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बारिश में बालों की समस्या से राहत दिला सकती है मुल्तानी मिट्टी, ऐसे बनाएं हेयर पैक और जानें इस्तेमाल का सही तरीका

रायपुर। बारिश का मौसम गर्मी और तपिश से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान वातावरण में नमी और उमस बढ़ने से बालों और स्कैल्प से जुड़ी कई समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं। ज्यादा नमी के कारण स्कैल्प ऑयली और चिपचिपा हो सकता है। इसके साथ ही खुजली, डैंड्रफ, पसीना और स्कैल्प पर गंदगी जमा होने जैसी दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं।

ऐसे मौसम में बालों को स्वस्थ और साफ रखने के लिए बाजार में मौजूद कई हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कुछ लोग प्राकृतिक उपायों को प्राथमिकता देते हैं। मुल्तानी मिट्टी भी ऐसा ही एक घरेलू विकल्प है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है।

मुल्तानी मिट्टी में अतिरिक्त तेल और गंदगी को सोखने की क्षमता होती है। यही वजह है कि ऑयली स्कैल्प वाले लोगों को इसका कभी-कभार इस्तेमाल फायदेमंद लग सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मुल्तानी मिट्टी बालों की हर समस्या का इलाज नहीं है और इसका इस्तेमाल बालों की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

बारिश में क्यों बढ़ जाती हैं बालों की समस्याएं?

मानसून के दौरान हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है। पसीना और नमी मिलकर स्कैल्प को ज्यादा ऑयली बना सकते हैं। इसके कारण बाल जल्दी चिपचिपे महसूस होते हैं और धूल-मिट्टी भी आसानी से जमा हो सकती है।

ऑयली स्कैल्प में कुछ लोगों को डैंड्रफ और खुजली की समस्या भी अधिक महसूस हो सकती है। वहीं, लगातार नमी के कारण बालों का टेक्सचर भी प्रभावित हो सकता है और वे बेजान नजर आ सकते हैं।

ऐसे में स्कैल्प की नियमित सफाई और बालों की प्रकृति के अनुसार सही हेयर केयर रूटीन अपनाना जरूरी है।

स्कैल्प से अतिरिक्त तेल हटाने में मदद

मुल्तानी मिट्टी का सबसे प्रमुख उपयोग अतिरिक्त तेल सोखने के लिए किया जाता है। बारिश में जिन लोगों का स्कैल्प जल्दी ऑयली हो जाता है, उनके लिए यह कभी-कभार क्लीनिंग पैक की तरह काम कर सकती है।

इसे स्कैल्प पर लगाने से अतिरिक्त सीबम और गंदगी को सोखने में मदद मिल सकती है। इससे सिर कम चिपचिपा महसूस हो सकता है और बालों में कुछ समय के लिए फ्रेशनेस भी आ सकती है।

हालांकि, अगर स्कैल्प पहले से ही रूखा है तो मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।

बालों और स्कैल्प की सफाई में हो सकती है मदद

बारिश के मौसम में पसीने और धूल की वजह से स्कैल्प पर गंदगी जमा हो सकती है। मुल्तानी मिट्टी को पानी के साथ मिलाकर बनाया गया पैक स्कैल्प से अतिरिक्त तेल और सतही गंदगी हटाने में मदद कर सकता है।

इससे स्कैल्प साफ महसूस हो सकता है और बालों में भारीपन या चिपचिपापन कुछ कम हो सकता है।

हालांकि, इसे शैंपू का स्थायी विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। बालों और स्कैल्प की नियमित सफाई के लिए अपनी जरूरत के अनुसार उपयुक्त शैंपू का इस्तेमाल जरूरी है।

डैंड्रफ में भी मिल सकती है कुछ राहत

मानसून में ऑयली स्कैल्प और नमी के कारण कुछ लोगों में डैंड्रफ की समस्या बढ़ सकती है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद कर सकती है, इसलिए इससे डैंड्रफ के कारण होने वाला चिपचिपापन कुछ कम महसूस हो सकता है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है कि मुल्तानी मिट्टी डैंड्रफ का मेडिकल इलाज नहीं है। अगर डैंड्रफ लंबे समय तक बना रहता है, बहुत ज्यादा खुजली होती है या स्कैल्प पर लालिमा, पपड़ी अथवा घाव दिखाई देते हैं, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

ऐसे बनाएं मुल्तानी मिट्टी का हेयर पैक

मुल्तानी मिट्टी का हेयर पैक बनाना काफी आसान है।

सामग्री:

  • मुल्तानी मिट्टी – जरूरत के अनुसार
  • सादा पानी या गुलाबजल
  • बहुत रूखे बाल होने पर अपनी जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजिंग सामग्री

बनाने का तरीका:

सबसे पहले एक साफ कटोरी में मुल्तानी मिट्टी लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी या गुलाबजल डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसका गाढ़ा लेकिन आसानी से लगाने योग्य स्मूद पेस्ट तैयार करें।

अगर आपके बाल बहुत ज्यादा रूखे या घुंघराले हैं, तो इस पैक को पूरी लंबाई में लगाने के बजाय केवल स्कैल्प तक सीमित रखना बेहतर हो सकता है।

स्कैल्प पर कैसे लगाएं?

तैयार पेस्ट को बालों की जड़ों यानी स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाएं। इसे जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है। पैक को लगभग 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें।

एक जरूरी सावधानी यह है कि मुल्तानी मिट्टी को स्कैल्प पर पूरी तरह सूखने और बहुत ज्यादा खिंचाव पैदा करने तक न छोड़ें। इसके बाद सामान्य पानी से बालों को अच्छी तरह धो लें।

जरूरत महसूस होने पर बालों की लंबाई पर हल्का कंडीशनर इस्तेमाल किया जा सकता है।

बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें

मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल सोखती है। यही गुण ऑयली स्कैल्प के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन बार-बार इस्तेमाल करने पर कुछ लोगों के बाल और स्कैल्प जरूरत से ज्यादा ड्राई हो सकते हैं।

खासकर ड्राई, घुंघराले, कलर किए हुए या डैमेज बालों वाले लोगों को इसका इस्तेमाल सीमित रखना चाहिए। अगर लगाने के बाद बाल ज्यादा रूखे या उलझे हुए महसूस हों, तो इसका इस्तेमाल कम कर दें या बंद कर दें।

पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो रखें ये सावधानी

अगर आपने पहले कभी मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया है, तो सीधे पूरे स्कैल्प पर लगाने के बजाय पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करना बेहतर है।

अगर लगाने के बाद जलन, लालिमा, ज्यादा खुजली या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसे तुरंत धो दें। किसी गंभीर स्कैल्प समस्या की स्थिति में घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

किन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकती है?

मुल्तानी मिट्टी खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनका स्कैल्प ऑयली और चिपचिपा रहता है। मानसून में जब पसीने और नमी के कारण स्कैल्प जल्दी गंदा महसूस होता है, तब कभी-कभार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

वहीं, जिन लोगों का स्कैल्प बहुत ड्राई है या बाल पहले से ही रूखे और कमजोर हैं, उन्हें इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।

बाल झड़ने का इलाज नहीं है मुल्तानी मिट्टी

कई बार घरेलू नुस्खों को लेकर यह दावा किया जाता है कि वे बाल झड़ने या बालों की हर समस्या को खत्म कर देते हैं। ऐसा मानना सही नहीं है।

बाल झड़ने के पीछे पोषण की कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव, आनुवंशिक कारण, स्कैल्प की समस्या या अन्य चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं। इसलिए अगर बाल असामान्य रूप से झड़ रहे हैं या लगातार समस्या बनी हुई है, तो विशेषज्ञ से जांच कराना ज्यादा बेहतर है।

निष्कर्ष

बारिश के मौसम में बढ़ी नमी और ऑयली स्कैल्प के कारण होने वाली चिपचिपाहट और गंदगी से निपटने के लिए मुल्तानी मिट्टी को कभी-कभार हेयर पैक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह अतिरिक्त तेल और सतही गंदगी को सोखने में मदद कर सकती है।

हालांकि, इसे बालों की हर समस्या का इलाज नहीं समझना चाहिए। खासकर डैंड्रफ, बाल झड़ने, इंफेक्शन या स्कैल्प में लगातार खुजली और लालिमा जैसी समस्या होने पर सही कारण जानना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

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