
खैरागढ़। सतनाम पंथ के महान संत एवं समाज सुधारक गुरु घासीदास के द्वितीय पुत्र शूरवीर राजा गुरु बालकदास की जयंती को लेकर खैरागढ़ में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। जयंती के अवसर पर रविवार 6 सितंबर को दिलीप सिंह मंगल भवन में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समारोह में सतनामी समाज के संत-महंत, भंडारी, साटीदार, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन शामिल होंगे।

आयोजन समिति द्वारा जयंती समारोह को भव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान राजा गुरु बालकदास के जीवन, उनके सामाजिक सरोकारों और समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया जाएगा। साथ ही समाज की एकता, सांस्कृतिक परंपराओं और संत परंपरा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
दोपहर 12 बजे से शुरू होगा कार्यक्रम
जयंती समारोह की शुरुआत दोपहर 12 बजे पंथी पार्टी एवं समाजसेवी सम्मान समारोह से होगी। इस कार्यक्रम में समाज और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, सम्मान समारोह का उद्देश्य समाज के उन लोगों के योगदान को सामने लाना है, जिन्होंने सामाजिक जागरूकता, जनसेवा और समाजहित के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों और पदाधिकारियों की मौजूदगी भी रहेगी।
दोपहर 2 बजे निकलेगी नगर भ्रमण रैली
सम्मान समारोह के बाद दोपहर 2 बजे नगर भ्रमण रैली निकाली जाएगी। रैली में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल होंगे। रैली को आकर्षक और भव्य बनाने के लिए विभिन्न झांकियों तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की तैयारी की गई है।
रैली में राजा गुरु बालकदास जी की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके साथ ही जैतखाम की झांकी भी शामिल की जाएगी। झांकियों के माध्यम से सतनाम पंथ की परंपरा और संतों के विचारों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
रैली में डीजे, पंथी नृत्य और विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलेंगी। पंथी नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा की झलक भी देखने को मिलेगी।
सामाजिक एकजुटता का संदेश देगी रैली
आयोजन समिति के अनुसार, नगर भ्रमण रैली केवल जयंती समारोह का हिस्सा नहीं होगी, बल्कि इसके माध्यम से समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
रैली के जरिए समाज के लोगों को संत परंपरा से जुड़े विचारों और सामाजिक संदेशों से अवगत कराने के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर आपसी सहयोग और एकजुटता को मजबूत करना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
राजा गुरु बालकदास के योगदान को किया जाएगा याद
जयंती समारोह के दौरान राजा गुरु बालकदास के जीवन और उनके सामाजिक योगदान को विशेष रूप से याद किया जाएगा। उनके विचारों और समाज के प्रति समर्पण से जुड़ी बातों को समाज के लोगों के बीच साझा किया जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि नई पीढ़ी को संत परंपरा और समाज सुधार से जुड़े महापुरुषों के योगदान से परिचित कराना भी ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसी दिशा में समारोह में राजा गुरु बालकदास के जीवन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े संदेशों को प्रमुखता दी जाएगी।
श्रद्धालुओं के लिए भोजन और जलपान की व्यवस्था
जयंती समारोह में शामिल होने वाले समाजजनों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए आयोजन समिति की ओर से भोजन एवं जलपान की व्यवस्था भी की गई है।
समिति के पदाधिकारी कार्यक्रम स्थल पर आने वाले लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। रैली को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
अध्यक्ष उमेश कोठले के नेतृत्व में तैयारियां जारी
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के अध्यक्ष उमेश कोठले के नेतृत्व में समिति के पदाधिकारी और सदस्य लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। रैली के मार्ग, झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सम्मान समारोह से संबंधित व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
आयोजन समिति ने सतनामी समाज के सभी वर्गों और क्षेत्र के लोगों से जयंती समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
आयोजकों को उम्मीद है कि राजा गुरु बालकदास जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य संगम बनेगा।



