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महतारी वंदन योजना में बड़ी गड़बड़ी: 1726 अपात्र हितग्राहियों को 1.93 करोड़ का भुगतान, अब होगी रिकवरी; ऑडिट में मृतकों के नाम भी सामने आए

बीजापुर। छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना को लेकर बीजापुर जिले से वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। योजना के तहत लाभार्थियों की केवाईसी और रिकॉर्ड के ऑडिट के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही पाए गए हैं, जो योजना के लिए निर्धारित पात्रता के दायरे में नहीं आते थे। इसके बावजूद उनके खातों में योजना की राशि लगातार पहुंचती रही।

उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में 1726 अपात्र हितग्राहियों के नाम सामने आए हैं। इन हितग्राहियों को कुल मिलाकर करीब 1 करोड़ 93 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब अपात्र हितग्राहियों को किए गए भुगतान की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि, इस पूरे मामले में आंकड़ों को लेकर अभी कुछ असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है। विभागीय स्तर पर फिलहाल करीब 700 मामलों की बात कही जा रही है, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड में अपात्र हितग्राहियों की संख्या 1726 बताई गई है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तविक संख्या कितनी है और सरकारी राशि का कुल कितना भुगतान अपात्र लोगों को हुआ।

बीजापुर में 42 हजार से ज्यादा महिलाएं योजना में पंजीकृत

महतारी वंदन योजना के तहत बीजापुर जिले में कुल 42,884 महिलाएं पंजीकृत हैं। योजना का उद्देश्य पात्र विवाहित महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। लाभार्थियों के बैंक खातों में निर्धारित राशि सीधे ट्रांसफर की जाती है।

समय-समय पर लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच, केवाईसी और अन्य उपलब्ध सरकारी डाटाबेस से सत्यापन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लाभार्थियों की पात्रता पर सवाल खड़े हुए।

ऑडिट के दौरान सामने आए मामलों ने योजना के लाभार्थी सत्यापन और भुगतान व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

21 साल से कम उम्र की 501 महिलाओं को मिला भुगतान

ऑडिट में सामने आई जानकारी के अनुसार 21 वर्ष से कम उम्र की 501 महिलाओं को भी महतारी वंदन योजना की राशि का भुगतान किया गया।

इन 501 हितग्राहियों के खातों में कुल 91 लाख 73 हजार 500 रुपये पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

योजना की निर्धारित पात्रता के अनुसार न्यूनतम आयु सीमा महत्वपूर्ण है। ऐसे में 21 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची में शामिल होना और उन्हें राशि का भुगतान होना सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

अब विभाग ऐसे मामलों में यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि रिकॉर्ड में उम्र गलत दर्ज होने के कारण भुगतान हुआ या फिर पात्रता की जांच के बावजूद इन नामों को सूची से हटाया नहीं गया।

आयकर दायरे में आने वाली 141 महिलाओं को भी राशि

जांच में ऐसे हितग्राही भी सामने आए हैं, जो आयकर के दायरे में आते हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक कुल 141 महिलाओं को योजना की राशि का भुगतान किया गया।

इन मामलों में करीब 45 लाख रुपये का भुगतान होने की जानकारी सामने आई है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि योजना की पात्रता शर्तों के तहत निर्धारित आर्थिक एवं आय संबंधी मानकों का पालन जरूरी है। अब विभागीय जांच में यह देखा जा रहा है कि इन महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची में किस आधार पर शामिल हुए और भुगतान कितने समय तक जारी रहा।

सरकारी सेवा से जुड़ी महिलाओं को भी मिला योजना का लाभ

ऑडिट में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें शासकीय सेवा से जुड़ी महिलाओं के खातों में भी महतारी वंदन योजना की राशि पहुंची।

ऐसे मामलों में 33 लाख रुपये से अधिक का भुगतान होने की जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।

सरकारी सेवा से जुड़े हितग्राहियों की पात्रता का सत्यापन भी योजना के तहत महत्वपूर्ण है। ऐसे में विभाग अब संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटा है कि इन महिलाओं को किस अवधि में और कितनी राशि का भुगतान किया गया।

मृत हितग्राहियों के नाम पर भी जारी होती रही राशि

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर तथ्य मृत हितग्राहियों के नाम पर भुगतान का सामने आना है।

ऑडिट के दौरान 675 ऐसे हितग्राहियों के नाम सामने आए, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम से योजना की राशि जारी होती रही।

इन मामलों में कुल 7 लाख 33 हजार रुपये के भुगतान की जानकारी सामने आई है।

मृत व्यक्ति के नाम से सरकारी योजना की राशि जारी होना लाभार्थी डाटाबेस के नियमित सत्यापन और बैंकिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब विभाग इन मामलों में यह जांच करेगा कि संबंधित हितग्राहियों की मृत्यु के बाद कितनी किस्तें जारी हुईं और राशि किन खातों में पहुंची।

एक ही बैंक खाते में दो हितग्राहियों की राशि

जांच के दौरान 96 ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही बैंक खाते में दो अलग-अलग हितग्राहियों की राशि पहुंचने की बात कही गई है।

एक ही बैंक खाते से जुड़े दो लाभार्थियों का सामने आना भी विभाग के लिए जांच का विषय बन गया है। विभाग अब बैंक खातों, आधार और लाभार्थी रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाएगा कि ये मामले तकनीकी त्रुटि के हैं या फिर जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज कराई गई थी।

संबंधित सीडीपीओ को नोटिस

मामला सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारियों (CDPO) को नोटिस जारी किया है। साथ ही अपात्र हितग्राहियों को किए गए भुगतान की राशि वापस लेने यानी रिकवरी की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब विभागीय स्तर पर दो प्रमुख स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। पहला, अपात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें योजना की सूची से हटाना और दूसरा, पहले से भुगतान की गई सरकारी राशि की वसूली करना।

1726 या करीब 700? आंकड़ों में अंतर से उठे सवाल

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अब अपात्र हितग्राहियों की वास्तविक संख्या को लेकर है।

उपलब्ध रिकॉर्ड में 1726 अपात्र हितग्राहियों का आंकड़ा सामने आया है और इनके खातों में करीब 1.93 करोड़ रुपये पहुंचने की जानकारी है। दूसरी ओर विभागीय स्तर पर फिलहाल करीब 700 मामलों की बात कही जा रही है।

इस अंतर के कारण मामले की अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। संभव है कि अलग-अलग चरणों में किए गए सत्यापन और जांच के आंकड़ों में अंतर हो। ऐसे में विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि:

  • कुल कितने हितग्राही अपात्र पाए गए?
  • अपात्र हितग्राहियों को कितनी राशि का भुगतान हुआ?
  • कितने समय तक उन्हें योजना का लाभ मिलता रहा?
  • मृत हितग्राहियों के नाम पर कितनी किस्तें जारी हुईं?
  • एक ही बैंक खाते से जुड़े मामलों में वास्तविक स्थिति क्या है?
  • सरकारी सेवा और आयकर दायरे से जुड़े कितने लोगों को भुगतान हुआ?
  • कुल कितनी सरकारी राशि की रिकवरी की जानी है?

रिकवरी के साथ होगी रिकॉर्ड की दोबारा जांच

विभाग की प्राथमिकता अब गलत तरीके से किए गए भुगतान की राशि की वसूली के साथ-साथ लाभार्थी सूची को दुरुस्त करना है। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड, केवाईसी, बैंक खातों और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन किया जा सकता है।

मृत हितग्राहियों और एक ही बैंक खाते से जुड़े मामलों की विशेष जांच भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इन मामलों से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गड़बड़ी केवल रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने के कारण हुई या इसके पीछे किसी तरह की गंभीर लापरवाही अथवा अनियमितता थी।

जांच पूरी होने के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल बीजापुर जिले में महतारी वंदन योजना से जुड़े इन मामलों को लेकर विभागीय जांच और रिकवरी की कार्रवाई जारी है। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर करीब 1.93 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है, लेकिन हितग्राहियों की संख्या और वास्तविक वित्तीय अनियमितता को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

मामले में यदि जांच के दौरान जानबूझकर गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेने या सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो आगे की कार्रवाई भी संबंधित नियमों के तहत तय की जा सकती है। फिलहाल विभाग का मुख्य फोकस अपात्र नामों को चिन्हित करने, गलत भुगतान रोकने और सरकारी राशि की रिकवरी पर है।

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