोगों की यादों में कायम है।
यह इस बात का उदाहरण है कि रामायण जैसे महाकाव्य के पात्रों को पर्दे पर निभाने वाले कलाकार दर्शकों के मन में कितनी गहरी जगह बना सकते हैं। जब किसी प्रसिद्ध कथा को नए कलाकारों और नए तकनीकी अंदाज के साथ पेश किया जाता है, तो उसकी तुलना पहले के लोकप्रिय रूपांतरणों से होना स्वाभाविक है।
फैजल मलिक के मुताबिक, पहले से लोगों के दिलों में जगह बना चुके इन किरदारों को नए अंदाज में प्रस्तुत करना फिल्म की टीम के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। दर्शकों की भावनाओं और रामायण से उनके जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए पात्रों को नई पीढ़ी के सामने पेश करना आसान काम नहीं है।
‘रामायण’ के नए रूपांतरण से दर्शकों को उम्मीद है कि फिल्म अपने भव्य दृश्यांकन के साथ-साथ कहानी के मूल भाव और पात्रों की पहचान को भी महत्व देगी।
‘पंचायत’ के प्रह्लाद चाचा से कुंभकर्ण तक फैजल मलिक का नया सफर
फैजल मलिक को वेब सीरीज ‘पंचायत’ में प्रह्लाद चाचा के किरदार से व्यापक लोकप्रियता मिली। इस भूमिका में उनके सहज अभिनय और भावनात्मक प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब पसंद किया। प्रह्लाद चाचा का किरदार कहानी में अपने खास अंदाज और भावनात्मक पक्ष के कारण दर्शकों से जुड़ता है।
अब फैजल एक बिल्कुल अलग तरह की भूमिका में नजर आने वाले हैं। जहां ‘पंचायत’ में उनका किरदार आम जीवन से जुड़ा हुआ है, वहीं कुंभकर्ण का पात्र पौराणिक कथा का हिस्सा है और उसके लिए अलग तरह की शारीरिक प्रस्तुति की जरूरत है।
यह भूमिका अभिनेता को अपनी अभिनय क्षमता के दूसरे पहलू को सामने लाने का अवसर दे सकती है। फैजल की इच्छा है कि दर्शक उन्हें कुंभकर्ण के रूप में भी उसी अपनापन और प्यार के साथ स्वीकार करें, जैसा उन्हें प्रह्लाद चाचा के किरदार में मिला है।
एक लोकप्रिय किरदार से निकलकर बिल्कुल अलग दुनिया के पात्र को निभाना किसी भी अभिनेता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में फैजल का यह नया अवतार उनके प्रशंसकों के लिए भी उत्सुकता का विषय बना हुआ है।
नितेश तिवारी की ‘रामायण’ को लेकर क्यों बढ़ रही है उत्सुकता?
नितेश तिवारी की ‘रामायण’ को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे कलाकारों के साथ फैजल मलिक का जुड़ना भी इसे लेकर दिलचस्पी बढ़ाता है। भगवान राम, माता सीता, रावण और कुंभकर्ण जैसे परिचित पात्रों को बड़े पर्दे पर नए कलाकारों के जरिए पेश किया जाना फिल्म की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
कुंभकर्ण के किरदार के लिए फैजल मलिक द्वारा हल्क को रेफरेंस के रूप में इस्तेमाल करने की बात यह संकेत देती है कि अभिनेता अपने पात्र की शारीरिक बनावट और प्रभाव को लेकर अलग तरह से तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, फिल्म में उनका अंतिम लुक और किरदार की पूरी प्रस्तुति कैसी होगी, इसका पता दर्शकों को फिल्म से जुड़ी आधिकारिक झलकियों और रिलीज के बाद ही चलेगा।
फिलहाल फैजल मलिक के इस खुलासे ने ‘रामायण’ को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है। अब दर्शकों को इंतजार है कि ‘पंचायत’ के प्रह्लाद चाचा बड़े पर्दे पर कुंभकर्ण के रूप में किस अंदाज में नजर आते हैं और उनका यह नया अवतार दर्शकों पर कितना प्रभाव छोड़ता है।



