बिलासपुर पुलिस का बड़ा ऑपरेशन: 23 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक डिटेंशन सेंटर भेजे गए, दस्तावेजों की जांच के बाद होगी डिपोर्टेशन प्रक्रिया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में बिलासपुर पुलिस ने सिरगिट्टी क्षेत्र में रहने वाले 23 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर प्राथमिक भौतिक सत्यापन की कार्रवाई पूरी की है। पुलिस के अनुसार, इन सभी की नागरिकता और पहचान को लेकर गंभीर संदेह सामने आया था।
प्राथमिक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद 4 सितंबर 2026 को सभी 23 संदिग्धों को कड़ी सुरक्षा के बीच रायपुर स्थित होल्डिंग सह डिटेंशन सेंटर (निरोध केंद्र) भेज दिया गया। अब यहां संबंधित दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि जांच में इनके विदेशी नागरिक होने की पुष्टि होती है और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है, तो इन्हें उनके मूल देश वापस भेजने यानी डिपोर्टेशन की कार्रवाई की जाएगी।

राज्य शासन के निर्देश के बाद बनाई गई विशेष टीम
पुलिस के मुताबिक, प्रदेश में बिना वैध दस्तावेजों के निवासरत अनधिकृत व्यक्तियों की पहचान कर उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए राज्य शासन की ओर से सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
इन निर्देशों के पालन में बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया। इस विशेष अभियान की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मिता कौर चावला को दी गई।
एसटीएफ में सात वरिष्ठ थाना निरीक्षकों सहित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया। टीम को संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान, उनके दस्तावेजों की जांच और उनके मूल निवास से जुड़ी जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई।
खुफिया जानकारी के आधार पर सिरगिट्टी में हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से प्राप्त खुफिया जानकारियों और स्थानीय स्तर पर की गई प्राथमिक पड़ताल के आधार पर सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में रहने वाले कुछ लोगों की गतिविधियों और दस्तावेजों को लेकर संदेह सामने आया था।
इसके बाद पुलिस टीम ने क्षेत्र में सर्च और सत्यापन अभियान चलाया। जांच के दौरान ऐसे कई लोग मिले, जिनके पहचान पत्र और मूल निवास से संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर पुलिस को संदेह था।
पुलिस ने इन लोगों को हिरासत में लेकर उनके दस्तावेजों और पहचान से जुड़ी जानकारी की पड़ताल शुरू की। इसके बाद मामले की तह तक पहुंचने के लिए विशेष टीम ने संबंधित राज्यों में जाकर भी जानकारी जुटाई।
मुर्शिदाबाद और जंगीपुर तक पहुंची पुलिस टीम
जांच को आगे बढ़ाने के लिए बिलासपुर पुलिस की विशेष टीम पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और जंगीपुर क्षेत्रों तक पहुंची। वहां स्थानीय पुलिस अधिकारियों और संबंधित थाना प्रभारियों से संपर्क कर संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और उनके कथित मूल निवास से संबंधित जानकारी का सत्यापन कराया गया।
पुलिस के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर की गई इस पड़ताल के दौरान इन 23 व्यक्तियों के संबंध में ऐसी पुष्टि करने वाली जानकारी नहीं मिल सकी, जिससे प्रथम दृष्टया यह साबित हो सके कि वे भारतीय नागरिक हैं।
हालांकि, नागरिकता जैसे महत्वपूर्ण विषय में अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत सभी 23 संदिग्धों को आगे की जांच और प्रक्रिया के लिए रायपुर स्थित होल्डिंग सह डिटेंशन सेंटर भेजा गया है।
4 सितंबर को कड़ी सुरक्षा के बीच भेजा गया डिटेंशन सेंटर
पुलिस ने बताया कि 4 सितंबर 2026 को सभी 23 संदिग्धों को बिलासपुर से रायपुर के होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर स्थानांतरित किया गया। इस दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
होल्डिंग सह डिटेंशन सेंटर में आगे की वैधानिक प्रक्रिया के तहत इनकी पहचान, नागरिकता और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि संबंधित प्रक्रिया में इनके विदेशी नागरिक होने की पुष्टि होती है, तो इसके बाद संबंधित विभागों और केंद्र सरकार के स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें मूल देश वापस भेजने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
दस्तावेजों की जांच बनी कार्रवाई का अहम आधार
इस पूरे अभियान में दस्तावेजों की जांच को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने ऐसे व्यक्तियों की पहचान की जिनके पास उपलब्ध पहचान पत्रों और मूल निवास प्रमाण पत्रों को लेकर संदेह था।
पुलिस टीम ने स्थानीय स्तर पर जांच करने के साथ-साथ उन स्थानों तक जाकर भी जानकारी जुटाई, जहां से इन लोगों के दस्तावेज जारी होने का दावा किया गया था। संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर रिकॉर्ड का सत्यापन कराया गया।
पुलिस के अनुसार, इस जांच का उद्देश्य केवल संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी था कि उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं और उनके आधार पर उनकी नागरिकता की पुष्टि होती है या नहीं।
बिलासपुर पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन को लेकर अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिले के संवेदनशील इलाकों में पुलिस द्वारा सर्च और दस्तावेज सत्यापन की कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ ऐसे लोगों की पहचान करना है, जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में निवास कर रहे हों।
आम लोगों से पुलिस ने की अपील
बिलासपुर पुलिस ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने आसपास कोई ऐसा संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देता है, जिसके पास वैध पहचान या निवास संबंधी दस्तावेज नहीं हैं, तो इसकी सूचना पुलिस को दी जा सकती है।
इसके लिए पुलिस ने टोल-फ्री नंबर 1800-233-1905 जारी किया है। पुलिस के अनुसार, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी व्यक्ति की पहचान या नागरिकता को लेकर स्वयं कोई कार्रवाई न करें और ऐसी जानकारी सीधे पुलिस या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें।
23 लोगों की जांच से बढ़ी निगरानी
बिलासपुर में एक साथ 23 संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़कर उनके दस्तावेजों और नागरिकता की जांच किए जाने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था भी चर्चा में है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां दूसरे राज्यों से आकर बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं, वहां दस्तावेज सत्यापन और स्थानीय स्तर पर पुलिस निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
फिलहाल सभी 23 संदिग्ध रायपुर स्थित होल्डिंग सह डिटेंशन सेंटर में हैं और उनकी नागरिकता से जुड़ी आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। पुलिस की ओर से अंतिम कानूनी कार्रवाई संबंधित सत्यापन और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के बाद ही तय होगी।



